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शहर में हर कदम पर नशे का दम
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Wed, 09 Dec 2015 02:09 AM IST
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शास्त्रीनगर ड्रग्स स्कैंडल का सनसनीखेज खुलासा या फिर आबूलेन में चलता हुआ हुक्का बार हो। शहर के और भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां नशा खुलेआम बिक रहा है। जेब में पैसा हो तो अफीम, चरस और स्मैक के कश आसानी से लग जाएंगे। सार्वजनिक जगहों से लेकर शिक्षा के मंदिरों के आसपास नशे का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
जहां युवाओं को चंद रुपयों में नशे की दलदल में धकेला जा रहा है। मोटी कमाई के लालच में पुलिस-प्रशासन ने भी आंखें फेर रखी हैं। ‘अमर उजाला’ ने मंगलवार को रोहटा रोड स्थित जवाहर नगर सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर पड़ताल की। पहले ग्राहक बनकर खुद चरस खरीदी और फिर देखा कि कैसे स्कूल-कॉलेजों के बच्चों से लेकर अध्यापक तक बिना किसी डर या झिझक के नशीला पदार्थ खरीदकर ले जा रहे हैं।
160 रुपये में खरीदी मौत की पुड़िया
समय दोपहर 12:30 बजे। कंकरखेड़ा थाना स्थित रोहटा रोड जवाहर नगर में मद्रासी बस्ती के पास यह रिपोर्टर एक क्षेत्रीय व्यक्ति की मदद से पहुंचा। वहां करीब 40 साल का एक व्यक्ति घर के बाहर बैठा मिला। पेंट शर्ट पहने इस व्यक्ति को तीन-चार लोग घेरकर खड़े थे। यह व्यक्ति चरस और स्मैक इस तरह खुलेआम बेच रहा था, जैसे प्रसाद बांट रहा हो। चेहरे पर कोई डर नहीं। हमारा नंबर आया तो मुंह से धीरे से चरस निकलते ही उसने 160 रुपये मांगते हुए पन्नी में बंधी चरस की पुड़िया पकड़ा दी। बोला ताजा माल है, मौज लो। हम पुड़िया लेकर वहां से थोड़ा दूर हटकर खड़े हो गए।
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जवाहर नगर नशे की मंडी
लगगभ दिन भर की पड़ताल में करीब 150 लोग अकेले इस व्यक्ति से नशीला पदार्थ खरीदकर ले जा चुके थे। यही नहीं, रोहटा रोड के घनी आबादी वाले क्षेत्र जवाहर नगर में चरस, अफीम और स्मैक के आधा दर्जन माफियाओं के अड्डे बने हैं। ग्राहक अपनी सहूलियत और आवश्यकता के अनुसार सुबह से शाम तक इन स्थानों पर आकर मादक पदार्थ खरीदते है। बस्ती से थोड़ा सा पहले ही एक मंदिर के बाहर गाड़ियों की कतारें सुबह से शाम लगी रहती हैं। क्षेत्रीय लोगों की मानें तो यहां जो भी नशीला पदार्थ चाहिए, मिल जाएगा। पुलिस भी गश्त के लिए आती है लेकिन साठगांठ के चलते इधर-उधर घूमकर चली जाती है।
पॉश आबूलेन पर फोन कॉल से मिलता है ड्रग्स
बेगमपुल और आबूलेन पर फोन कॉल से ड्रग्स माफिया का कारोबार चलता है। ड्रग्स बेचने वाले युवक को ग्राहक फोन पर संपर्क करते हैं और वे आबूलेन पर किसी जगह पर चुपचाप सामान उपलब्ध करा देते हैं। इसमें पूरी सावधानी भी बरती जाती है। पुराने ग्राहक के बारे में जानकारी देेने पर ही ड्रग्स के बारे में बात की जाती है, नहीं तो गलत नंबर कहकर फोन काट दिया जाता है। इस क्षेत्र में छात्रों के साथ-साथ नौकरी पेशा युवाओं की संख्या भी ग्राहक के तौर पर ज्यादा रहती है।
शास्त्रीनगर में शराब माफिया चला रहा तंत्र
तेजगढ़ी से लेकर शास्त्रीनगर एल ब्लॉक तक अवैध शराब बेचने वाले लोग ही ड्रग सप्लायर के तौर पर काम करते हैं। यहां पर दूसरे राज्यों से लाकर अवैध शराब को बेचने का कारोबार खूब हो रहा है। अवैध शराब बेचने वाले ही अपने ग्राहकों या फिर उनके मिलने जुलने वालों को नशीले पदार्थों की सप्लाई करते हैं। कई बार यूनिवर्सिटी के गेट और मेडिकल कॉलेज के आसपास तक सप्लाई पहुंचा दी जाती है।
प्रोफेशनल कॉलेजों के युवा ड्रग्स के आदी
बाईपास स्थित कई कॉलेजों के युवा खुलेआम आकर शहर के विभिन्न स्थित स्थानों से ड्रग्स खरीदते हैं। कई युवाओं के स्थानीय लोगों के साथ झगड़े भी हो चुके हैं। समाज सेवी दुष्यंत रोहटा और प्रमोद गिरी के अनुसार कई गाड़ियां तो यहां नियमित रुप से आती हैं। इनमें कई तो अध्यापक तक होते हैं। इस संबंध में कई बार थाना पुलिस से लेकर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से शिकायत भी की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
विदेशी और कश्मीरी युवा भी लाइन में
कॉलेज के स्थानीय युवाओं के साथ इस स्थान पर कई विदेशी और कश्मीरी छात्र भी ड्रग्स खरीदते हैं। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार कई बार उन्होंने बाइपास पर विदेशी और कश्मीरी छात्रों को भी ड्रग्स खरीदते देखा है।
ये है कीमत
स्मैक पैकेट - 600 रुपये
अफीम - 350 रुपये
चरस - 160 रुपये
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जहां युवाओं को चंद रुपयों में नशे की दलदल में धकेला जा रहा है। मोटी कमाई के लालच में पुलिस-प्रशासन ने भी आंखें फेर रखी हैं। ‘अमर उजाला’ ने मंगलवार को रोहटा रोड स्थित जवाहर नगर सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर पड़ताल की। पहले ग्राहक बनकर खुद चरस खरीदी और फिर देखा कि कैसे स्कूल-कॉलेजों के बच्चों से लेकर अध्यापक तक बिना किसी डर या झिझक के नशीला पदार्थ खरीदकर ले जा रहे हैं।
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160 रुपये में खरीदी मौत की पुड़िया
समय दोपहर 12:30 बजे। कंकरखेड़ा थाना स्थित रोहटा रोड जवाहर नगर में मद्रासी बस्ती के पास यह रिपोर्टर एक क्षेत्रीय व्यक्ति की मदद से पहुंचा। वहां करीब 40 साल का एक व्यक्ति घर के बाहर बैठा मिला। पेंट शर्ट पहने इस व्यक्ति को तीन-चार लोग घेरकर खड़े थे। यह व्यक्ति चरस और स्मैक इस तरह खुलेआम बेच रहा था, जैसे प्रसाद बांट रहा हो। चेहरे पर कोई डर नहीं। हमारा नंबर आया तो मुंह से धीरे से चरस निकलते ही उसने 160 रुपये मांगते हुए पन्नी में बंधी चरस की पुड़िया पकड़ा दी। बोला ताजा माल है, मौज लो। हम पुड़िया लेकर वहां से थोड़ा दूर हटकर खड़े हो गए।
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जवाहर नगर नशे की मंडी
लगगभ दिन भर की पड़ताल में करीब 150 लोग अकेले इस व्यक्ति से नशीला पदार्थ खरीदकर ले जा चुके थे। यही नहीं, रोहटा रोड के घनी आबादी वाले क्षेत्र जवाहर नगर में चरस, अफीम और स्मैक के आधा दर्जन माफियाओं के अड्डे बने हैं। ग्राहक अपनी सहूलियत और आवश्यकता के अनुसार सुबह से शाम तक इन स्थानों पर आकर मादक पदार्थ खरीदते है। बस्ती से थोड़ा सा पहले ही एक मंदिर के बाहर गाड़ियों की कतारें सुबह से शाम लगी रहती हैं। क्षेत्रीय लोगों की मानें तो यहां जो भी नशीला पदार्थ चाहिए, मिल जाएगा। पुलिस भी गश्त के लिए आती है लेकिन साठगांठ के चलते इधर-उधर घूमकर चली जाती है।
पॉश आबूलेन पर फोन कॉल से मिलता है ड्रग्स
बेगमपुल और आबूलेन पर फोन कॉल से ड्रग्स माफिया का कारोबार चलता है। ड्रग्स बेचने वाले युवक को ग्राहक फोन पर संपर्क करते हैं और वे आबूलेन पर किसी जगह पर चुपचाप सामान उपलब्ध करा देते हैं। इसमें पूरी सावधानी भी बरती जाती है। पुराने ग्राहक के बारे में जानकारी देेने पर ही ड्रग्स के बारे में बात की जाती है, नहीं तो गलत नंबर कहकर फोन काट दिया जाता है। इस क्षेत्र में छात्रों के साथ-साथ नौकरी पेशा युवाओं की संख्या भी ग्राहक के तौर पर ज्यादा रहती है।
शास्त्रीनगर में शराब माफिया चला रहा तंत्र
तेजगढ़ी से लेकर शास्त्रीनगर एल ब्लॉक तक अवैध शराब बेचने वाले लोग ही ड्रग सप्लायर के तौर पर काम करते हैं। यहां पर दूसरे राज्यों से लाकर अवैध शराब को बेचने का कारोबार खूब हो रहा है। अवैध शराब बेचने वाले ही अपने ग्राहकों या फिर उनके मिलने जुलने वालों को नशीले पदार्थों की सप्लाई करते हैं। कई बार यूनिवर्सिटी के गेट और मेडिकल कॉलेज के आसपास तक सप्लाई पहुंचा दी जाती है।
प्रोफेशनल कॉलेजों के युवा ड्रग्स के आदी
बाईपास स्थित कई कॉलेजों के युवा खुलेआम आकर शहर के विभिन्न स्थित स्थानों से ड्रग्स खरीदते हैं। कई युवाओं के स्थानीय लोगों के साथ झगड़े भी हो चुके हैं। समाज सेवी दुष्यंत रोहटा और प्रमोद गिरी के अनुसार कई गाड़ियां तो यहां नियमित रुप से आती हैं। इनमें कई तो अध्यापक तक होते हैं। इस संबंध में कई बार थाना पुलिस से लेकर पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से शिकायत भी की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
विदेशी और कश्मीरी युवा भी लाइन में
कॉलेज के स्थानीय युवाओं के साथ इस स्थान पर कई विदेशी और कश्मीरी छात्र भी ड्रग्स खरीदते हैं। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार कई बार उन्होंने बाइपास पर विदेशी और कश्मीरी छात्रों को भी ड्रग्स खरीदते देखा है।
ये है कीमत
स्मैक पैकेट - 600 रुपये
अफीम - 350 रुपये
चरस - 160 रुपये