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मेनका मामले में बिना पैमाइश के रिपोर्ट हो रही तैया
Updated Sun, 22 Jul 2018 02:44 AM IST
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मेरठ। मेनका मामला ही नहीं खसरा नंबर 542 का पूरा खेल पुरानी रिपोर्टों के आधार पर आइने की तरह साफ हो चुका है। बावजूद इसके प्रशासनिक कार्रवाई तो दूर अभी तक रिपोर्ट तक तैयार न होना किसी बड़े खेल की तरफ इशारा कर रहा है।
हाल यह है कि लेखपालों की हड़ताल समाप्त हुए चार दिन हो चुके हैं। लेकिन अब तक खसरा नंबर 542 जो कि नजूल की जमीन है, उसकी पैमाइश तक नहीं करायी गयी है। जिससे अब शक की सुई पूरी तरह प्रशासन की तरफ उठना शुरू हो गयी है। दरअसल मेनका सिनेमा को बंद हुए 11 साल हो चुके हैं। लेकिन पिछले दिनों जब इसे तोड़ना शुरू किया गया तो इसके पीछे का खेल खुलना शुरू हुआ। जिसमें सामने आया कि मेनका सिनेमा खसरा नंबर 542 का हिस्सा है और खसरा नंबर 542 राजस्व रिकार्ड में सरकारी जमीन के रूप में दर्ज है। इसके बाद इस पूरे प्रकरण में एक एक कर तमाम परतें खुलना शुरू हुई तो नगर निगम, तहसील और जिला प्रशासन स्तर पर हुए खेल और उदासीनता की तमाम परतें उखड़ना शुरू हो गयी।
पुरानी जांच रिपोर्ट बता रही हैं पूरा खेल
मेनका सिनेमा प्रकरण अभी नया है। लेकिन खसरा नंबर 542 में हुए खेल को पुरानी जांच रिपोर्ट स्पष्ट कर रही हैं। इस खसरा नंबर पर साल 2011 में तत्कालीन नगर आयुक्त की रिपोर्ट में भूमाफियाओं के नाम खोलते हुए स्पष्ट कहा गया कि वो इस सरकारी जमीन पर कब्जा कर खुर्द बुर्द कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद तहसील दिवस पर आयी शिकायत में इसी मामले में अधिशासी अभियंता नलकूप खंड पूर्व द्वारा 22 अप्रैल 2013 को एक रिपोर्ट जिलाधिकारी को दी गयी, जिसमें बताया गया कि संबंधित जमीन पर नगर निगम के नलकूप पंप हाउस को छोड़कर बाकी सारी जमीन पर भू माफियाओं ने कब्जा कर लिया है।
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वहीं, एक अन्य जांच रिपोर्ट जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, उसमें 4 मार्च 2014 को तहसीलदार न्यायिक जेपी मिश्र ने अपनी जांच रिपोर्ट में खसरा नंबर 542 जिसका क्षेत्रफल 12940 वर्ग मीटर है, इस पर अवैध कब्जा है। यह जांच रिपोर्ट होटल अलकरीम मामले में दी गयी थी, जिसमें अवैध कब्जे को लेकर दायर वाद में स्वतंत्र अधिवक्ता भी नियुक्त करने की मांग तहसीलदार न्यायिक ने की थी।
ये हो रहा है खेल
मेनका सिनेमा जो कि इसी खसरा नंबर में आ रहा है, उसे लेकर बड़ा खेल हो रहा है। तहसील सूत्रों की मानें तो मेनका पहले इस खसरा नंबर का हिस्सा नहीं था। लेकिन अब यह इस खसरा नंबर में कैसे आया? इसका जवाब अभी तक तहसील प्रशासन नहीं ढूंढ पाया है। हालांकि तहसील प्रशासन के इस तर्क में इसलिए दम नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि यदि तहसील प्रशासन वास्तव में इस मामले में पारदर्शिता और ईमानदारी से काम करना चाहता है तो उसे अब तक सजरा मौके पर रखते हुए इसकी पैमाइश कराते हुए रिपोर्ट तैयार कर देनी चाहिए थी। लेकिन रिपोर्ट तैयार करने में लगातार हो रही देरी के पीछे कहीं न कहीं आरोपियाें को बचाव का रास्ता ढूंढने के लिए समय दिए जाने की तरफ संकेत कर रहा है।
सिर्फ मेनका पर ही नजर क्यों
इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा सवाल ये भी उठ रहा है कि खसरा नंबर 542 जो कि सरकारी जमीन तय हो चुकी है। उसकी पूरी जांच क्यों नहीं हो रही है। क्योंकि इस जमीन के पूरे हिस्से पर अवैध कब्जा है। लेकिन प्रशासन इस तरफ कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। सिर्फ मेनका मामले की जांच जारी होने की बात कहते हुए जिला प्रशासन पल्ला झाड़ रहा है। जो सभी को हैरान कर रहा है, क्योंकि मेनका सिनेमा में खेल करने वालों ने ही इस जमीन के अधिकांश हिस्से पर कब्जा किया हुआ है। जिनके नाम भी लगातार पूर्व की जांच रिपोर्ट में उजागर होते रहे हैं।
पुलिस ने सामान क्यों नहीं लिया कब्जे में
मेनका सिनेमा के भीतर की कुर्सी व अन्य सामान मकबरा डिग्गी स्थित एक बंद अहाते में पड़ा है। इसकी जानकारी पुलिस प्रशासन को भी हो चुकी है। लेकिन अभी तक इस मामले में भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
खास बातें:
पूरे मामले पर अब प्रशासन की तरफ उठ रही अंगुली
तहसील सूत्रों के अनुसार अब मेनका को खसरा नंबर 542 से बाहर करने की तैयारी
बिना पैमाइश के कैसे मेनका किया जा सकता है सरकारी जमीन से बाहर, उठा सवाल
पूरे मामले में किसी बड़े दबाव के बीच खेल की हो रही है तैयारी
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हाल यह है कि लेखपालों की हड़ताल समाप्त हुए चार दिन हो चुके हैं। लेकिन अब तक खसरा नंबर 542 जो कि नजूल की जमीन है, उसकी पैमाइश तक नहीं करायी गयी है। जिससे अब शक की सुई पूरी तरह प्रशासन की तरफ उठना शुरू हो गयी है। दरअसल मेनका सिनेमा को बंद हुए 11 साल हो चुके हैं। लेकिन पिछले दिनों जब इसे तोड़ना शुरू किया गया तो इसके पीछे का खेल खुलना शुरू हुआ। जिसमें सामने आया कि मेनका सिनेमा खसरा नंबर 542 का हिस्सा है और खसरा नंबर 542 राजस्व रिकार्ड में सरकारी जमीन के रूप में दर्ज है। इसके बाद इस पूरे प्रकरण में एक एक कर तमाम परतें खुलना शुरू हुई तो नगर निगम, तहसील और जिला प्रशासन स्तर पर हुए खेल और उदासीनता की तमाम परतें उखड़ना शुरू हो गयी।
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पुरानी जांच रिपोर्ट बता रही हैं पूरा खेल
मेनका सिनेमा प्रकरण अभी नया है। लेकिन खसरा नंबर 542 में हुए खेल को पुरानी जांच रिपोर्ट स्पष्ट कर रही हैं। इस खसरा नंबर पर साल 2011 में तत्कालीन नगर आयुक्त की रिपोर्ट में भूमाफियाओं के नाम खोलते हुए स्पष्ट कहा गया कि वो इस सरकारी जमीन पर कब्जा कर खुर्द बुर्द कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद तहसील दिवस पर आयी शिकायत में इसी मामले में अधिशासी अभियंता नलकूप खंड पूर्व द्वारा 22 अप्रैल 2013 को एक रिपोर्ट जिलाधिकारी को दी गयी, जिसमें बताया गया कि संबंधित जमीन पर नगर निगम के नलकूप पंप हाउस को छोड़कर बाकी सारी जमीन पर भू माफियाओं ने कब्जा कर लिया है।
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वहीं, एक अन्य जांच रिपोर्ट जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, उसमें 4 मार्च 2014 को तहसीलदार न्यायिक जेपी मिश्र ने अपनी जांच रिपोर्ट में खसरा नंबर 542 जिसका क्षेत्रफल 12940 वर्ग मीटर है, इस पर अवैध कब्जा है। यह जांच रिपोर्ट होटल अलकरीम मामले में दी गयी थी, जिसमें अवैध कब्जे को लेकर दायर वाद में स्वतंत्र अधिवक्ता भी नियुक्त करने की मांग तहसीलदार न्यायिक ने की थी।
ये हो रहा है खेल
मेनका सिनेमा जो कि इसी खसरा नंबर में आ रहा है, उसे लेकर बड़ा खेल हो रहा है। तहसील सूत्रों की मानें तो मेनका पहले इस खसरा नंबर का हिस्सा नहीं था। लेकिन अब यह इस खसरा नंबर में कैसे आया? इसका जवाब अभी तक तहसील प्रशासन नहीं ढूंढ पाया है। हालांकि तहसील प्रशासन के इस तर्क में इसलिए दम नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि यदि तहसील प्रशासन वास्तव में इस मामले में पारदर्शिता और ईमानदारी से काम करना चाहता है तो उसे अब तक सजरा मौके पर रखते हुए इसकी पैमाइश कराते हुए रिपोर्ट तैयार कर देनी चाहिए थी। लेकिन रिपोर्ट तैयार करने में लगातार हो रही देरी के पीछे कहीं न कहीं आरोपियाें को बचाव का रास्ता ढूंढने के लिए समय दिए जाने की तरफ संकेत कर रहा है।
सिर्फ मेनका पर ही नजर क्यों
इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा सवाल ये भी उठ रहा है कि खसरा नंबर 542 जो कि सरकारी जमीन तय हो चुकी है। उसकी पूरी जांच क्यों नहीं हो रही है। क्योंकि इस जमीन के पूरे हिस्से पर अवैध कब्जा है। लेकिन प्रशासन इस तरफ कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। सिर्फ मेनका मामले की जांच जारी होने की बात कहते हुए जिला प्रशासन पल्ला झाड़ रहा है। जो सभी को हैरान कर रहा है, क्योंकि मेनका सिनेमा में खेल करने वालों ने ही इस जमीन के अधिकांश हिस्से पर कब्जा किया हुआ है। जिनके नाम भी लगातार पूर्व की जांच रिपोर्ट में उजागर होते रहे हैं।
पुलिस ने सामान क्यों नहीं लिया कब्जे में
मेनका सिनेमा के भीतर की कुर्सी व अन्य सामान मकबरा डिग्गी स्थित एक बंद अहाते में पड़ा है। इसकी जानकारी पुलिस प्रशासन को भी हो चुकी है। लेकिन अभी तक इस मामले में भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
खास बातें:
पूरे मामले पर अब प्रशासन की तरफ उठ रही अंगुली
तहसील सूत्रों के अनुसार अब मेनका को खसरा नंबर 542 से बाहर करने की तैयारी
बिना पैमाइश के कैसे मेनका किया जा सकता है सरकारी जमीन से बाहर, उठा सवाल
पूरे मामले में किसी बड़े दबाव के बीच खेल की हो रही है तैयारी