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अंधविश्वास का किस्सा खत्म, माना मौत का सच
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 10 Oct 2015 02:45 AM IST
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आखिरकार, अंधविश्वास का किस्सा खत्म हो गया। 74 घंटे के इंतजार के बाद शुक्रवार देररात मानिक के परिजनों ने यह मान लिया कि वह हमेशा के लिए सो गया है। हालांकि, इसके बाद भी ब्रह्मपुरी क्षेत्र के शिव शक्ति नगर स्थित व्यापारी कपिल मित्तल के घर पर पूजा-पाठ जारी रहा।
परिजनों के मुताबिक, शनिवार सुबह मानिक का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उधर, कथित बाबा के दावे की जानकारी पर शुक्रवार को दिनभर आसपास लोगों के साथ व्यापारी के घर पर दूरदराज के लोगों का तांता लगा रहा।
ब्रह्मपुरी क्षेत्र के शिव शक्ति नगर निवासी व्यापारी कपिल मित्तल के इकलौते बेटे मानिक (11 वर्ष) की मौत मंगलवार सुबह डेंगू के चलते हुई थी। परिजन बच्चे का अंतिम संस्कार करने सूरजकुंड स्थित बच्चा श्मशान घाट पहुंचे थे। तभी एक कथित ‘बाबा’ पहुंचा और मानिक की उम्र 52 साल बताकर उसके जिंदा होने का दावा करने लगा। परिजनों को उसने 72 घंटे का समय भी दे दिया। इस पर परिजन बच्चे के शव को लेकर घर लौट आए और मंगलवार रात से ही पूजा-पाठ में लग गए। उसके दावे के मुताबिक, शुक्रवार शाम तक बच्चे को जीवित हो जाना था। इसकी जानकारी पर शुक्रवार को आसपास ही नहीं, दूरदराज के लोग भी ब्रह्मपुरी पहुंच गए। ‘बाबा’ ने 72 घंटे पूरे होने
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पर रात 11:30 बजे का समय दे दिया। इसमें डेढ़ घंटे की विशेष पूजा भी शामिल थी। इस पर भरोसा करते हुए लोगों ने पूजा-पाठ जारी रखा। शुक्रवार शाम सात बजे के बाद पूजा-पाठ में लोगों की संख्या बढ़ गई। सब उम्मीद लगाए बैठे थे कि मानिक फिर से बोल उठेगा। लगातार तीन दिन चले घटनाक्रम के बाद मानिक के परिजनों ने शुक्रवार देर रात उसकी मौत के सच को स्वीकार कर लिया। साथ ही शनिवार सुबह मानिक का अंतिम संस्कार करने की बात कही। हालांकि, इसके बाद भी घर में पूजा-पाठ का दौर चलता रहा।
अंधविश्वास तो आखिर हारना ही था
अंधविश्वास को तो सच्चाई के सामने आखिर हारना था और वह हार गया। शुक्रवार रात के 12:30 बज चुके थे। 72 की जगह 74 घंटे अखंड ज्योति जलाने वाले अंधविश्वास के आगे नतमस्तक परिजन भी कह उठे कि इकलौता चिराग हमेशा के लिए बुझ गया। परिवार पर फिर गम का पहाड़ टूट गया। लेकिन आखिरी समय में तथाकथित बाबा पूजा-पाठ में लगा रहा। बड़ा सवाल यह भी है कि इस अंधविश्वास को दूर करने के लिए पुलिस-प्रशासन को पहले ही आगे आना चाहिए था। लेकिन वह भी तीन दिन कहां सोता रहा।
कचहरी नाला स्थित दयानंद नर्सिंग होम में कपिल के इकलौते बेटे मानिक की मौत की पुष्टि डॉ. विनोद कुमार ने की थी। परिजनों में कोहराम मचना स्वाभाविक था। यह समय उस मां के लिए बड़ा विकट था, जिसने उसे अपने खून से सींचा था। उसके कलेजे से उसी इकलौते बेटे को छीनकर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया था। लेकिन महज एक घंटे बाद ही शव के साथ ही थोथी आशा लेकर लौटे परिजनों को देखकर ममता फिर जाग उठी। कलेजे के टुकड़े के जिंदा होने की फिर आस जगी थी।
ममता के मोह में वो 72 घंटे कैसे बीते, यह तो वह मां और मानिक से जुड़े खून के रिश्ते ही जान सकते हैं। अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़ा यह परिवार रात-दिन मानिक के शव के पास बैठकर बस पूजा-पाठ करता रहा। उस झूठ के सहारे कि अब मानिक बोल उठेगा। लेकिन आखिर अंधविश्वास को तो हारना ही था। 72 घंटे की जगह परिजनों ने 74 घंटे पूरे किए। आस खत्म हुई तो परिजनों पर फिर गम का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन तो मौत को मान चुके, लेकिन मां अभी भी आस लगाए बेटे के शव के पास बैठी है।
11 बजते ही टूटी भीड़
तथाकथित बाबा ने शुक्रवार रात 11:30 बजे कहा कि 12:30 बजे तक मानिक बोल उठेगा। एक घंटे उसको पूजा पाठ के लिये चाहिए। 11 बजते ही आसपास के लोगों की भीड़ मानिक के घर पर उमड़ पड़ी थी। ‘बाबा’ ने पूजा पाठ शुरू किया तो देखने वालों की लंबी लाइन लगी। आधी रात तक लोग लाइन में लगकर मानिक को देखने में जुटे रहे। 12.30 बजे होते ही परिजनों ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि सब कुछ खत्म हो गया। मानिक अब जिंदा नहीं होगा। 72 घंटे की जगह उन्होंने अखंड ज्योति जलाकर 74 घंटे पूजा पाठ की। शनिवार सुबह मानिक का अंतिम संस्कार कर देंगे।
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परिजनों के मुताबिक, शनिवार सुबह मानिक का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उधर, कथित बाबा के दावे की जानकारी पर शुक्रवार को दिनभर आसपास लोगों के साथ व्यापारी के घर पर दूरदराज के लोगों का तांता लगा रहा।
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ब्रह्मपुरी क्षेत्र के शिव शक्ति नगर निवासी व्यापारी कपिल मित्तल के इकलौते बेटे मानिक (11 वर्ष) की मौत मंगलवार सुबह डेंगू के चलते हुई थी। परिजन बच्चे का अंतिम संस्कार करने सूरजकुंड स्थित बच्चा श्मशान घाट पहुंचे थे। तभी एक कथित ‘बाबा’ पहुंचा और मानिक की उम्र 52 साल बताकर उसके जिंदा होने का दावा करने लगा। परिजनों को उसने 72 घंटे का समय भी दे दिया। इस पर परिजन बच्चे के शव को लेकर घर लौट आए और मंगलवार रात से ही पूजा-पाठ में लग गए। उसके दावे के मुताबिक, शुक्रवार शाम तक बच्चे को जीवित हो जाना था। इसकी जानकारी पर शुक्रवार को आसपास ही नहीं, दूरदराज के लोग भी ब्रह्मपुरी पहुंच गए। ‘बाबा’ ने 72 घंटे पूरे होने
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पर रात 11:30 बजे का समय दे दिया। इसमें डेढ़ घंटे की विशेष पूजा भी शामिल थी। इस पर भरोसा करते हुए लोगों ने पूजा-पाठ जारी रखा। शुक्रवार शाम सात बजे के बाद पूजा-पाठ में लोगों की संख्या बढ़ गई। सब उम्मीद लगाए बैठे थे कि मानिक फिर से बोल उठेगा। लगातार तीन दिन चले घटनाक्रम के बाद मानिक के परिजनों ने शुक्रवार देर रात उसकी मौत के सच को स्वीकार कर लिया। साथ ही शनिवार सुबह मानिक का अंतिम संस्कार करने की बात कही। हालांकि, इसके बाद भी घर में पूजा-पाठ का दौर चलता रहा।
अंधविश्वास तो आखिर हारना ही था
अंधविश्वास को तो सच्चाई के सामने आखिर हारना था और वह हार गया। शुक्रवार रात के 12:30 बज चुके थे। 72 की जगह 74 घंटे अखंड ज्योति जलाने वाले अंधविश्वास के आगे नतमस्तक परिजन भी कह उठे कि इकलौता चिराग हमेशा के लिए बुझ गया। परिवार पर फिर गम का पहाड़ टूट गया। लेकिन आखिरी समय में तथाकथित बाबा पूजा-पाठ में लगा रहा। बड़ा सवाल यह भी है कि इस अंधविश्वास को दूर करने के लिए पुलिस-प्रशासन को पहले ही आगे आना चाहिए था। लेकिन वह भी तीन दिन कहां सोता रहा।
कचहरी नाला स्थित दयानंद नर्सिंग होम में कपिल के इकलौते बेटे मानिक की मौत की पुष्टि डॉ. विनोद कुमार ने की थी। परिजनों में कोहराम मचना स्वाभाविक था। यह समय उस मां के लिए बड़ा विकट था, जिसने उसे अपने खून से सींचा था। उसके कलेजे से उसी इकलौते बेटे को छीनकर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया था। लेकिन महज एक घंटे बाद ही शव के साथ ही थोथी आशा लेकर लौटे परिजनों को देखकर ममता फिर जाग उठी। कलेजे के टुकड़े के जिंदा होने की फिर आस जगी थी।
ममता के मोह में वो 72 घंटे कैसे बीते, यह तो वह मां और मानिक से जुड़े खून के रिश्ते ही जान सकते हैं। अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़ा यह परिवार रात-दिन मानिक के शव के पास बैठकर बस पूजा-पाठ करता रहा। उस झूठ के सहारे कि अब मानिक बोल उठेगा। लेकिन आखिर अंधविश्वास को तो हारना ही था। 72 घंटे की जगह परिजनों ने 74 घंटे पूरे किए। आस खत्म हुई तो परिजनों पर फिर गम का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन तो मौत को मान चुके, लेकिन मां अभी भी आस लगाए बेटे के शव के पास बैठी है।
11 बजते ही टूटी भीड़
तथाकथित बाबा ने शुक्रवार रात 11:30 बजे कहा कि 12:30 बजे तक मानिक बोल उठेगा। एक घंटे उसको पूजा पाठ के लिये चाहिए। 11 बजते ही आसपास के लोगों की भीड़ मानिक के घर पर उमड़ पड़ी थी। ‘बाबा’ ने पूजा पाठ शुरू किया तो देखने वालों की लंबी लाइन लगी। आधी रात तक लोग लाइन में लगकर मानिक को देखने में जुटे रहे। 12.30 बजे होते ही परिजनों ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि सब कुछ खत्म हो गया। मानिक अब जिंदा नहीं होगा। 72 घंटे की जगह उन्होंने अखंड ज्योति जलाकर 74 घंटे पूजा पाठ की। शनिवार सुबह मानिक का अंतिम संस्कार कर देंगे।