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जानी के जंगल में कटते मिले दिल्ली से चोरी वाहन
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 06 Jun 2016 02:56 AM IST
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बरामद वाहन के इंजन।
- फोटो : अमर उजाला
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आईजी की जोनल क्राइम ब्रांच ने दिल्ली और एनसीआर से वाहन चोरी कर मेरठ में काटकर बेचने वाले अंतर्राज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। क्राइम ब्रांच ने थाना पुलिस की मदद से जानी के जंगल में एक मकान में दबिश देकर गिरोह के चार सदस्य दबोच लिए। अधकटी इनोवा, डिजायर, मारुति कार समेत कटान के उपकरण भी बरामद किए गए हैं।
आईजी और डीआईजी के निर्देशन में काम कर रही जोनल क्र ाइम ब्रांच को सूचना मिल रही थी कि दिल्ली और एनसीआर के जनपदों से चोरी हो रहे वाहन मेरठ में काटे जा रहे हैं। सोतीगंज इलाके में इनकी बिक्री होती है।
इस सूचना पर क्राइम ब्रांच ने मुखबिरों का जाल बिछाकर इस पर वर्क शुरू किया। सर्विलांस की मदद भी ली गई। पता चला कि जानी कस्बे के जंगल में वाहन चोर गिरोह का अड्डा है जहां चोरी के वाहन लाकर काटे जाते हैं।
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जोनल क्राइम ब्रांच जानी कस्बा पहुंची और जानी पुलिस को साथ लेकर जानी कलां मार्ग पर रजवाहे के नजदीक जंगल में एक मकान पर छापा डाला। टीम प्रभारी राजकुमार शर्मा के अनुसार मकान के अंदर चार युवक एक इनोवा कार को काट रहे थे। पुलिस को देख यह भागने लगे लेकिन उन्हें दबोच लिया गया।
मकान की तलाशी में एक अधकटी मारुति और डिजायर कार बरामद हुई। एक दर्जन से अधिक कटी हुई कारों का सामान भी बरामद हुआ। एक गैस कटर, काटने के औजार, उपकरण समेत एक टाटा एस गाड़ी
और स्कूटी भी मिली। गिरफ्तार आरोपियों ने अपने नाम शोएब निवासी बहरामपुर और मेरठ शहर के पप्पी ,दानिश और मोहम्मद बताए।
दिल्ली, एनसीआर में करते हैं वारदात
पुलिस के अनुसार यह वाहन चोर गिरोह अधिकांश वाहनों को दिल्ली और एनसीआर के जनपदों से ही चोरी करता था। चोरी के बाद उस वाहन को जानी के जंगल में बने इस मकान में लाते थे और उसे काटकर उसके पार्ट्स अलग करके सोतीगंज आदि स्थानों पर बेच देते थे। वाहन काटने में भी ये एक्सपर्ट हैं।
हे भगवान ! हमारे पड़ोस में ये काम
वाहन चोर गिरोह बडे़ शातिर ढंग से यह काम कर रहा था। उन्होंने जंगल में आबादी से हटकर एक मकान करीब डेढ़ महीने पहले तैयार किया गया। इस मकान की चिनाई मिट्टी से की गई थी और चारदीवारी काफी ऊंची बनाई गई थी, ताकि अंदर कोई झांक न सके। ग्रामीणों ने बताया कि मकान में आने-जाने वाले लोग किसी से कोई मतलब नहीं रखते थे।
अंदर जाते ही दरवाजा बंद कर लेते थे। उनका पहनावा भी साधारण था। यही वजह रही कि ग्रामीण भी उन पर शक नही कर सके। क्राइम ब्रांच की दबिश के बाद यहां काफी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। वह भी हैरान थे। कुछ ग्रामीण बोले हे भगवान! हमारे पड़ोस में यह सब चल रहा है और हमें पता भी नहीं।
एक मोबाइल नंबर भी बना मददगार
जानी थाना प्रभारी संजीव कुमार के अनुसार सर्विलांस पर लगे एक मोबाइल नंबर ने भी इस गिरोह तक पहुंचने में मदद की। इसके बाद तीन दिन से क्राइम ब्रांच टीम इस गिरोह के पीछे लगी थी। इनसे पूछताछ के आधार पर चोरी के कुछ और वाहन बरामद करने के प्रयास कर रही है।
आईजी और डीआईजी के निर्देशन में काम कर रही जोनल क्र ाइम ब्रांच को सूचना मिल रही थी कि दिल्ली और एनसीआर के जनपदों से चोरी हो रहे वाहन मेरठ में काटे जा रहे हैं। सोतीगंज इलाके में इनकी बिक्री होती है।
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इस सूचना पर क्राइम ब्रांच ने मुखबिरों का जाल बिछाकर इस पर वर्क शुरू किया। सर्विलांस की मदद भी ली गई। पता चला कि जानी कस्बे के जंगल में वाहन चोर गिरोह का अड्डा है जहां चोरी के वाहन लाकर काटे जाते हैं।
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जोनल क्राइम ब्रांच जानी कस्बा पहुंची और जानी पुलिस को साथ लेकर जानी कलां मार्ग पर रजवाहे के नजदीक जंगल में एक मकान पर छापा डाला। टीम प्रभारी राजकुमार शर्मा के अनुसार मकान के अंदर चार युवक एक इनोवा कार को काट रहे थे। पुलिस को देख यह भागने लगे लेकिन उन्हें दबोच लिया गया।
मकान की तलाशी में एक अधकटी मारुति और डिजायर कार बरामद हुई। एक दर्जन से अधिक कटी हुई कारों का सामान भी बरामद हुआ। एक गैस कटर, काटने के औजार, उपकरण समेत एक टाटा एस गाड़ी
और स्कूटी भी मिली। गिरफ्तार आरोपियों ने अपने नाम शोएब निवासी बहरामपुर और मेरठ शहर के पप्पी ,दानिश और मोहम्मद बताए।
दिल्ली, एनसीआर में करते हैं वारदात
पुलिस के अनुसार यह वाहन चोर गिरोह अधिकांश वाहनों को दिल्ली और एनसीआर के जनपदों से ही चोरी करता था। चोरी के बाद उस वाहन को जानी के जंगल में बने इस मकान में लाते थे और उसे काटकर उसके पार्ट्स अलग करके सोतीगंज आदि स्थानों पर बेच देते थे। वाहन काटने में भी ये एक्सपर्ट हैं।
हे भगवान ! हमारे पड़ोस में ये काम
वाहन चोर गिरोह बडे़ शातिर ढंग से यह काम कर रहा था। उन्होंने जंगल में आबादी से हटकर एक मकान करीब डेढ़ महीने पहले तैयार किया गया। इस मकान की चिनाई मिट्टी से की गई थी और चारदीवारी काफी ऊंची बनाई गई थी, ताकि अंदर कोई झांक न सके। ग्रामीणों ने बताया कि मकान में आने-जाने वाले लोग किसी से कोई मतलब नहीं रखते थे।
अंदर जाते ही दरवाजा बंद कर लेते थे। उनका पहनावा भी साधारण था। यही वजह रही कि ग्रामीण भी उन पर शक नही कर सके। क्राइम ब्रांच की दबिश के बाद यहां काफी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। वह भी हैरान थे। कुछ ग्रामीण बोले हे भगवान! हमारे पड़ोस में यह सब चल रहा है और हमें पता भी नहीं।
एक मोबाइल नंबर भी बना मददगार
जानी थाना प्रभारी संजीव कुमार के अनुसार सर्विलांस पर लगे एक मोबाइल नंबर ने भी इस गिरोह तक पहुंचने में मदद की। इसके बाद तीन दिन से क्राइम ब्रांच टीम इस गिरोह के पीछे लगी थी। इनसे पूछताछ के आधार पर चोरी के कुछ और वाहन बरामद करने के प्रयास कर रही है।