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मैं जेल तोड़कर भाग गया हूं, मनीषा टेंशन मत लेना
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Tue, 29 Aug 2017 09:40 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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संदीप की फरारी के बाद जेल प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। बंदी को गुपचुप तरीके से फोन करने की भी सुविधा बंदी रक्षक कराते थे। इसकी पोल संदीप के फरार होने के बाद उसकी पत्नी मनीषा ने ही खोल दी।
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जेल से भागने के बाद संदीप ने अपनी पत्नी को सुबह 11:30 बजे फोन किया। पत्नी पांच दिन पूर्व जेल में मुलाकात करके आई थी। संदीप बोला कि मैं जेल तोड़कर भाग आया हूं, तू टेंशन मत लेना। इसे सुनकर मनीषा बोली कि मजाक मत करो। मुझे पता कि तुम जेल के कृषि फार्म में होंगे व बंदी रक्षक के फोन से बात कर रहे हो। जिस पर संदीप बोला कि ऐसा नहीं है, मै फिलहाल भावनपुर गांव में हूं और अब वहां से दूर भाग जाऊंगा। बच्चों का ध्यान रखना। इतना कहकर फोन कट गया। मनीषा को यकीन नहीं था कि वाकई संदीप जेल से भाग गया। क्योंकि फार्म में जाने के बाद संदीप अक्सर उससे फोन पर बात करता था। दोपहर एक बजे भावनपुर पुलिस संदीप के घर पहुंची, तब मनीषा को यकीन हुआ कि संदीप जेल से भाग गया है। मनीषा ने फोन आने की बात भी पुलिस को बताई।
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जेल के फार्म से फोन करते हैं बंदी
पुलिस के मुताबिक मनीषा ने पूछताछ में बताया कि वह पांच दिन पहले संदीप से जेल में मुलाकात कर आई थी। संदीप ने उसे बताया था कि अधिकांश बंदी जेल के कृषि फार्म पर काम करने जाते हैं तो अपने घर पर फोन पर बात करते है। बात कराने के बदले में उनसे पैसा लिया जाता है। जेल में अंदर क्या-क्या होता है, यह बात भी संदीप मनीषा को बताता था।
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भागा क्यों, यह जानती नहीं
संदीप के परिजनों का कहना है कि उसकी जल्द ही जमानत होने वाली थी। पता नहीं जेल से क्यों भाग गया। जेल से भागने की बात उसने पहले परिजनों को भी नहीं बताई थी। परिजनों ने अंदेशा जताया कि संदीप लोकल में छिपा होगा। क्योंकि जेल से भागने के बाद उसने भावनपुर से कॉल की थी।
यही बचपन बीता, भागना आसान था
जिला जेल का कृषि फार्म अब्दुल्लापुर गांव में आता है। संदीप भी मूल रूप से अब्दुलापुर गांव का है। पुलिस उसकी तलाश में गांव में पहुंची तो ग्रामीण बोले कि संदीप का बचपन इसी जंगल में बीता है। उसका यहां से भागना तो आसान था। ग्रामीणों ने जेल प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि संदीप को जेल फार्म में काम कराने को किसने कहा था। एक बार सोच तो लेते कि जो बचपन से इस जंगल और हर रास्ते की जानकारी रखता हो, उसे भागने में कितना समय लगेगा। यह सुनकर पुलिस अफसर भी हैरान रह गए।
जेल प्रशासन की लापरवाही
संदीप की फरारी में उसके परिजनों ने भी जेल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। कहा कि अगर ऐसे जेल से बंदी भाग जाएगा तो मुल्जिमों पर शिकंजा कैसे कसा जाएगा। मामला लखनऊ तक पहुंच गया हैं। जेल के उच्चाधिकारियों ने भी इस पर विभागीय जांच बैठा दी है।