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वारदात ने खोली कचहरी में सुरक्षा की पोल
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Fri, 04 Nov 2016 02:31 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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हत्यारोपी इकराम को भगाने की घटना बदमाशों ने फिल्मी स्टाइल में की। बेखौफ पांच बदमाश हथियारों से लैस कचहरी में करीब दो घंटे घूमे। पुलिस का मानना है कि बदमाशों ने कचहरी चारो तरफ से घेरी थी। उनकी प्लानिंग थी कि अगर उनके सामने कोई आया तो उसको मार देंगे। बड़ा सवाल तो कचहरी की सुरक्षा पर उठता है। रोजाना वारदात होने के बावजूद भी पुलिस कचहरी में चेकिंग क्यों नहीं करती।
कचहरी में छह हजार से अधिक अधिवक्ता वकालत करते है। रोजाना करीब 500 से 600 तक मुल्जिमों की कचहरी में पेशी भी होती है। इसके बावजूद कचहरी असुरक्षित है। एक के बाद एक वारदात होने पर भी पुलिस की नींद नहीं टूटती। बृहस्पतिवार दोपहर कचहरी की सुरक्षा की पोल बदमाशों ने खोली। हथियारों से लैस बदमाश कचहरी में घूमते रहे और पेशी पर आए अपने साथी इकराम को आसानी से छुड़ाकर भी ले गए। पुलिस अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी। जबकि पुलिस दावा करती है कि कचहरी परिसर में कैमरे लगे है और उन पर 24 घंटे पुलिस की निगाहें होती है। पुलिस गंभीर होती तो क्या बदमाश मुल्जिम को छुड़ाने में कामयाब हो जाते।
मेरी तो जान ही बच गई...
कांस्टेबल करम अली ने बताया कि एक बदमाश ने पहले उसकी कमर पर तमंचा लगाया और गोली मारने की धमकी दी। एक पल के लिए मैं डर गया और मुझे मौत सामने दिखाई दे रही थी। क्योंकि दूसरे बदमाश ने उसकी कनपटी पर पिस्टल तानी। कनपटी पर पिस्टल व कमर पर तमंचा लगते ही उसके कंधे पर लटकी एसएलआर नीचे गिर गई। तभी कांस्टेबल अरविंद एसएलआर के ऊपर लेट गया। गनीमत रही कि बदमाशों ने गोली नहीं चलाई। बस मेरी तो जान ही बच गई। हमने सरकारी असलहा नहीं लुटने दिया।
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कचहरी से क्यों भागते बदमाश
बदमाशों के भागने का कचहरी साफ्ट अड्डा बन गया है। कुख्यात मोनू जाट, नजाकत अली और कपिल समेत कई बड़े अपराधी कचहरी से भाग चुके हैं। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं, इसके बावजूद भी बदमाशों की फरारी नहीं रुकती। यहां तक कि भरी कचहरी में गैंगवार में नितिन गंजा को गोलियों से भून दिया गया था। इसको लेकर पुलिस कठघरे में खड़ी है। सीसीटीवी कैमरे लगते हैं। लेकिन उनको देखने वाला कोई नहीं है। अधिकांश तो यह कैमरे बंद या खराब रहते हैं। मोनू, कपिल और नजाकत भी पुलिस की साठगांठ से भागे थे।
बंदियों की भूमिका पर सवाल
कांस्टेबल अरविंद ने बताया कि इकराम के साथ दहेज हत्या का आरोपी राहुल और वाहन चोरी का आरोपी नरेंद्र था। सबसे पहले राहुल, फिर नरेंद्र और उसके बाद इकराम की पेशी न्यायालय में कराई गई। जब तीनों को दोनों पुलिस वाले पेशी कराने के बाद सेशन हवालात में ले जाने लगे तभी सामने से बदमाश आए और इकराम को वहां से भगाने लगे। बदमाश इकराम को बाइक पर लेकर गए हैं। कांस्टेबलों ने बंदी राहुल व नरेंद्र पर भी उठाए कि दोनों बंदियों ने बदमाशों का कोई विरोध नहीं किया।
अफसर बोले, चलो कोई बात नहीं
दोनों सिपाहियों की तैनाती पुलिस लाइन में है। आरआई सत्यप्रकाश शर्मा और इंस्पेक्टर सिविल लाइन एसके राणा ने दोनों सिपाहियों से पूछताछ की। इंस्पेक्टर ने पूछा कि जब इकराम भाग रहा था तो क्या उन्होंने शोर मचाया, तुम्हारे हाथ तमंचा कैसे आया, तुम्हारे पास तो रायफल थी तो गोली क्यों नहीं चलाई? इन तमाम सवालों पर दोनों सिपाहियों ने चुप्पी साध ली। बाद में अरविंद बोला कि एसएलआर लूट जाती। जिस पर दोनों पुलिसकर्मियों को अधिकारियों ने हौसला बंधाते हुए कहा कि चलो कोई बात नहीं।
सपा जिलाध्यक्ष ने मुझे हटवाया था
कांस्टेबल अरविंद ने बताया कि वह सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह का गनर था। दीपावली पर बगैर बताए वह अपने घर चला गया था। जिस पर सपा जिलाध्यक्ष ने मुझे अपने पास से हटवा दिया था। तीन दिन पहले पुलिस लाइन में आया था। दोनों सिपाहियों की तरफ से मुल्जिम इकराम के खिलाफ सिविल लाइन थाने में केस दर्ज हो गया। वहीं, दोनों सिपाहियों के खिलाफ भी लापरवाही बरतने का केस दर्ज हुआ है। दोनों सिपाहियों को कप्तान ने सस्पेंड भी कर दिया।
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कचहरी में छह हजार से अधिक अधिवक्ता वकालत करते है। रोजाना करीब 500 से 600 तक मुल्जिमों की कचहरी में पेशी भी होती है। इसके बावजूद कचहरी असुरक्षित है। एक के बाद एक वारदात होने पर भी पुलिस की नींद नहीं टूटती। बृहस्पतिवार दोपहर कचहरी की सुरक्षा की पोल बदमाशों ने खोली। हथियारों से लैस बदमाश कचहरी में घूमते रहे और पेशी पर आए अपने साथी इकराम को आसानी से छुड़ाकर भी ले गए। पुलिस अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी। जबकि पुलिस दावा करती है कि कचहरी परिसर में कैमरे लगे है और उन पर 24 घंटे पुलिस की निगाहें होती है। पुलिस गंभीर होती तो क्या बदमाश मुल्जिम को छुड़ाने में कामयाब हो जाते।
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मेरी तो जान ही बच गई...
कांस्टेबल करम अली ने बताया कि एक बदमाश ने पहले उसकी कमर पर तमंचा लगाया और गोली मारने की धमकी दी। एक पल के लिए मैं डर गया और मुझे मौत सामने दिखाई दे रही थी। क्योंकि दूसरे बदमाश ने उसकी कनपटी पर पिस्टल तानी। कनपटी पर पिस्टल व कमर पर तमंचा लगते ही उसके कंधे पर लटकी एसएलआर नीचे गिर गई। तभी कांस्टेबल अरविंद एसएलआर के ऊपर लेट गया। गनीमत रही कि बदमाशों ने गोली नहीं चलाई। बस मेरी तो जान ही बच गई। हमने सरकारी असलहा नहीं लुटने दिया।
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कचहरी से क्यों भागते बदमाश
बदमाशों के भागने का कचहरी साफ्ट अड्डा बन गया है। कुख्यात मोनू जाट, नजाकत अली और कपिल समेत कई बड़े अपराधी कचहरी से भाग चुके हैं। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं, इसके बावजूद भी बदमाशों की फरारी नहीं रुकती। यहां तक कि भरी कचहरी में गैंगवार में नितिन गंजा को गोलियों से भून दिया गया था। इसको लेकर पुलिस कठघरे में खड़ी है। सीसीटीवी कैमरे लगते हैं। लेकिन उनको देखने वाला कोई नहीं है। अधिकांश तो यह कैमरे बंद या खराब रहते हैं। मोनू, कपिल और नजाकत भी पुलिस की साठगांठ से भागे थे।
बंदियों की भूमिका पर सवाल
कांस्टेबल अरविंद ने बताया कि इकराम के साथ दहेज हत्या का आरोपी राहुल और वाहन चोरी का आरोपी नरेंद्र था। सबसे पहले राहुल, फिर नरेंद्र और उसके बाद इकराम की पेशी न्यायालय में कराई गई। जब तीनों को दोनों पुलिस वाले पेशी कराने के बाद सेशन हवालात में ले जाने लगे तभी सामने से बदमाश आए और इकराम को वहां से भगाने लगे। बदमाश इकराम को बाइक पर लेकर गए हैं। कांस्टेबलों ने बंदी राहुल व नरेंद्र पर भी उठाए कि दोनों बंदियों ने बदमाशों का कोई विरोध नहीं किया।
अफसर बोले, चलो कोई बात नहीं
दोनों सिपाहियों की तैनाती पुलिस लाइन में है। आरआई सत्यप्रकाश शर्मा और इंस्पेक्टर सिविल लाइन एसके राणा ने दोनों सिपाहियों से पूछताछ की। इंस्पेक्टर ने पूछा कि जब इकराम भाग रहा था तो क्या उन्होंने शोर मचाया, तुम्हारे हाथ तमंचा कैसे आया, तुम्हारे पास तो रायफल थी तो गोली क्यों नहीं चलाई? इन तमाम सवालों पर दोनों सिपाहियों ने चुप्पी साध ली। बाद में अरविंद बोला कि एसएलआर लूट जाती। जिस पर दोनों पुलिसकर्मियों को अधिकारियों ने हौसला बंधाते हुए कहा कि चलो कोई बात नहीं।
सपा जिलाध्यक्ष ने मुझे हटवाया था
कांस्टेबल अरविंद ने बताया कि वह सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह का गनर था। दीपावली पर बगैर बताए वह अपने घर चला गया था। जिस पर सपा जिलाध्यक्ष ने मुझे अपने पास से हटवा दिया था। तीन दिन पहले पुलिस लाइन में आया था। दोनों सिपाहियों की तरफ से मुल्जिम इकराम के खिलाफ सिविल लाइन थाने में केस दर्ज हो गया। वहीं, दोनों सिपाहियों के खिलाफ भी लापरवाही बरतने का केस दर्ज हुआ है। दोनों सिपाहियों को कप्तान ने सस्पेंड भी कर दिया।