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दोहरे हत्याकांड के बाद दंगे की आग में जल उठा था मुजफ्फरनगर, छह साल बाद भी कवाल का नहीं बदला हाल

Tue, 27 Aug 2019 05:14 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 27 Aug 2019 05:14 PM IST
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kawal kand: Muzaffarnagar was burnt in fire of riot after double murder before six years
कवाल कांड - फोटो : अमर उजाला

दोहरे हत्याकांड के बाद सुर्खियों में आए मुजफ्फरनगर के कवाल का हाल छह साल बाद भी वही है। देश की राजनीति को बदल देने वाला यह गांव कई सुविधाओं से वंचित हैं। यहां तक कि गांव का सरकारी अस्पताल भी यहां से स्थानांतरित हो गया। आगे स्लाइड्स में जानें आखिर कैसे दोहरे हत्याकांड के बाद काफूर हुईं इस क्षेत्र की खुशियां:- 

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मुजफ्फरनगर कवाल कांड के आरोपी - फोटो : अमर उजाला

कवाल निवासी शकील बताते हैं कि गांव से सरकारी अस्पताल सिखेड़ा चला गया। राजकीय इंटर कॉलेज का संचालन शुरू नहीं हो सका। पेयजल सुविधा नहीं मिल पाई। गांव की सड़कों की सड़कों का भी हाल बुरा है और कवाल से मलिकपुरा जाने वाली सड़क भी टूटी पड़ी है।

ग्रामीण अजमत बताते हैं कि जनप्रतिनिधियों ने भी गांव की सुध नहीं ली है। पहले मलिकपुरा के निवासी कवाल होकर जाते थे, लेकिन हत्याकांड के बाद से गांव के बाहर से गुजर रहे दूसरे रास्ते पर सड़क का निर्माण हो गया था। अब लोग वहीं से आते-जाते हैं। 

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कवाल कांड - फोटो : अमर उजाला

बीती भूल आगे बढ़ने की कोशिश में कवाल 

कवाल कांड से सीधे तौर पर प्रभावित दोनों पक्षों के अलावा अन्य लोग बीती भूलकर आगे बढ़ने की कोशिश में लगे हैं। इस कांड की छठी बरसी पर गांव के हालात पूरी तरह सामान्य हैं। जिस चौक पर दोहरा हत्याकांड हुआ वहां भी दिनचार्या सामान्य नजर आई।

कवाल में बस स्टैंड से लेकर मुख्य चौराहों तक चहल-पहल नजर आई। घटनास्थल के पास मौजूद शमशाद, सुलेमान ने बताया कि ग्रामीण अब उस घटना को याद नहीं करना चाहते। वह एक दुखद घटना थी, जिसे भूलना ही अच्छा है। 

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कवाल कांड
कवाल कांड 2013... कब क्या हुआ?

26 अगस्त : बाइक और साइकिल की भिड़ंत होने पर मुजस्सिम और शाहनवाज का गौरव से विवाद हुआ। 
27 अगस्त : शाहनवाज से हुई कहासुनी के बाद मारपीट। सुआं लगने से शाहनवाज हुआ घायल। बाद में जानसठ अस्पताल में हुई मौत। शाहनवाज पक्ष ने गौरव और सचिन की पीट-पीटकर हत्या कर दी। 
28 अगस्त : सचिन-गौरव के अंतिम संस्कार से लौटती भीड़ ने कवाल में घुसकर पथराव और आगजनी की। तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह एवं एसएसपी मंजिल सैनी का तबादला। 
 
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कवाल चौक जहां से शुरू हुआ था विवाद - फोटो : अमर उजाला
30 अगस्त : कवाल में हुई तोड़फोड़, पथराव एवं आगजनी के विरोध में खालापार में जुमे की नमाज के बाद दिया गया ज्ञापन। भड़काऊ भाषण एवं नारेबाजी। 
31 अगस्त : खालापार में हुई सभा की प्रतिक्रिया में हिंदूवादी संगठनों ने सिखेड़ा के गांव नंगला मंदौड़ में की पंचायत। 
07 सितंबर : नंगला मंदौड़ में दोबारा हुई महापंचायत से लौटते लोगों पर जगह-जगह किए गए हमले। जिले में जगह-जगह भड़का दंगा। 
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