{"_id":"638318a4b5be1cc3edba0bce4fca53ec","slug":"dr-shalini-arya-hindi-news-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉ. शालिनी की बिसरा जांच में खेल की साजिश ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
डॉ. शालिनी की बिसरा जांच में खेल की साजिश
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 26 Sep 2015 12:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डॉ. शालिनी आर्य मर्डर केस की बिसरा जांच में सदर बाजार थाना पुलिस खेल करने की साजिश रच रही है। पहले तो पुलिस ने डॉ. शालिनी के बिसरा को संरक्षित करके आगरा एफएसएल भेजा। अब जब डॉ. शालिनी की बिसरा रिपोर्ट आने वाली थी, थाना पुलिस ने ऐन वक्त पर एक नया सैंपल भेज दिया। एफएसएल भेजे गए नए सैंपल ने पुलिस की मंशा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नया सैंपल पहुंचने के कारण फाइनल बिसरा रिपोर्ट आने के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
विज्ञापन
गौरतलब है कि विगत सितंबर की सुबह छह बजे थापर नगर निवासी डॉ. शालिनी आर्य को सुशीला जसवंत राय अस्पताल के डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। जिसके बाद उनका पोस्टमार्टम कर बिसरा सुरक्षित किया गया था। बिसरा जांच के लिए पुलिस ने फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) आगरा भेजा था। एसएसपी डीसी दूबे ने लैब निदेशक से वार्ता कर शीघ्र रिपोर्ट देने का अनुरोध किया था।
विज्ञापन
यहां तक सब कुछ ठीक था। पुलिस अधिकारी लैब के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. अतुल कुमार मित्तल के लगातार संपर्क में थे। इसी के चलते डॉ. शालिनी की बिसरा रिपोर्ट 15 दिन में लगभग पूरा भी हो गई थी, जबकि आम तौर पर बिसरा रिपोर्ट आने में छह महीने से एक साल तक लग जाते हैं।
विज्ञापन
ऐन वक्त पर भेजा नया सैंपल
बृहस्पतिवार को मेरठ पुलिस का एक मैसेंजर एफएसएल आगरा रिपोर्ट लेने पहुंचा। उसने वहां लैब अधिकारियों से बिसरा रिपोर्ट देने को कहा और साथ ही उसने लैब को डॉ. शालिनी का नया सैंपल जांच के लिए दिया। जिसमें बीमार होने के बाद अस्पताल ले जाई गई डॉक्टर शालिनी के पेट से लिया गया पानी (गैस्ट्रिक वाश) था। लैब अधिकारियों ने नए सैंपल को देखकर बिसरा रिपोर्ट देने से इंकार कर दिया। लैब अधिकारियों ने नए सैंपल को ले लिया और बिसरा रिपोर्ट एवं नए सैंपल की जांच के बाद एक ही रिपोर्ट देने की बात की। उधर, सदर बाजार इंस्पेक्टर गजेंद्र पाल सिंह का कहना है कि बिसरा रिपोर्ट और अस्पताल द्वारा रखे गए गैस्ट्रिक वॉश के सैंपल को दो दिन के अंतराल पर भेजा गया था। उन्होंने दो दिन पहले नया सैंपल भेजने की बात से इंकार किया। साथ ही इंस्पेक्टर ने ये भी कहा कि लैब अधिकारी रिपोर्ट न दे पाने के लिए तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं।
मेरठ पुलिस की मंशा पर उठे सवाल
डॉ. शालिनी आर्य को 30 अगस्त की आधी रात करीब ढाई बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती करने के दौरान ही डॉ. शालिनी को उल्टियां हुई थी। उसी दौरान अस्पताल ने पेट से निकला पानी संरक्षित किया था। ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस ने घटना के 15 दिन बाद डॉ. शालिनी के पेट का पानी (गैस्ट्रिक वॉश) जांच के लिए क्यों भेजा। कहीं इसमें मिलावट तो नहीं किया गया और क्या 15 दिन के बाद भी गैस्ट्रिक वॉश में मूल तत्व मौजूद रहे होंगे।
बिसरा भेजने में भी हुई लापरवाही
पुलिस ने डॉ. शालिनी का बिसरा भेजने में भी लापरवाही की। पुलिस ने डॉ. शालिनी का बिसरा जार में भेजा था, जबकि इसे वाइल में भेजा जाना चाहिए था। जार में लीवर, किडनी, आंत के टुकड़े भेजे जाते हैं। जबकि वाइल में सिर्फ दस-दस मिलीग्राम ब्लड, यूरीन और 20 मिलीग्राम गैस्ट्रिक कंटेंट्स भेजे जाते हैं। लीवर, किडनी और आंत से पहले आश्वन विधि द्वारा (सभी अंगों को उबालकर इनका आस्वित (अवशेष) तैयार किया जाता है। इसके बाद परीक्षण होता है। जबकि ब्लड, यूरीन और गैस्ट्रिक कंटेंट्स से सीधे परीक्षण हो सकता है। इसमें समय कम लगता है।
सल्फास या चूहे मारने की दवा
एफएसएल के सूत्रों का कहना है कि बिसरा परीक्षण में यह तो स्पष्ट हो गया है कि डॉक्टर शालिनी की मौत जहर से हुई, लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि विष कौन सा था। पिछले तीन दिन से जिन दो केमिकल की पुष्टि के लिए परीक्षण किया जा रहा है, उनमें से एक सल्फास है और दूसरा चूहे मारने की दवाई में इस्तेमाल किया जाता है। अगर इनमें से कोई नहीं निकला, तो अन्य पॉयजन ग्रुप का परीक्षण होगा।