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कवाल कांड: आज तक इंसाफ का इंतजार, दंगे के मुकदमों में छह साल बाद भी नहीं मिली आरोपियों को सजा

Sat, 07 Sep 2019 01:32 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 07 Sep 2019 01:32 PM IST
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Muzaffarnagar Kawal Kand 2013: Those accused of rioting have not been sentenced even after six years
मुजफ्फरनगर कवाल कांड फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

मुजफ्फरनगर में दंगे को छह साल बीत गए। दंगे के तमाम मुकदमे अदालत में चल रहे हैं, मगर छह साल बाद भी दंगे के किसी भी मुकदमे में एक भी दोषी को सजा नहीं हो सकी है। गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण मर्डर, रेप तक के मुकदमे से आरोपी छूट गए हैं।

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हत्याओं के एक दर्जन मुकदमे अभी सेशन कोर्ट में और अन्य मुकदमे निचली अदालत में विचाराधीन है। केवल कवाल कांड के ममेरे भाइयों सचिन-गौरव दोहरे हत्याकांड में ही सात आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हो सकी है।
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जिले में छह साल पहले 27 अगस्त 2013 को हुआ कवाल कांड दंगे की वजह बना था। कवाल कांड के विरोध में 7 सितंबर को नंगला मंदौड़ की पंचायत के खत्म होते ही जिले में दंगा भड़क गया था। हजारों लोग बेघर हुए थे और 65 से अधिक लोग मारे गए थे। पांच सौ से अधिक मुदकमे दर्ज हुए थे। एसआईसी ने जांच के उपरांत 170 मुकदमों में चार्टशीट दाखिल की थी।
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बीते छह साल से मुकदमे कोर्ट में चल रहे हैं, मगर दंगे के किसी भी मुकदमे में आज तक एक भी दोषी को सजा नहीं मिल सकी है। मर्डर, रेप जैसे मुकदमे भी मौके के गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण लोग छूट गए हैं।

वर्तमान में सेशन कोर्ट में एक दर्जन मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें पुरबालियान, कुटबा-कुटबी, जौली, बहावड़ी, फुगाना, लिसाड़, लांक में हुई हत्याओं के भी शामिल है। इस वर्ष आठ फरवरी को केवल कवाल कांड के सचिन-गौरव हत्याकांड में सात आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई है।

यह भी पढ़ें: दोहरे हत्याकांड के बाद दंगे की आग में जल उठा था मुजफ्फरनगर, छह साल बाद भी कवाल का नहीं बदला हाल

मंत्री और कई विधायकों पर भी दर्ज हैं मुकदमे

दंगे के मुकदमे मंत्रियों और विधायकों पर भी दर्ज हैं, जिनका अदालत में ट्रायल चल रहा है। नंगला मंदौड़ की पंचायत में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा, विधायक उमेश मलिक, ठाकुर संगीत सोम, पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह, साध्वी प्राची आदि के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं।

खतौली विधायक विक्रम सैनी पर भी कवाल कांड के दौरान को मुकदमा दर्ज है। गत वर्ष ये मुकदमे यहां से प्रयागराज की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट भेज दिए गए थे। अब फिर से इन मुकदमों को वापस जिला मुख्यालय भेजा गया है। अब मंत्री, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के मुकदमे यहां एडीजे-4 कोर्ट में सुने जाएंगे। 

यह भी पढ़ें: मुजफ्फरनगर कवाल कांड: छठे आरोपी ने छह साल बाद किया सरेंडर, अदालत ने भेजा जेल

शासन 74 मुकदमे वापस लेने की दे चुकी है मंजूरी

भाजपा नेताओं की पहल पर सूबे की योगी सरकार दंगे से संबंधित 74 मुकदमे वापस लेने की मंजूरी दे चुकी है, मगर छह माह बाद भी कोर्ट से एक भी मुकदमा वापस नहीं हो सका है। गत वर्ष केंद्रीय राज्यमंत्री सांसद डॉ. संजीव बालियान, विधायक उमेश मलिक, विजय कश्यप के अलावा भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, गठवाला खाप के राजेंद्र सिंह मलिक आदि ने सीएम योगी से भेंट की थी।

बताया था कि दंगे के बाद पुलिस और कुछ लोगों ने पांच सौ से अधिक ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए थे। उन्होंने सीएम को 131 मुकदमों की पत्रावली सौंपी थी। तत्कालीन डीएम जीएस प्रियदर्शी और एसएसपी अनंत देव ने इन मुकदमों की आख्या शासन को भेजी थी। शासन ने इनमें से 92 मुकदमों को वापस लेने के लिए चिह्नित किया था, जिनमें से 74 मुकदमे वापस लेने की मंजूरी योगी सरकार दे चुकी है। मगर, इन मुकदमों के वापसी कोर्ट पर निर्भर है।

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