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मेडिकल में एमआरआई और सीटी स्कैन पर संकट
Mon, 08 Jul 2019 03:31 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Mon, 08 Jul 2019 03:31 AM IST
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सीटी स्कैन मशीन
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ। मेडिकल कॉलेज के विकिरण लाइसेंस पर रद्द होने का संकट मंडरा रहा है। दरअसल, रेडियोथेरेपी विभाग में करीब ढाई साल से कोबाल्ट 60 और सीजीएम 137 खराब पड़ा है। इसी वजह से लाइसेंस भी सस्पेंड चल रहा है। अगर इसका निस्तारण नहीं किया गया तो लाइसेंस रद्द भी हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो मेडिकल कॉलेज में एमआरआई और सीटी स्कैन का संकट खड़ा हो जाएगा। जबकि यहां हर साल करीब 25 हजार लोग सीटी स्कैन, एक्सरे, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड कराने आते हैं। दूसरी तरफ, रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से पिछले तीन माह से एमआरआई और अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट नहीं बन रही है। सिर्फ फिल्म दी जा रही है।
विकिरण संबंधी व्यवस्थाएं हो जाएंगी चौपट
मेडिकल कॉलेज के विकिरण सुरक्षा अधिकारी डॉ. एके तिवारी ने बताया कि अगर लाइसेंस रद्द हो गया तो मेडिकल कॉलेज में पहले से चल रही विकिरण संबंधी व्यवस्थाएं जैसे-एक्सरे, सीटी स्कैन और एन्जियोग्राफी आदि नहीं हो सकेंगी। इस संबंध में एटॉमिक एनर्जी रेग्युलेट्री बोर्ड को पत्र लिखकर मोहलत मांगी गई थी, लेकिन अभी मोहलत नहीं मिली है।
साढ़े तीन साल से खराब रेडियोथेरेपी मशीन
मेडिकल में पिछले साढ़े तीन साल से रेडियोथेरेपी की मशीन खराब पड़ी है, जबकि कैंसर के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी वजह से कैंसर के मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल में तो इलाज है ही नहीं, जबकि मेडिकल में भी इलाज के लाले पड़े हैं। पिछले साल सिर्फ 24 लोगों को ही इलाज मिल सका। जबकि यहां हर माह आने वाले करीब 100 मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
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तीन करोड़ का आएगा खर्च
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि रेडियोथेरेपी मशीन को सही कराने के लिए कई बार शासन को पत्र भेजा जा चुका है। फिर रिमाइंडर भेजा गया है। इसमें करीब तीन करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
पिछले साल मेडिकल में आए 9.50 लाख मरीज
पिछले साल ओपीडी में जनवरी से दिसंबर तक 9 लाख 50 हजार 424 मरीज आए थे। इनमें 92128 मरीज दिसंबर माह में आए। 12 महीनों में 33289 मरीज भर्ती कराए गए।
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स्टाफ की कमी से जूझ रहा है विभाग
पद जरूरत तैनात
रेडियोलॉजिस्ट एक शून्य
सीनियर रेजिडेंट छह एक
रेडियोग्राफर आठ चार
रूम असिस्टेंट चार तीन
अटेंडेंट चार चार
स्टोर कीपर एक एक
क्या है ये जांचें
एमआरआई: एक ऐसी तकनीक है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की सहायता से शरीर के अंगों एवं उनकी कोशिकाओं का स्पष्ट एवं विस्तृत चित्र बनाया जाता है।
अल्ट्रासाउंड: इसमें उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है, इन तरंगों की मदद से शरीर के अंदर की तस्वीरें निकाली जाती हैं। अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी सुरक्षित स्कैन होते हैं।
सीटी स्कैन: यह एक्सरे का एक रूप होता है, जिसे कम्यूटराइज एक्सीयल टोमोग्राफी भी कहा जाता है। यह शरीर के अंगों के चित्र को दिखाता है।
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सुपर स्पेश्यलिटी में भी इंस्टाल नहीं हो सकेंगी मशीनें
विकिरण लाइसेंस अगर रद्द हो गया तो मेडिकल कॉलेज में 150 करोड़ रुपये से बन रहे सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल में भी मशीनें इंस्टाल नहीं हो सकेंगी। इससे यहां एक्सरे, सीटी स्कैन और रेडियोथेरेपी आदि नहीं हो सकेगी।
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विकिरण संबंधी व्यवस्थाएं हो जाएंगी चौपट
मेडिकल कॉलेज के विकिरण सुरक्षा अधिकारी डॉ. एके तिवारी ने बताया कि अगर लाइसेंस रद्द हो गया तो मेडिकल कॉलेज में पहले से चल रही विकिरण संबंधी व्यवस्थाएं जैसे-एक्सरे, सीटी स्कैन और एन्जियोग्राफी आदि नहीं हो सकेंगी। इस संबंध में एटॉमिक एनर्जी रेग्युलेट्री बोर्ड को पत्र लिखकर मोहलत मांगी गई थी, लेकिन अभी मोहलत नहीं मिली है।
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साढ़े तीन साल से खराब रेडियोथेरेपी मशीन
मेडिकल में पिछले साढ़े तीन साल से रेडियोथेरेपी की मशीन खराब पड़ी है, जबकि कैंसर के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी वजह से कैंसर के मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिला अस्पताल में तो इलाज है ही नहीं, जबकि मेडिकल में भी इलाज के लाले पड़े हैं। पिछले साल सिर्फ 24 लोगों को ही इलाज मिल सका। जबकि यहां हर माह आने वाले करीब 100 मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
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तीन करोड़ का आएगा खर्च
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि रेडियोथेरेपी मशीन को सही कराने के लिए कई बार शासन को पत्र भेजा जा चुका है। फिर रिमाइंडर भेजा गया है। इसमें करीब तीन करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
पिछले साल मेडिकल में आए 9.50 लाख मरीज
पिछले साल ओपीडी में जनवरी से दिसंबर तक 9 लाख 50 हजार 424 मरीज आए थे। इनमें 92128 मरीज दिसंबर माह में आए। 12 महीनों में 33289 मरीज भर्ती कराए गए।
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स्टाफ की कमी से जूझ रहा है विभाग
पद जरूरत तैनात
रेडियोलॉजिस्ट एक शून्य
सीनियर रेजिडेंट छह एक
रेडियोग्राफर आठ चार
रूम असिस्टेंट चार तीन
अटेंडेंट चार चार
स्टोर कीपर एक एक
क्या है ये जांचें
एमआरआई: एक ऐसी तकनीक है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों की सहायता से शरीर के अंगों एवं उनकी कोशिकाओं का स्पष्ट एवं विस्तृत चित्र बनाया जाता है।
अल्ट्रासाउंड: इसमें उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है, इन तरंगों की मदद से शरीर के अंदर की तस्वीरें निकाली जाती हैं। अल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी सुरक्षित स्कैन होते हैं।
सीटी स्कैन: यह एक्सरे का एक रूप होता है, जिसे कम्यूटराइज एक्सीयल टोमोग्राफी भी कहा जाता है। यह शरीर के अंगों के चित्र को दिखाता है।
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सुपर स्पेश्यलिटी में भी इंस्टाल नहीं हो सकेंगी मशीनें
विकिरण लाइसेंस अगर रद्द हो गया तो मेडिकल कॉलेज में 150 करोड़ रुपये से बन रहे सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल में भी मशीनें इंस्टाल नहीं हो सकेंगी। इससे यहां एक्सरे, सीटी स्कैन और रेडियोथेरेपी आदि नहीं हो सकेगी।