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राजस्थान की युवती मुक्त कराई, कोठा संचालिका गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 14 Jan 2016 01:51 AM IST
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नेपाल में भूकंप से मची तबाही को कौन नहीं जानता। लेकिन उसकी आड़ लेकर मानवता को शर्मसार करने का मामला बुधवार को सामने आया है। पीड़ित परिवार की मददगार बनकर दो महिलाओं ने नेपाल की नाबालिग लड़कियों को देह व्यापार में धकेल दिया। नेपाल की सात किशोरियों को कबाड़ी बाजार के रेड लाइट एरिया में बेचा गया। दिल्ली की संस्था की शिकायत पर पुलिस ने छापा मारा। लेकिन इन किशोरियों को सुराग नहीं लगा। हालांकि राजस्थान की एक युवती पुलिस ने मुक्त कराई है। जिसमें कोठा संचालिका की गिरफ्तारी हुई है।
रेस्क्यू फाउंडेशन दिल्ली के मैनेजर राजेश चतुर्वेदी ने बताया कि उनकी संस्था करीब एक सप्ताह से शहर में डेरा डाले हुए है। सूचना मिली थी कि नेपाल में भूकंप के शिकार परिवार की सात नाबालिग बेटियों को कबाड़ी बाजार मेरठ के रेड लाइट एरिया में बेचा गया है। जिनसे देह व्यापार कराया जा रहा है।
उनका दावा है कि सातों किशोरियों को उन्होंने यहां एक कोठे पर देखा है। राजेश चतुर्वेदी ने मंगलवार को पुलिस-प्रशासन को इसकी जानकारी दी थी। बुधवार को रेस्क्यू फाउंडेशन की टीम के साथ सीओ महिला थाना अब्दुल कादिर, महिला पुलिस समेत कई थानों की पुलिस ने संयुक्त रूप से कबाड़ी बाजार में छापा मारा।
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तमाम छानबीन करने के बावजूद पुलिस टीम को यहां नेपाल की किशोरियों नहीं मिली। लेकिन राजस्थान की एक युवती और कोठा संचालिका को पुलिस थाना एएचटीयू ले आई। मुक्त करायी गई युवती ने बताया कि उसकी मां और भाई पांच साल पहले कोठे पर छोड़कर गए थे। एएचटीयू के प्रभारी इंस्पेक्टर अशोक शर्मा ने बताया कि मुक्त कराई गई युवती को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। जबकि कोठा संचालिका को जेल भेजा जाएगा। सीओ अब्दुल कादिर का कहना है कि नेपाल की किशोरियों की पुलिस कबाड़ी बाजार में तलाश करेंगी। पीड़ित किशोरियों को जल्द ही मुक्त कराया जाएगा।
मददगार दोनों महिलाओं की तलाश
राजेश चतुर्वेदी ने बताया कि नेपाल में भूकंप आने के बाद दिल्ली की दो महिलाएं वहां पर गई थी। पीड़ित परिवार की मदद करने की बात कहकर सातों किशोरियों को अपने साथ लेकर आयी थीं। लेकिन कुछ दिनों बात पता चला कि दोनों महिलाओं ने किशोरियों को कबाड़ी बाजार में बेच दिया है। दोनों महिलाएं अब गाजियाबाद में रह रही हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगी हुई है।
छापा लगते ही मची भगदड़
कबाड़ी बाजार में पुलिस का छापा लगते ही कोठों पर अफरातफरी मच गई। कोठा संचालिका वहां से भागने लगीं। जबकि देह व्यापार करने वाली युवतियां इधर-उधर छिपने लगी। करीब दो घंटे तक पुलिस ने चौतरफा घेराबंदी कर चेकिंग की, ताकि कोई भी बाहर न जा सके।
एक मकान में रहती थीं सातों किशोरी
सीओ अब्दुल कादिर ने बताया कि नेपाल की सातों किशोरियों को कबाड़ी बाजार में कोठा संचालिका ने एक मकान में रखा हुआ था। दिल्ली की संस्था ने उक्त मकान में किशोरियों को देखने के बाद ही पुलिस-प्रशासन को जानकारी दी थी, लेकिन छापामारी के दौरान किशोरी कहां चली गईं, कोई नहीं जानता।
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रेस्क्यू फाउंडेशन दिल्ली के मैनेजर राजेश चतुर्वेदी ने बताया कि उनकी संस्था करीब एक सप्ताह से शहर में डेरा डाले हुए है। सूचना मिली थी कि नेपाल में भूकंप के शिकार परिवार की सात नाबालिग बेटियों को कबाड़ी बाजार मेरठ के रेड लाइट एरिया में बेचा गया है। जिनसे देह व्यापार कराया जा रहा है।
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उनका दावा है कि सातों किशोरियों को उन्होंने यहां एक कोठे पर देखा है। राजेश चतुर्वेदी ने मंगलवार को पुलिस-प्रशासन को इसकी जानकारी दी थी। बुधवार को रेस्क्यू फाउंडेशन की टीम के साथ सीओ महिला थाना अब्दुल कादिर, महिला पुलिस समेत कई थानों की पुलिस ने संयुक्त रूप से कबाड़ी बाजार में छापा मारा।
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तमाम छानबीन करने के बावजूद पुलिस टीम को यहां नेपाल की किशोरियों नहीं मिली। लेकिन राजस्थान की एक युवती और कोठा संचालिका को पुलिस थाना एएचटीयू ले आई। मुक्त करायी गई युवती ने बताया कि उसकी मां और भाई पांच साल पहले कोठे पर छोड़कर गए थे। एएचटीयू के प्रभारी इंस्पेक्टर अशोक शर्मा ने बताया कि मुक्त कराई गई युवती को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। जबकि कोठा संचालिका को जेल भेजा जाएगा। सीओ अब्दुल कादिर का कहना है कि नेपाल की किशोरियों की पुलिस कबाड़ी बाजार में तलाश करेंगी। पीड़ित किशोरियों को जल्द ही मुक्त कराया जाएगा।
मददगार दोनों महिलाओं की तलाश
राजेश चतुर्वेदी ने बताया कि नेपाल में भूकंप आने के बाद दिल्ली की दो महिलाएं वहां पर गई थी। पीड़ित परिवार की मदद करने की बात कहकर सातों किशोरियों को अपने साथ लेकर आयी थीं। लेकिन कुछ दिनों बात पता चला कि दोनों महिलाओं ने किशोरियों को कबाड़ी बाजार में बेच दिया है। दोनों महिलाएं अब गाजियाबाद में रह रही हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगी हुई है।
छापा लगते ही मची भगदड़
कबाड़ी बाजार में पुलिस का छापा लगते ही कोठों पर अफरातफरी मच गई। कोठा संचालिका वहां से भागने लगीं। जबकि देह व्यापार करने वाली युवतियां इधर-उधर छिपने लगी। करीब दो घंटे तक पुलिस ने चौतरफा घेराबंदी कर चेकिंग की, ताकि कोई भी बाहर न जा सके।
एक मकान में रहती थीं सातों किशोरी
सीओ अब्दुल कादिर ने बताया कि नेपाल की सातों किशोरियों को कबाड़ी बाजार में कोठा संचालिका ने एक मकान में रखा हुआ था। दिल्ली की संस्था ने उक्त मकान में किशोरियों को देखने के बाद ही पुलिस-प्रशासन को जानकारी दी थी, लेकिन छापामारी के दौरान किशोरी कहां चली गईं, कोई नहीं जानता।