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दारुल उलूम ने फिर जारी किया फतवा, कहा- औरतों का मर्दों के साथ बारात में जाना नाजायज
Wed, 26 Dec 2018 02:49 PM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवबंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवबंद
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 26 Dec 2018 02:49 PM IST
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darul uloom
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दारुल उलूम ने अपने एक महत्वपूर्ण फतवे में किसी भी शादी या अन्य बड़े समारोह में सामूहिक रूप से मर्दों और औरतों का साथ जाना हराम करार दिया है। इतना ही नहीं मुफ्तियों ने शादियों में खड़े होकर खाने को भी नाजायज करार दिया है।
दारुल उलूम का यह फतवा इसलिए भी खास है क्योंकि आजकल अधिकतर समारोह में मर्दों और औरतों का एक साथ जाने और साथ खाना खाने का चलन तेजी के साथ बढ़ रहा है। ऐसे में एक शख्स के सवाल पूछे जाने पर फतवा विभाग के मुफ्तियों की खंडपीठ ने फतवा जारी करते हुए कहा है कि मर्दों के साथ औरतों का बारात में जाना नाजायज है।
इसमें कहा गया है कि महिलाएं बारात में शामिल होती हैं तो वे गुनाह में शामिल होती हैं। फतवे के अनुसार बारात में गैर मर्द भी शामिल होते हैं जिनसे बेपर्दगी होती है ऐसे में उन्हें बारात में नहीं जाना चाहिए।
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दारुल उलूम का यह फतवा इसलिए भी खास है क्योंकि आजकल अधिकतर समारोह में मर्दों और औरतों का एक साथ जाने और साथ खाना खाने का चलन तेजी के साथ बढ़ रहा है। ऐसे में एक शख्स के सवाल पूछे जाने पर फतवा विभाग के मुफ्तियों की खंडपीठ ने फतवा जारी करते हुए कहा है कि मर्दों के साथ औरतों का बारात में जाना नाजायज है।
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इसमें कहा गया है कि महिलाएं बारात में शामिल होती हैं तो वे गुनाह में शामिल होती हैं। फतवे के अनुसार बारात में गैर मर्द भी शामिल होते हैं जिनसे बेपर्दगी होती है ऐसे में उन्हें बारात में नहीं जाना चाहिए।
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इससे पहले नगर के एक मोहल्ला निवासी शख्स ने दारुल उलूम के इफ्ता विभाग (फतवा विभाग) के मुफ्तियों की खंडपीठ से किसी भी कार्यक्रम (शादी) में खाने पीने की सामूहिक व्यवस्था करने और उसमें मर्द और औरत के एक साथ खाना खाने और खड़े होकर भोजन करने को लेकर अलग-अलग सवाल पूछे थे।
इसके जवाब में खंडपीठ ने साफ तौर पर कहा कि सामूहिक रूप से मर्दों और औरतों का एक साथ शामिल होकर भोजन करना हराम है। मुफ्तियों ने मुसलमानों को इससे बचने की नसीहत भी दी है।
वहीं, शादी या किसी भी कार्यक्रम में खड़े होकर खाना खाने के सवाल पर मुफ्तियों ने कहा कि यह गैरों की तहजीब है, इस्लामी तहजीब नहीं है। इसलिए खड़े होकर भोजन करना सरासर नाजायज है। इसके साथ ही मुफ्तियों ने यह भी कहा की इस तरह के अमल से समाज की बर्बादी में देर नहीं लगेगी।
इसके जवाब में खंडपीठ ने साफ तौर पर कहा कि सामूहिक रूप से मर्दों और औरतों का एक साथ शामिल होकर भोजन करना हराम है। मुफ्तियों ने मुसलमानों को इससे बचने की नसीहत भी दी है।
वहीं, शादी या किसी भी कार्यक्रम में खड़े होकर खाना खाने के सवाल पर मुफ्तियों ने कहा कि यह गैरों की तहजीब है, इस्लामी तहजीब नहीं है। इसलिए खड़े होकर भोजन करना सरासर नाजायज है। इसके साथ ही मुफ्तियों ने यह भी कहा की इस तरह के अमल से समाज की बर्बादी में देर नहीं लगेगी।
उधर, दारुल उलूम अशरफिया के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती अथर कासमी ने दारुल उलूम से जारी फतवे का समर्थन करते हुए कहा कि मुफ्तियों ने शरीयत की रोशनी में सही बताया कि इस तरह एक साथ खाना नाजायज और हराम है। यह इस्लामी तहजीब के सरासर खिलाफ हैं। इससे बचना चाहिए।
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