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भागवत कथा सुनने को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
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मेरठ। नगर निगम स्थित बाबा झारखंडी महादेव शिव मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में दूसरे दिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। इस दौरान वृंदावन से पधारे डॉ. मनोज मोहन शास्त्री ने दूसरे दिन की कथा सुनाई।
उन्होंने दूसरे दिन प्रभु के वाराह अवतार, कपिलोपाख्यान एवं ध्रुव चरित्र का विवरण करते हुए बताया ध्रुव ने अपनी सौतेली मां की बातों के बाद भगवान का भजन करने का निर्णय लिया। नारद मुनि से कहा कि उत्तानपाद की दो पत्नियां थीं सुनीति और सुरुचि। सुनिति के बेटे का नाम ध्रुव था और सुरुचि के बेटे का नाम उत्तम था। एक बार उत्तानपाद सिंहासन पर बैठे हुए थे। ध्रुव भी खेलते हुए राजमहल में पहुंच गए। उस समय उनकी अवस्था पांच वर्ष की थी।
उत्तम राजा उत्तानपाद की गोदी में बैठा हुआ था। ध्रुव भी राजा की गोदी में चढ़ने का प्रयास करने लगे। उन्होंने कहा कि सुरुचि को अपने सौभाग्य का इतना अभिमान था कि उसने ध्रुव को डांटा इस गोद में चढ़ने का तेरा अधिकार नहीं है। अगर इस गोद में चढ़ना है तो पहले भगवान का भजन करके इस शरीर का त्याग कर और फिर मेरे गर्भ से जन्म लेकर मेरा पुत्र बन। तब तू इस गोद में बैठने का अधिकारी होगा।
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ध्रुव रोते हुए अपनी मां के पास आये। मां को सारी व्यथा सुनाई। सुनीति ने सुरुचि के लिये कटु-शब्द नहीं बोले, उसे लगा यदि मैं उसकी बुराई करुंगी तो ध्रुव के मन में हमेशा के लिये वैर-भाव के संस्कार जग जाएंगे। सुनिति ने कहा ध्रुव तेरी विमाता ने जो कहा है, सही कहा है। बेटे यदि भिक्षा मांगनी है तो फिर भगवान से ही क्यों न मांगी जाये। भगवान तुझ पर कृपा करेंगे, तुझे प्रेम से बुलायेंगे, गोद में भी बिठाएंगे। इस मौके पर अशोक कुमार, अनिल रस्तोगी, अरुण अग्रवाल, अमन अग्रवाल, राजेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने दूसरे दिन प्रभु के वाराह अवतार, कपिलोपाख्यान एवं ध्रुव चरित्र का विवरण करते हुए बताया ध्रुव ने अपनी सौतेली मां की बातों के बाद भगवान का भजन करने का निर्णय लिया। नारद मुनि से कहा कि उत्तानपाद की दो पत्नियां थीं सुनीति और सुरुचि। सुनिति के बेटे का नाम ध्रुव था और सुरुचि के बेटे का नाम उत्तम था। एक बार उत्तानपाद सिंहासन पर बैठे हुए थे। ध्रुव भी खेलते हुए राजमहल में पहुंच गए। उस समय उनकी अवस्था पांच वर्ष की थी।
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उत्तम राजा उत्तानपाद की गोदी में बैठा हुआ था। ध्रुव भी राजा की गोदी में चढ़ने का प्रयास करने लगे। उन्होंने कहा कि सुरुचि को अपने सौभाग्य का इतना अभिमान था कि उसने ध्रुव को डांटा इस गोद में चढ़ने का तेरा अधिकार नहीं है। अगर इस गोद में चढ़ना है तो पहले भगवान का भजन करके इस शरीर का त्याग कर और फिर मेरे गर्भ से जन्म लेकर मेरा पुत्र बन। तब तू इस गोद में बैठने का अधिकारी होगा।
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ध्रुव रोते हुए अपनी मां के पास आये। मां को सारी व्यथा सुनाई। सुनीति ने सुरुचि के लिये कटु-शब्द नहीं बोले, उसे लगा यदि मैं उसकी बुराई करुंगी तो ध्रुव के मन में हमेशा के लिये वैर-भाव के संस्कार जग जाएंगे। सुनिति ने कहा ध्रुव तेरी विमाता ने जो कहा है, सही कहा है। बेटे यदि भिक्षा मांगनी है तो फिर भगवान से ही क्यों न मांगी जाये। भगवान तुझ पर कृपा करेंगे, तुझे प्रेम से बुलायेंगे, गोद में भी बिठाएंगे। इस मौके पर अशोक कुमार, अनिल रस्तोगी, अरुण अग्रवाल, अमन अग्रवाल, राजेश शर्मा आदि मौजूद रहे।