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साधुनगर में बच्ची की मौत पर हंगामा, जाम

Sun, 20 Mar 2016 02:23 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/ अमर उजाला, मेरठ Updated Sun, 20 Mar 2016 02:23 AM IST
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Baby's body found in plot
इसी प्लाट में पड़ी मिली बच्ची की लाश। - फोटो : अमर उजाला
साधुनगर में संदिग्ध परिस्थितियों में मासूम बच्ची का शव खाली प्लॉट में भरे पानी में पड़ा मिला। परिजनों ने तांत्रिक क्रिया में हत्या करने का आरोप लगाते हुए जाम लगा दिया और हंगामा किया। मौके पर पहुंची तीन थानों की पुलिस, पीएसी और आरएएफ ने समझा-बुझाकर लोगों को शांत किया। 
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साधुनगर निवासी दलित दीपक कुमार ठेले पर सब्जी बेचने का काम करता है। दीपक की ढाई वर्षीय बच्ची दृष्टि शुक्रवार सुबह घर के पास से ही खेलते समय लापता हो गई थी। परिजनों ने दृष्टि की तलाश की, लेकिन वह नहीं मिली। देर रात थाने में बच्ची के अपहरण की तहरीर दी। लेकिन पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की।
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मोहल्ले में ही एक खाली पड़े प्लॉट में पानी भरा हुआ है। शनिवार शाम करीब चार बजे लोगों ने प्लॉट में भरे पानी में से एक हाथ निकला देखा। लोगों ने हाथ पकड़कर शव को खींचकर निकाला, तो वह दृष्टि का निकला। सूचना पर परिजन भी रोते-बिलखते मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने आकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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परिजनों ने कहा कि बच्ची की मौत तांत्रिक क्रिया में हुई है। हत्या के बाद शव को पानी में फेंका गया है। परिजनों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर हंगामा कर दिया और शाम करीब साढ़े चार बजे डिस्टलरी रोड पर जाम लगा दिया।

सूचना पर कंकरखेड़ा, दौराला, पल्लवपुरम थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। महिलाओं समेत भारी भीड़ को देखते हुए पीएसी और आरएएफ को भी बुलवाया गया। जाम लगा रहे लोगों से पुलिस की तीखी नोकझोंक हुई। लोगों ने कहा कि पुलिस समय रहते तलाश करती, तो बच्ची की जान न जाती। पुलिस ने किसी तरह समझाकर लोगों को शांत किया और साढ़े पांच बजे जाम खुलवाया। 

इसलिए हत्या का शक
परिजनों का कहना है कि शुक्रवार रात बच्ची को मोहल्लों वालों के साथ मिलकर तलाशा था। प्लॉट में भरे पानी में घुसकर भी तलाश की, लेकिन तब बच्ची वहां नहीं मिली। इससे जाहिर है कि दृष्टि को मारकर यहां बाद में फेंका गया। दूसरे यदि डूबने से मौत होती, तो उसका पेट फूल चुका होता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तीसरी बात ये कि अगर वह डूबती तो शोर मचाती। और आबादी के बीच किसी ने भी ऐसा कोई शोर नहीं सुना। 

मां का रो-रोकर बुरा हाल
दीपक के दो बच्चे वंश (4) और छह माह की सिया और हैं। दृष्टि की मां आरती का रो-रोकर बुरा हाल था। रोते हुए आरती कह रही थी कि ‘कोई मेरी बच्ची को लौटा दे’। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इस कारण वंश का स्कूल में दाखिला भी नहीं कराया है। 

पानी की निकासी का प्रबंध नहीं, रास्ते बदहाल
साधुनगर में कई प्लॉटों में पानी भरा है। ऐसे में लोगों को डर सता रहा है कि कोई और बच्चा यहां डूब ना जाए। वहीं यदि दृष्टि को तांत्रिक क्रिया के चलते मारकर फेंका है, तो लोगों को अपने बच्चों की सुरक्षा का डर सता रहा है। ऐसे में यहां से पानी निकाला जाना जरूरी है। लेकिन पूरे साधुनगर में अभी तक न तो रास्तों का निर्माण हुआ और न ही पानी की निकासी के लिए नाले बनाए गए।


लोगों ने कहा कि दर्जनों बार स्थानीय भाजपा सभासद भजनलाल सोनकर और नगर निगम अधिकारियों से मांग की, लेकिन किसी ने भी उनकी नहीं सुनी। दलितों की बस्ती में कोई भी विकास कार्य नहीं कराया गया है। लोग नारकीय जीवन जी रहे हैं। वहीं बसपा कैंट प्रत्याशी सतेंद्र सोलंकी, कश्यप कल्याण निषाद महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. विजय कुमार कश्यप मौके पर पहुंचे और परिजनों को आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन देकर चले गए।
------ वर्जन
बच्ची की हत्या हुई है या पानी में डूबने से मौत हुई है, इस बारे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। पुलिस जांच कर रही है। 
- यादराम सिंह यादव, एसओ कंकरखेड़ा
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