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मेरठ में नौकर ने डेयरी संचालक को मार डाला
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 23 Jan 2016 02:23 AM IST
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टीपी नगर के शिवपुरम इलाके में बृहस्पतिवार रात डेयरी संचालक की गर्दन पर लोहे की रॉड मारकर हत्या करने से सनसनी फैल गई। हत्या को पांच दिन पूर्व ही रखे गए नौकर द्वारा अंजाम देना बताया गया। वारदात के बाद हत्यारोपी डेयरी संचालक की जेब से नकदी खंगालकर फरार हो गया। शुक्रवार तड़के बिस्तर पर रक्तरंजित शव मिलने से परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस हत्यारोपी को मौके पर छूटे उसके मोबाइल फोन के सहारे तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार 70 वर्षीय राजाराम की शिवपुरम नई बस्ती लल्लापुरा से सटी विकास पुरी कॉलोनी में दूध की डेयरी थी। राजाराम डेयरी में ही बने कमरे में रहते थे। रोजाना की तरह राजाराम का बेटा सचिन शुक्रवार तड़के करीब 5:30 बजे डेयरी पहुंचा तो उसका गेट चौपट खुला हुआ था। जब वह कमरे में पहुंचा तो राजाराम बिस्तर पर मृत हालत में पड़े थे। पास ही खून से सनी लोहे की रॉड पड़ी थी। डेयरी से नौकर सुनील भी गायब था। यह देखकर उसने शोर मचा दिया। सूचना पर सचिन के बड़े भाई प्रभात और अन्य परिजनों के अलावा टीपी नगर थाना पुलिस भी पहुंच गई।
जिसे सहारा दिया, उसी ने किया बेसहारा
प्रभात ने बताया कि पांच दिन पूर्व सचिन को सुनील नाम का युवक जंगल में घूमता मिला था। सुनील ने सचिन से कहा था कि वह बहुत भूखा है। उसके पास कोई काम धंधा और रहने का ठिकाना भी नहीं है। वह गोवा से भटककर यहां आ गया। तरस खाकर सचिन ने उसे घर लाकर न केवल खाना खिलाया, बल्कि उसे डेयरी पर ही नौकर रख लिया था। उसका काम पशुओं की देखभाल और चारा लाने का था। लेकिन परिजनों को अब मलाल हो रहा है कि जिस अनजान शख्स को उन्होंने सहारा दिया, वह एक झटके में उन्हें बेसहारा कर फरार हो गया।
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हत्या के कारणों में उलझन
राजाराम के परिजनों ने नौकर सुनील को ही हत्यारा बताकर नामजद किया है। उसके मौके से फरार होने, जेब से नकदी गायब मिलने और परिस्थितिजनक साक्ष्यों के आधार पर परिजन और पुलिस सुनील को ही कातिल मानकर चल रहे हैं। अगर यह सही है तो सुनील पेशेवर अपराधी की तरह हो सकता हो कि नौकरी की आड़ में वारदात अंजाम देता हो। राजाराम से रुपये मांगने को लेकर विवाद हुआ हो या फिर राजाराम के पास ज्यादा नकदी देखकर उसे लालच आ गया हो।
नहीं कराया वेरीफिकेशन
नौकर ने अपना नाम सुनील और खुद को गोवा का रहने वाला बताया था। बस राजाराम के परिजनों ने उस पर अंधा विश्वास कर उसे नौकर रख लिया। लेकिन उसका अतीत जानने के लिए उसका पुलिस वेरीफिकेशन कराना भी जरूरी नहीं समझा। जबकि एहतियातन यह जरूरी भी है। सीओ ब्रह्मपुरी का कहना है कि यदि लोग घर या दुकान में नौकर रखने से पहले उसका पुलिस वेरिफिकेशन करा लें तो ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता है।
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पुलिस के अनुसार 70 वर्षीय राजाराम की शिवपुरम नई बस्ती लल्लापुरा से सटी विकास पुरी कॉलोनी में दूध की डेयरी थी। राजाराम डेयरी में ही बने कमरे में रहते थे। रोजाना की तरह राजाराम का बेटा सचिन शुक्रवार तड़के करीब 5:30 बजे डेयरी पहुंचा तो उसका गेट चौपट खुला हुआ था। जब वह कमरे में पहुंचा तो राजाराम बिस्तर पर मृत हालत में पड़े थे। पास ही खून से सनी लोहे की रॉड पड़ी थी। डेयरी से नौकर सुनील भी गायब था। यह देखकर उसने शोर मचा दिया। सूचना पर सचिन के बड़े भाई प्रभात और अन्य परिजनों के अलावा टीपी नगर थाना पुलिस भी पहुंच गई।
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जिसे सहारा दिया, उसी ने किया बेसहारा
प्रभात ने बताया कि पांच दिन पूर्व सचिन को सुनील नाम का युवक जंगल में घूमता मिला था। सुनील ने सचिन से कहा था कि वह बहुत भूखा है। उसके पास कोई काम धंधा और रहने का ठिकाना भी नहीं है। वह गोवा से भटककर यहां आ गया। तरस खाकर सचिन ने उसे घर लाकर न केवल खाना खिलाया, बल्कि उसे डेयरी पर ही नौकर रख लिया था। उसका काम पशुओं की देखभाल और चारा लाने का था। लेकिन परिजनों को अब मलाल हो रहा है कि जिस अनजान शख्स को उन्होंने सहारा दिया, वह एक झटके में उन्हें बेसहारा कर फरार हो गया।
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हत्या के कारणों में उलझन
राजाराम के परिजनों ने नौकर सुनील को ही हत्यारा बताकर नामजद किया है। उसके मौके से फरार होने, जेब से नकदी गायब मिलने और परिस्थितिजनक साक्ष्यों के आधार पर परिजन और पुलिस सुनील को ही कातिल मानकर चल रहे हैं। अगर यह सही है तो सुनील पेशेवर अपराधी की तरह हो सकता हो कि नौकरी की आड़ में वारदात अंजाम देता हो। राजाराम से रुपये मांगने को लेकर विवाद हुआ हो या फिर राजाराम के पास ज्यादा नकदी देखकर उसे लालच आ गया हो।
नहीं कराया वेरीफिकेशन
नौकर ने अपना नाम सुनील और खुद को गोवा का रहने वाला बताया था। बस राजाराम के परिजनों ने उस पर अंधा विश्वास कर उसे नौकर रख लिया। लेकिन उसका अतीत जानने के लिए उसका पुलिस वेरीफिकेशन कराना भी जरूरी नहीं समझा। जबकि एहतियातन यह जरूरी भी है। सीओ ब्रह्मपुरी का कहना है कि यदि लोग घर या दुकान में नौकर रखने से पहले उसका पुलिस वेरिफिकेशन करा लें तो ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता है।