सोशल मीडिया पर भूलकर मत करना ये गलती, वरना चुनाव से पहले हो जाएगी जेल
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जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे राजनीतिक दलों की सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ने लगी है। समर्थन जुटाने से लेकर, समर्थक जुटाने तक की कवायद सोशल मीडिया पर साफ दिखाई दे रही है। जिस तरह का माहौल राजनीतिक दलों की आईटी सेल द्वारा बनाया जा रहा है वह कानून व्यवस्था के लिहाज से अच्छा संकेत नहीं हैं। एक-दूसरे को नीचा दिखाने और बदनाम करने की जो मानसिकता सामने आ रही है वह 2019 के चुनावी समर में कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनेगा।
सोशल मीडिया आज के समय में प्रचार और प्रसार का सशक्त माध्यम बना है। यही वजह रही है कि चुनावों में सोशल मीडिया का राजनीतिक दलों ने जमकर प्रयोग किया, लेकिन अब बदलते दौर में प्रचार का तरीका भी बदलने लगा है। यह सर्वविदित है कि कुछ समय पहले तक राजनीतिक दल फेसबुक, व्हाट्सएप का प्रयोग खुद के प्रचार के लिए किया करते थे, लेकिन अब इसका प्रयोग खुद के प्रचार से कहीं अधिक दूसरे दलों या प्रतिद्वंदी की छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है। प्रचार का यह तरीका क्षेत्रीय स्तर पर भी अपनाया जा रहा है। जो युवाओं में कहीं न कहीं दूरियां बढ़ाने का काम भी कर रहा है। जिस तरह की सामग्री सोशल मीडिया पर परोसी जा रही है उसके बाद कहीं न कहीं सामाजिक ताना-बाना भी इससे प्रभावित हो रहा है। ऐसी स्थिति में चुनावी मौसम में कानून व्यवस्था से जुड़े भयंकर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
सोशल मीडिया की हलचल से पुलिस अंजान
सोशल मीडिया से जहां एक तरफ संचार क्रांति का बढ़ावा मिला है वहीं अराजक तत्वों ने इससे कानून व्यवस्था को बिगाड़ने और सामाजिक सौहार्द में फूट डालने का काम भी किया है। अफवाह फैलाई जाती हैं जिसके चलते बड़ी-बड़ी घटनाएं भी हो जाती हैं। आपत्तिजनक पोस्ट साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है। इसमें जेल भेजने का प्रावधान है, लेकिन पिछले तीन सालों में जनपद में ऐसा कोई भी केस साइबर सेल में दर्ज नहीं हुआ है, जबकि सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली, भ्रम फैलाने वाली, माहौल को खराब करने वाली पोस्ट सोशल साइट पर देखने को मिली हैं। इन सबके बावजूद पुलिस पूरी तरह अंजान है।
सोशल मीडिया पर यह है अपराध
धर्म और जाति को लेकर की जाने वाली टिप्पणी।
भय व्याप्त करने वाले या अफवाह फैलाने वाली पोस्ट डालना।
सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और भ्रामक संदेश फैलाना।
बिना पुष्टि के गलत, भ्रामक संदेश पोस्ट करना।
झूठी पोस्ट के जरिये किसी को अपराध के लिए उकसाना।
चुनाव के समय में किसी दल अथवा व्यक्ति का प्रचार करना।
झूठे संदेश बनाकर उन्हें प्रसारित करना।
अलग से सेल का होगा गठन
सोशल मीडिया की निगरानी जारी है, लेकिन चुनावी समर के लिए जल्द अलग से सेल का गठन होगा। यह सेल फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्वीटर और टिक-टॉक की हर गतिविधि पर नजर रखेगी। सोशल मीडिया का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं होगा। किसी भी एंगल को नजर अंदाज नहीं किया जाएगा। - सतपाल सिंह, एएसपी, क्राइम
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