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कोरोना काल की विडंबना

Sat, 30 May 2020 01:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 30 May 2020 01:21 AM IST
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Dada's funeral was not allowed
मेरठ। इसे कोरोना काल की विडंबना ही कहा जाएगा कि इकलौता पोता अपने दादा के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका। मिन्नतों के बाद भी क्वारंटीन पोते को स्वास्थ्य विभाग ने अनुमति नहीं दी। दूर के रिश्तेदार के जरिए अंतिम संस्कार कराया गया। बात हो रही है ब्रह्मपुरी निवासी माता प्रसाद (85) की। मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान बृहस्पतिवार को उनकी कोरोना से मौत हो गई थी। माता प्रसाद के पोते शिव मोहन ने बताया कि उसके पिता की इसी साल 18 मार्च को कैंसर से मौत हो गई थी। ऐसे में वह अपने दादा का अंतिम संस्कार करना चाहता था। क्वारंटीन होने के कारण उसने स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल प्रबंधन से अनुमति मांगी। कई बार प्रयास के बाद भी उसे अनुमति नहीं मिली। शिव मोहन का कहना है कि वह भी पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार में शामिल हो सकता था। इससे पहले भी स्वास्थ्य विभाग ने क्वारंटीन व्यक्ति से अंतिम संस्कार कराया है। वह और उसके परिवार के सभी लोग सुभारती अस्पताल में क्वारंटीन हैं।
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