यूपी: साउथ अफ्रीका में गुप्ता माइनिंग के सीईओ जेपी अरोड़ा की हत्या, इस बैंक से शुरू किया था सफर
ननौता में पैदा हुए जगन्नाथ प्रसाद (जेपी) अरोड़ा ने बैंक की नौकरी से शुरुआत की और साउथ अफ्रीका में गुप्ता बंधु की जेआईसी माइनिंग कंपनी के सीईओ तक बने। जोहान्सबर्ग में जेपी अरोड़ा की हत्या की सूचना पर उनके परिचित और अन्य लोग स्तब्ध हैं। हर किसी का कहना है कि जेपी मृदुभाषी थे और तरक्की पसंद थे।
जेपी अरोड़ा मूलरूप से सहारनपुर के कस्बा ननौता के रहने वाले थे। ननौता के मोहल्ला चहमंजली कोट में पिता चरणदास अरोड़ा के यहां पैदा हुए थे। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई ननौता से हुई। उन्होंने ननौता स्थित किसान सेवक इंटर कॉलेज से 10 वीं कक्षा की पढ़ाई की, जबकि इंटरमीडिएट की पढ़ाई रामपुर मनिहारन स्थित गोचर कृषि इंटर कॉलेज से की। फिर ग्रेजुएट करने के बाद उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक में नौकरी ज्वाइन की और कुछ समय तक रामपुर मनिहारन शाखा में रहे।
बाद में बैंक ऑफ बड़ौदा में नौकरी की और 1992 में सहारनपुर के हकीकत नगर स्थित शाखा के पहले प्रबंधक रहे। यहां वह 1998 तक बतौर शाखा प्रबंधक रहे। इसके बाद उनका तबादला रुड़की और फिर बरेली हो गया था।
इसी बीच वह सहारनपुर के गुप्ता बंधु के संपर्क में आ गए थे और उनकी कंपनी सहारा कम्प्यूटर्स ज्वाइन कर ली थी। तब से वह गुप्ता बंधु की कंपनी से जुड़े रहे और फिर साउथ अफ्रीका चले गए थे। उन्होंने अपना परिवार नोएडा शिफ्ट कर लिया था।
जेपी अरोड़ा और गुप्ता बंधु से जुड़े जावेद साबरी ने बताया कि जेपी अरोड़ा बहुत शालीन व्यक्ति था, उन्होंने कभी किसी का बुरा नहीं किया। जावेद साबरी ने बताया कि अजय गुप्ता ने इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने की मांग जोहान्सबर्ग पुलिस से की है ताकि यह पता चल सके कि जेपी अरोड़ा की हत्या क्यों हुई और किसने की। जावेद साबरी ने बताया कि सहारनपुर में सुशील सडाना से जेपी अरोड़ा की अच्छी दोस्ती थी।
ननौता में जेपी अरोड़ा के मामा सोहनलाल गुम्बर का परिवार रहता है। उनकी मामी सत्यवती और ममेरे भाई नरेश अरोड़ा को जब जेपी अरोड़ा की मौत की खबर मिली, तो वह दुखी हो गए। ममेरे भाई नरेश अरोड़ा ने बताया कि काफी साल से जेपी अरोड़ा ननौता नहीं आए। उन्होंने बताया कि जेपी चार भाइयों में दूसरे नंबर के थे।
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