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Meerut News: विदुरकुटी गंगा स्नान मेले में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले ऐतिहासिक विदुरकुटी गंगा स्नान मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही हैं। बुधवार को दिनभर ट्रैक्टर ट्राली, भैंसा बुग्गी, कार आदि वाहनों से श्रद्धालुओं के जाने का सिलसिला जारी रहा है। गंगा किनारे तंबुओं का शहर बस गया है। गंगा स्नान मेले में बाजार सज जाने से मेला गुलजार हो गया है।
कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला 15 नवंबर को है। मुख्य स्नान से एक दिन पहले बृहस्पतिवार शाम को लोग विदुरकुटी गंगा स्नान मेले में पहुंचकर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दीप दान करते हैं।
इसके अलावा गंगा बैराज घाट, बालावाली घाट, जलीलपुर क्षेत्र में गंगा घाट पर श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूरी विधि विधान से दीपदान करते हैं। दीपदान करने की परंपरा नई नहीं है, बल्कि यह महाभारत काल के दौर से चली आ रही है।
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बुजुर्गों के अनुसार महाभारत काल के युद्ध के समय मारे जाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण की मौजूदगी में दीपदान किया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है और लोग पूर्वजों की आत्मा शांति के लिए दीपदान कर रहे हैं।
n पल्ले की जगह टेंट से बना रहे श्रद्धालु डेरा : विदुरकुटी में गंगा किनारे आस्था का शहर बस चुका है। श्रद्धालुओं की लगातार संख्या बढ़ती जा रही है। भैंसा बुग्गी और ट्रैक्टर ट्राली से श्रद्धालु मेले में पहुंच रहे हैं। किसान पल्ले के स्थान पर टेंट का डेरा बना रहे हैं।
श्रद्धालु ओमवीर सिंह, विनित कुमार ने बताया कि पल्ले कम बनते हैं। करीब पांच सौ रुपये किराए पर टेंट वाले से पाइप व टेंट का कपड़ा लाकर डेरा बना लेते हैं।
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बिजनौर। कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले ऐतिहासिक विदुरकुटी गंगा स्नान मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही हैं। बुधवार को दिनभर ट्रैक्टर ट्राली, भैंसा बुग्गी, कार आदि वाहनों से श्रद्धालुओं के जाने का सिलसिला जारी रहा है। गंगा किनारे तंबुओं का शहर बस गया है। गंगा स्नान मेले में बाजार सज जाने से मेला गुलजार हो गया है।
कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला 15 नवंबर को है। मुख्य स्नान से एक दिन पहले बृहस्पतिवार शाम को लोग विदुरकुटी गंगा स्नान मेले में पहुंचकर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दीप दान करते हैं।
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इसके अलावा गंगा बैराज घाट, बालावाली घाट, जलीलपुर क्षेत्र में गंगा घाट पर श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूरी विधि विधान से दीपदान करते हैं। दीपदान करने की परंपरा नई नहीं है, बल्कि यह महाभारत काल के दौर से चली आ रही है।
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बुजुर्गों के अनुसार महाभारत काल के युद्ध के समय मारे जाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण की मौजूदगी में दीपदान किया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है और लोग पूर्वजों की आत्मा शांति के लिए दीपदान कर रहे हैं।
n पल्ले की जगह टेंट से बना रहे श्रद्धालु डेरा : विदुरकुटी में गंगा किनारे आस्था का शहर बस चुका है। श्रद्धालुओं की लगातार संख्या बढ़ती जा रही है। भैंसा बुग्गी और ट्रैक्टर ट्राली से श्रद्धालु मेले में पहुंच रहे हैं। किसान पल्ले के स्थान पर टेंट का डेरा बना रहे हैं।
श्रद्धालु ओमवीर सिंह, विनित कुमार ने बताया कि पल्ले कम बनते हैं। करीब पांच सौ रुपये किराए पर टेंट वाले से पाइप व टेंट का कपड़ा लाकर डेरा बना लेते हैं।