{"_id":"5aa6e2714f1c1bc1758b5240","slug":"191520886385-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को ठहराया पति की मौत का जिम्मेदार","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को ठहराया पति की मौत का जिम्मेदार
Updated Tue, 13 Mar 2018 02:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कंकरखेड़ा/मुजफ्फरनगर। शिवलोक पुरी निवासी एक महिला ने एआरटीओ प्रशासन को पति की मौत का जिम्मेदार ठहराया है। आरोप है कि अधिकारी ने उसके पति का उत्पीड़न किया, जिस कारण उनकी हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई। महिला ने तहरीर दी है।
शिवलोक पुरी निवासी चंचल सिंह सोमवार को दलित संगठनों के दर्जनों लोगों के कंकरखेड़ा थाने पहुंची। महिला ने बताया कि उसके पति दीपेंद्र कुमार एआरटीओ मुजफ्फरनगर में कनिष्ठ सहायक के पद पर तैनात थे। रविवार देर रात हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। महिला का आरोप है कि एआरटीओ प्रशासन पिछले एक वर्ष से उसके पति का उत्पीड़न कर रहे थे। एक साल से न तो वेतन मिला, न ही उनकी उपस्थिति ऑफिस के रजिस्टर में दर्ज कराई गई। इस कारण उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। विरोध करने पर वह जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर पति को धमकाते थे। इस कारण वह तनाव में आ गए और उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई।
महिला ने बताया कि इससे पहले भी उन्होंने एससी/एसटी आयोग में शिकायत की थी। जिसमें आयोग ने पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। इंस्पेक्टर दीपक शर्मा ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस दौरान बसपा नेता किशन जाटव, कुक्कू सोनकर, अनिल पिंडी, पूर्व पार्षद भगवान सिंह, अनिल पिंडी, भरत सिंह, सोनू, संजीव कुमार आदि ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी की।
विज्ञापन
बिना बताए रहे थे छुट्टी पर
बताते हैं कि कार्यालय में तैनाती के दौरान बाबू का रिकॉर्ड बेहतर नहीं रहा है। विभाग में पहले वह पंजीयन पटल देखते थे, लेकिन शिकायतों के बाद उनसे यह विभाग ले लिया गया था। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2017 में बाबू बिना बताए लगातार कई माह तक छुट्टी पर रहे थे। इसको लेकर एआरटीओ ने स्पष्टीकरण मांगा, तो दीपेंद्र ने मेडिकल सर्टिफिकेट दिए थे। हालांकि यह मेडिकल किस बीमारी को लेकर दिए गए हैं, विभाग इसकी जांच करा रहा है। हाल ही में दस जनवरी को आला अधिकारियों के निर्देश पर दीपेंद्र सिंह को कार्यालय में ज्वाइनिंग दी गई। एआटीओ प्रशासन राजीव कुमार बंसल का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। वेतन उनके स्तर से नहीं रोका गया है। आला अधिकारियों ने उनके मेडिकल की जांच करने को कहा है। हालांकि फरवरी माह का वेतन उनके खाते में ट्रांसफर किया गया है। पूर्व में अवकाश पर रहे समय का वेतन देना उनके हाथ में नहीं है।
शिवलोक पुरी निवासी चंचल सिंह सोमवार को दलित संगठनों के दर्जनों लोगों के कंकरखेड़ा थाने पहुंची। महिला ने बताया कि उसके पति दीपेंद्र कुमार एआरटीओ मुजफ्फरनगर में कनिष्ठ सहायक के पद पर तैनात थे। रविवार देर रात हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। महिला का आरोप है कि एआरटीओ प्रशासन पिछले एक वर्ष से उसके पति का उत्पीड़न कर रहे थे। एक साल से न तो वेतन मिला, न ही उनकी उपस्थिति ऑफिस के रजिस्टर में दर्ज कराई गई। इस कारण उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। विरोध करने पर वह जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर पति को धमकाते थे। इस कारण वह तनाव में आ गए और उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई।
विज्ञापन
महिला ने बताया कि इससे पहले भी उन्होंने एससी/एसटी आयोग में शिकायत की थी। जिसमें आयोग ने पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। इंस्पेक्टर दीपक शर्मा ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस दौरान बसपा नेता किशन जाटव, कुक्कू सोनकर, अनिल पिंडी, पूर्व पार्षद भगवान सिंह, अनिल पिंडी, भरत सिंह, सोनू, संजीव कुमार आदि ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी की।
विज्ञापन
बिना बताए रहे थे छुट्टी पर
बताते हैं कि कार्यालय में तैनाती के दौरान बाबू का रिकॉर्ड बेहतर नहीं रहा है। विभाग में पहले वह पंजीयन पटल देखते थे, लेकिन शिकायतों के बाद उनसे यह विभाग ले लिया गया था। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2017 में बाबू बिना बताए लगातार कई माह तक छुट्टी पर रहे थे। इसको लेकर एआरटीओ ने स्पष्टीकरण मांगा, तो दीपेंद्र ने मेडिकल सर्टिफिकेट दिए थे। हालांकि यह मेडिकल किस बीमारी को लेकर दिए गए हैं, विभाग इसकी जांच करा रहा है। हाल ही में दस जनवरी को आला अधिकारियों के निर्देश पर दीपेंद्र सिंह को कार्यालय में ज्वाइनिंग दी गई। एआटीओ प्रशासन राजीव कुमार बंसल का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। वेतन उनके स्तर से नहीं रोका गया है। आला अधिकारियों ने उनके मेडिकल की जांच करने को कहा है। हालांकि फरवरी माह का वेतन उनके खाते में ट्रांसफर किया गया है। पूर्व में अवकाश पर रहे समय का वेतन देना उनके हाथ में नहीं है।