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बवालियों के चेहरे साफ, अधिकांश का पता ‘खाक’

Wed, 13 Mar 2019 02:18 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज ब्यूरो, अमर उजाला
न्यूज ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 13 Mar 2019 02:18 AM IST
सार

80 बवाली हुए थे बवाल में चिह्नित, 30 हुए नामजद
05 बवाली ही हुए गिरफ्तार, 25 अभी तक चल रहे हैं फरार
50 प्रतिशत बवाली रहते थे इन्हीं झोपड़ियों में, अब कहां ढूंढे पुलिस
 फरार बवालियों पर है 25-25 हजार का इनाम, पुलिस कर रही दबिश देने का दबिश

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The faces of the goats are clean, most know the 'Khak'
अपराध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भूसा मंडी की करीब 200 झुग्गी झोपड़ियों में छह मार्च को आगजनी के बाद दिल्ली रोड पर बवाल काटने के आरोपियों को पुलिस हवा में ढूंढ रही है। अधिकांश बवाली इन्हीं झोपड़ियों में रहने वाले बताए गए। जो आग में राख हो चुकी है। इसके साथ ही इन बवालियों के पते भी खाक हो गए हैं। खुद पुलिस मानकर चल रही है कि इनकी गिरफ्तारी करना अभी आसान नहीं है।
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पुलिस ने अभी तक 80 लोगों को संदिग्ध मानते हुए बवाल में चिह्नित कर तीस बवालियों को नामजद किया। इनमें पांच ही हत्थे चढ़े और अभी 25 फरार है। इनकी गिरफ्तारी पर 25-25 हजार का इनाम भी घोषित है। पुलिस की मानें तो 80 में से 40 बवाली तो ऐसे हैं जो इन झुग्गी झोपड़ियों के अलावा आसपास के रहने वाले थे। इन बवालियों के परिजन भी सामने नहीं आ रहे हैं।
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उधर, एसओ सदर बाजार विजय कुमार गुप्ता दावा कर रहे हैं कि बवालियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। इस मामले में नामजद आरोपियों के कोर्ट से भी वारंट लिए जाएंगे। लेकिन सवाल यह है कि जो बवाली इन झोपड़ियों में रहते थे, उन्हें ये वारंट कहां तामील कराए जाएंगे क्योंकि उनका पता तो खाक हो चुका है।
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बवाल की सूत्रधार काली गायब
इस बवाल में भाजपा कार्यकर्ता समेत पांच आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। बवाली इश्तियाक की पत्नी और इस बवाल की सूत्रधार काली को भी नामजद किया गया है। एसओ सदर के अनुसार काली की तलाश में दबिश दी गई। लेकिन सुराग नहीं लगा। वहीं, जांच में सामने आया कि इश्तियाक के दोनों बेटे भी बवाल में शामिल थे। दोनों ने रोडवेज बसों में तोड़फोड़ करने के साथ भूसा मंडी में जमकर उपद्रव मचाया था। दोनों की लोकेशन बिजनौर में मिलने पर उनकी तलाश में दबिश दी गई है।

कैंट बोर्ड खामोश, बनने लगीं झुग्गियां
मंगलवार को भी भूसा मंडी में अधिकांश परिवार कपड़े की चादर के नीचे दिन काटने को मजबूर दिखे। यहां के रहने वाले सुहेल का कहना है कि धूप से बचने के लिए चादर लगाई है तो रात खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ रही है। तरजीब के अनुसार उसे परिवार की फिक्र है। पता नहीं झोपड़ियां कैसे फिर से बसेंगी।

वहीं, कैंट बोर्ड जहां लगातार अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने की बात कह रहा है। वहीं भूसा मंडी बवाल के बाद फिर से कुछ झुग्गियां बनने लगी हैं। मंगलवार को भूसा मंडी इलाके में कुछ जगह टीन की दीवारें देखी गईं। कैट बोर्ड भी चुप्पी साधे हुए है।

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