सॉल्वर ने अमीर बबने की चाह में अपनाया ये खतरनाक शार्टकट, अब नहीं बन पाएगा अफसर
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सीआरपीएफ में उपनिरीक्षक के पद पर चयन हो चुका था, एक माह बाद ज्वॉनिंग करनी थी, लेकिन अमीर बनने के शार्टकट ने अमित को सॉल्वर बना दिया। वह ना तो अमीर बन सका और हाथ में आई नौकरी भी खतरे में पड़ गई। पुलिस गिरफ्त में आने पर सॉल्वर गैंग के सदस्य अमित के पास अब अपने कृत्य पर पछतावे के सिवाय कुछ नहीं बचा है।
सोमवार को पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान साल्वर गैंग एवं अभ्यर्थियों समेत सात लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। जिनमें साल्वर गैंग के शिव शंकर निवासी अमरपुर थाना पकरी बरोआ जिला नवादा बिहार को इस्लामिया इंटर कॉलेज से, आकाश कुमार उर्फ कौशल निवासी ग्राम लोडी न्यू सराय नालंदा बिहार और अमित निवासी झोझूकला थाना चरखी दादरी हरियाणा को शहीद मेमोरियल इंटर कॉलेज से गिरफ्तार किया गया।
इनके साथ ही अभ्यर्थी विशाल यादव निवासी ग्राम पूठड़ बागपत, आमिर, सलीम और सुहेल निवासी ग्राम तावली शाहपुर मुजफ्फरनगर को भी गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से फर्जी प्रवेश पत्र, फर्जी आधार कार्ड, फर्जी आईडी के अलावा फोटो, मोबाइल फोन, एक कार बरामद की गई है।
एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि पकड़े गए मुन्ना भाई में हरियाणा निवासी अमित को सौरभ यादव निवासी ग्राम लहचोड़ा खेकड़ा बागपत के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़ा। उन्होंने बताया कि अमित का चयन सीआरपीएफ में उपनिरीक्षक के पद पर हो चुका है और एक माह बाद उसे ज्वाइनिंग करनी थी, लेकिन इस बीच वह पैसा कमाकर अमीर बनने के चक्कर में सॉल्वर बन बैठा। उसने सौरभ के साथी विशाल से मिलकर उसका पहचान पत्र, आधार कार्ड, आईडी तथा प्रवेश पत्र को फर्जी फोटो लगाकर तैयार किया और परीक्षा देने के लिए बैठ गया, लेकिन पुलिस को धोखा नहीं दे सका। अब उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। जिससे उसकी नौकरी ज्वानिंग से पहले ही खतरे में पड़ गई।
कद काठी देख हुआ शिवशंकर पर संदेह
एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान इस्लामिया इंटर कॉलेज से पकड़ा गया बिहार निवासी शिव शंकर को परीक्षा देते देख परीक्षकों को संदेह हुआ। शिव शंकर की न तो शारीरिक स्थिति ही पुलिस भर्ती लायक लगी और न ही उसका कद इतना था कि पुलिस भर्ती में शामिल हो सके। संदेह होने पर उससे पकड़कर पूछताछ की तो वह सुहेल के स्थान पर परीक्षा देते हुए पाया गया।
रविवार को पकड़े गए थे चार आरोपी
पुलिस ने रविवार को भी गागलहेड़ी से साल्वर गैंग के दो सदस्यों समेत चार लोगों को पकड़ा था। जिनमें बागपत के बिनौली निवासी रवि और बिहार निवासी बिजेंद्र साल्वर गैंग के सदस्य थे। बिजेंद्र ने सुबह की पाली में बिनौली निवासी दीपक के स्थान पर परीक्षा दी थी, जबकि शाम की पाली में बिजेंद्र ने ही राकेश निवासी परतापुर मेरठ के स्थान पर परीक्षा दी थी।
ठेका पांच लाख तक, पेशगी 25 हजार
एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि सॉल्वर गैंग के सदस्य एक लाख रुपये से पांच लाख रुपये में पास कराने का ठेका लेते थे। पेशगी के तौर पर दस हजार से 25 हजार रुपये लेकर परीक्षा में बैठते थे और पास होने पर शेष रुपये दिया जाना तय करते थे।
परीक्षा केंद्र के बाहर ही करते थे संपर्क
एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि सॉल्वर गैंग में अधिकांश बिहार के रहने वाले हें। ये युवक दिल्ली में रहकर एसएसबी एवं अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। बिहार के रहने वाले इन लोगों ने भी पैसा कमाने के लिए परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे और अभ्यर्थियों से संपर्क कर उनके सॉल्वर बन गए।
6 युवकों की भी रेलवे भर्ती परीक्षा दिला चुका है गैंग
बिजनौर में सोमवार को कृष्णा कॉलेज में परीक्षा की द्वितीय पाली के दौरान शामली के हिमांशु की जगह अलीगढ़ जिले के टप्पल थाना क्षेत्र के गांव जट्टारी निवासी मोहित परीक्षा देते हुए पकड़ा गया था। मोहित की निशानदेही पर पुलिस ने कॉलेज के बाहर कार में बैठे बुलंदशहर के उमेश, बागपत निवासी आस मोहम्मद को दबोचा था। उनके एक साथी सरफराज को बागपत से पुलिस ने दबोचा था। पकड़े गए गैंग के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि पिछले दिनों रेलवे की परीक्षा में उन्होंने बिहार के छह युवकों की परीक्षा दिलाई थी। हर युवक से छह-छह लाख रुपये लिए थे। इन युवकों के अंगूठों के निशान भी फर्जी तरीके से बना लिए थे। परीक्षा देने में दूसरे सदस्य बैठा दिए गए थे, पर ये युवक परीक्षा में पास नहीं हो पाए थे।
आस मोहम्मद बनाता है अंगूठे का निशान
एसएसआई नरेंद्र गौड़ के मुताबिक आस मोहम्मद व उसका भाई सरफराज अंगूठे के निशान बनाने में माहिर हैं। आस मोहम्मद की इस काम में सरफराज मदद करता है। अंगूठे का एक निशान बनाने में सरफराज गैंग के सदस्यों से दो से पांच हजार रुपये लेता है। पुलिस के मुताबिक बागपत पुलिस ने सरफराज को दबोच लिया है। उसे बिजनौर पुलिस के हवाले किया जा रहा है।
ऐसे बनाते हैं निशान :
चिपकाने में इस्तेमाल होने वाले फेवीक्विक को फार्म भरने वाले के अंगूठे पर डालकर निशान लेते हैं। इसके बाद फेवीकोल, टायर पंक्चर जोड़ने वाला सुलोचन, त्वचा के रंग की नील पॉलिश को एक जगह मिलाकर अंगूठे के निशान पर डाल देते हैं। बाद में इस निशान को उठाकर परीक्षा देने वाले युवक के अंगूठे पर चिपका देते हैं।
दीपक की वजह से पकड़ा गया गैंग
कृष्णा कॉलेज के कंप्यूटर ऑपरेटर दीपक सिंह की बदौलत सॉल्वर गैंग पकड़ा गया। जब बायोमैट्रिक मशीन पर मोहित के अंगूठे का निशान हिमांशु के नाम से मशीन नहीं पकड़ पा रही थी। इस बात पर दीपक को शक हुआ। दीपक ने यह बात परीक्षा दिला रहे अफसरों को बताई। फ्लाईंग स्क्वॉयड ने आकर छापा मारा तबजाकर यह गैंग पकड़ा गया।
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