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पाक जासूस इजाज के मामले में खोखली विवेचना करने पर कठघरे में पुलिस

Tue, 09 Feb 2016 02:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 09 Feb 2016 02:09 AM IST
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ISI agent in Meerut

पाक जासूस मोहम्मद इजाज के मामले में खोखली विवेचना करने पर सदर बाजार पुलिस कठघरे में खड़ी हो गई है। आईटी एक्ट की कार्रवाई और पुलिस रिमांड बढ़ाने की मांग पर कोर्ट ने पुलिस को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने जवाब मांगा कि जिन धाराओं में इजाज के खिलाफ केस दर्ज किया गया, उनके पुख्ता सुबूत पुलिस ने क्यों नहीं जुटाए। पुलिस को तीन दिन में फोरेंसिक रिपोर्ट का विश्लेषण कर केस डायरी में शामिल करने की बात कही है। न्यायालय ने अब अगली तारीख 11 फरवरी लगाई है।

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आईएसआई एजेंट इजाज से मिले इलेक्ट्रिक उपकरणों की फोरेंसिक रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद सदर बाजार पुलिस ने आईटी एक्ट की कार्रवाई करने की परमीशन कोर्ट से मांगी थी। इस पर सोमवार को पाक जासूस इजाज कोर्ट में पेश हुआ। एसीजेएम-1 कोर्ट ने इजाज पर लगाए आरोपों को सुना और फिर सदर बाजार पुलिस ने आरोपों को सिद्ध करने को कहा।
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कोर्ट ने जवाब मांगा कि चार्जशीट लगाने से पहले पुलिस ने इजाज के खिलाफ क्या क्या सुबूत जुटाए हैं। इस पर इंस्पेक्टर सदर बाजार गजेंद्र पाल सिंह और विवेचना धर्मेंद्र कुमार इधर-उधर देखने लगे। आईटी एक्ट का प्रार्थना पत्र खारिज करते हुए कोर्ट ने फोरेंसिक रिपोर्ट के विश्लेषण के बारे में पूछा। इसमें भी पुलिस को जवाब तक नहीं बना। सदर बाजार पुलिस को तीन दिन में इजाज के खिलाफ ठोस सुबूत जुटाकर को कोर्ट में जमा करने की बात कही। इतना ही नहीं, कोर्ट ने पुलिस की विवेचना को खोखली बताकर कोई मजबूत साक्ष्य न देने की बात कही है।
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बहुत लंबी है फोरेंसिक रिपोर्ट
कोर्ट में विवेचक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि फोरेंसिक रिपोर्ट करीब एक हजार पन्नों की है। जिसको पढ़ने और उसका विश्लेषण करने में बहुत लंबा समय लगेगा। विवेचक ने 20 फरवरी तक चार्जशीट जमा करने का समय मांगा तो कोर्ट ने फिर से फटकार लगाई।

क्या था मामला
27 नवंबर 2015 को मेरठ कैंट इलाके से एसटीएफ ने पाक जासूस इजाज को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में इजाज ने मेरठ, बरेली, कोलकाता और दिल्ली की छावनियों की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजना बताया था। उसके पास से एक लैपटॉप, पेन ड्राइव, मोबाइल और आर्मी के नक्शे भी बरामद हुए थे। इलेक्ट्रिक उपकरण को फोरेंसिक लैब दिल्ली भेजा गया था। इसमें इजाज का सारा काला चिट्ठा खुलकर सामने आया। इजाज को वेस्ट यूपी और उत्तराखंड को टारगेट दिया था, जिसकी जानकारी उसने आईएसआई को भेजनी थी।


लचर हाथों में जबरन सौंपी विवेचना
देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक पाक जासूस इजाज की विवेचना लचर हाथों में अफसरों ने जबरन सौंपी थी। विवेचक धर्मेंद्र कुमार ने अपने हाथ खड़े करते हुए दूसरे विभाग से जांच कराने की बात कही थी। जिसके चलते उसने अधिकारियों को पत्र भी लिखा था, बावजूद उसी से विवेचना कराई गई। शायद यही वजह है कि विवेचना खोखली तैयार हो गई। कोर्ट ने विवेचक की कार्यशैली पर सवाल उठाते साफ कहा कि इस प्रकरण में पुलिस ने गंभीरता से जांच पड़ताल नहीं की।

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