फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   dashlaksahn parv : soul is a form of omnipotent

दशलक्षण पर्व : आत्मा को सर्वशक्तिमान ब्रह्म स्वरूप कहा गया है

Wed, 02 Sep 2020 01:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2020 01:33 AM IST
विज्ञापन
dashlaksahn parv : soul is a form of omnipotent
हस्तिनापुर(मेरठ)। जंबूद्वीप में आचार्य शांतिसागर प्रवचन हॉल में चल रहे इंद्रध्वज महामंडल विधान के अंतर्गत मंगलवार को दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर चर्चा की गई। इसके बाद जिनालयों की पूजा की गई। मंडल पर चारों दिशाओं के चार अर्घ्य समर्पित किए गए। पूज्य गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता जी ने बताया कि आत्मस्वरूप में लीन रहना ही उत्तम ब्रह्मचर्य है।
विज्ञापन

प्रात:काल भगवान वासु पूज्य का अभिषेक कर विधान का प्रारंभ हुआ। भगवान के मस्तक पर दूध, दही, घी, सर्वोषधि, लाल चंदन, सफेद चंदन, केशर, पुष्पवृष्टि, नारियल जल आदि से महामस्तकाभिषेक किया गया। अंत में विश्व में शांति की कामना से महाशांतिधारा संपन्न की गई। दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के स्वरूप के बारे में पूज्य गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ने प्रवचनों में बताया कि आत्मा को सर्वशक्तिमान ब्रह्म स्वरूप कहा गया है। जो मुनिराज अपने चित्त को स्थिर कर ब्रह्म स्वरूप आत्मा में विचरण करते हैं आत्मा का चिंतन करते हैं वे सद्गुणरूपी संपत्ति को प्राप्त करने के लिए मुनिसंघ में रहकर सदा श्रुत का अध्ययन, मनन, चिंतन करतेे रहते हैं। महाव्रती मुनि पूर्णरूप से ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हैं। अपनी पत्नी के अलावा संपूर्ण नारी जाति को माता, बहन के समान समझना एक देशरूप ब्रह्मचर्य है। किसी विद्वान की लिखी हुई कृति को अपने नाम से प्रकाशित करना या अपने गुरू का नाम छिपाना ज्ञानावरण कर्म को बंद कराता है। विद्वान व्यक्ति वही है जो विनय गुण से परिपूर्ण है। इस प्रकार से रत्नात्रय धर्म का पालन करना चाहिए। मध्याह्न में अनंत चतुर्दशी व्रत के उपलक्ष्य में भगवान अनंतनाथ विधान संपन्न किया गया। भगवान वासु पूज्य जो कि जैनधर्म के 12वें तीर्थंकर हैं आज भगवान वास ुपूज्यनाथ का निर्वाण कल्याणक महोत्सव भी निर्वाण लाडू चढ़ाकर मनाया गया। भगवान वासु पूज्यनाथ का जन्म बिहार प्रांत के चंपापुर ग्राम में हुआ। प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता ने भी उत्तम ब्रह्मचर्य पर प्रवचन दिया। शांतिधारा के मंत्रों का उच्चारण संस्थान के अध्यक्ष पीठाधीश रवीन्द्रकीर्ति स्वामी द्वारा किया गया। संपूर्ण विधि-विधान संस्थान के वरिष्ठ प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन पं. प्रवीण चंद जैन शास्त्री द्वारा संपन्न कराई जा रहे हैं। सांयकालीन सत्र में मंडल विधान, भगवंतों, एवं पूज्य माता की आरती की गई। सांस्कृतिक कार्यकम के रूप में प्रश्न मंच का कार्यक्रम संपन्न किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed