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रिक्शे पर अंतिम यात्रा, डर कर टेंपो से कूदीं छात्राएं
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Tue, 18 Oct 2016 01:52 AM IST
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तेजगढ़ी चौराहे पर रिक्शे में जाती शव।
- फोटो : अमर उजाला
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लावारिस लाशों की अंतिम यात्रा की परंपरा बड़ी ही शर्मसार करने वाली है। सोमवार शाम एक लावारिस लाश को रिक्शे से मोर्चरी से सूरजकुंड स्थित श्मशान गृृह ले जाते समय बड़ी अजीबोगरीब स्थिति बनी। हुआ यूं कि तेजगढ़ी चौराहे पर जाम लगा था। भीड़ भरे इलाके में रिक्शे में कफन में लिपटी लाश को देखकर टेंपो में सवार दो छात्राएं डर के मारे कूद गईं और घबराकर चिल्लाने लगीं। यह देखकर चौराहे पर मौजूद लोग ट्रैफिक नियम तोड़कर भागने लगे।
मेडिकल कॉलेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस में हफ्ते में एक-दो दिन जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से लावारिस लाई जाती हैं। 72 घंटे तक शिनाख्त नहीं होने पर पोस्टमार्टम के बाद लाश को मोर्चरी से करीब पांच किमी दूर सूरजकुंड श्मशान गृह ले जाकर अंतिम संस्कार कराया जाता है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित थाने के दो सिपाहियों पर होती है। लेकिन, वे इसे हाथ भी नहीं लगाते। ऐसे ही सोमवार शाम एक लावारिस लाश को मोर्चरी से सूरजकुंड तक पहुंचाने के लिए सिपाहियों ने रिक्शे वाले का सहारा लिया। उसने ही जैसे-तैसे लाश को रिक्शे पर रखकर बांधा और सूरजकुंड के लिए चल पड़ा। वह तेजगढ़ी चौराहे पर पहुंचा तो वहां जाम में फंस गया। इस दौरान आसपास से गुजर रहे लोग शव देखते और मुंह फेर लेते। इसी बीच, टेंपो पर सवार सीसीएसयू की दो छात्राएं लाश देखकर डर गईं। वे टेंपो से कूदीं और शोर मचाने लगीं। इससे चौराहे पर भगदड़ मची तो ट्रैफिक सिपाही सड़क के किनारे जाकर खड़ा हो गया। कुछ ही देर में चौराहा भी खाली हो गया। इसके बाद रिक्शा चालक लाश को गांधी आश्रम चौराहा, हापुड़ अड्डा होते हुए सूरजकुंड लेकर पहुंचा। यहां भी उसने अकेले ही लाश को श्मशान के अंदर पहुंचाया।
सिर्फ सवाल ही उठते रहे हैं
लावारिस लाशों की इस कदर अंतिम यात्रा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। लेकिन, सिस्टम ने ऐसी कोई व्यवस्था बनाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है, जिससे ऐसी अजीबोगरीब स्थितियों से बचा जा सके।
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मेडिकल कॉलेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस में हफ्ते में एक-दो दिन जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से लावारिस लाई जाती हैं। 72 घंटे तक शिनाख्त नहीं होने पर पोस्टमार्टम के बाद लाश को मोर्चरी से करीब पांच किमी दूर सूरजकुंड श्मशान गृह ले जाकर अंतिम संस्कार कराया जाता है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित थाने के दो सिपाहियों पर होती है। लेकिन, वे इसे हाथ भी नहीं लगाते। ऐसे ही सोमवार शाम एक लावारिस लाश को मोर्चरी से सूरजकुंड तक पहुंचाने के लिए सिपाहियों ने रिक्शे वाले का सहारा लिया। उसने ही जैसे-तैसे लाश को रिक्शे पर रखकर बांधा और सूरजकुंड के लिए चल पड़ा। वह तेजगढ़ी चौराहे पर पहुंचा तो वहां जाम में फंस गया। इस दौरान आसपास से गुजर रहे लोग शव देखते और मुंह फेर लेते। इसी बीच, टेंपो पर सवार सीसीएसयू की दो छात्राएं लाश देखकर डर गईं। वे टेंपो से कूदीं और शोर मचाने लगीं। इससे चौराहे पर भगदड़ मची तो ट्रैफिक सिपाही सड़क के किनारे जाकर खड़ा हो गया। कुछ ही देर में चौराहा भी खाली हो गया। इसके बाद रिक्शा चालक लाश को गांधी आश्रम चौराहा, हापुड़ अड्डा होते हुए सूरजकुंड लेकर पहुंचा। यहां भी उसने अकेले ही लाश को श्मशान के अंदर पहुंचाया।
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सिर्फ सवाल ही उठते रहे हैं
लावारिस लाशों की इस कदर अंतिम यात्रा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। लेकिन, सिस्टम ने ऐसी कोई व्यवस्था बनाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है, जिससे ऐसी अजीबोगरीब स्थितियों से बचा जा सके।
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