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करोडो रुपये का ओला कंपनी से लगा चुके चूना
Updated Sat, 05 Aug 2017 02:48 AM IST
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डाक्टर का अपहरण कर ओला कंपनी से फिरौती मांगने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
ओला कंपनी में सेंधमारी करने में दोनों भाई माहिर थे। तीन साल में तीन करोड़ से अधिक रुपये का कंपनी को चूना लगा चुके हैं। कंपनी को दोनों भाइयों के कारनामे पता चल गए थे। उसके बाद दोनों भाइयों ने कंपनी से ही पांच करोड़ रुपये लेने के लिए डॉक्टर का अपहरण किया। इस प्लानिंग में कंपनी के दो और कर्मचारी साथ थे।
सीओ एसटीएफ बृजेश सिंह का कहना है कि दोनों आरोपी अनुज और सुशील के पिता सत्यवीर उर्फ सत्ते ने अपने गांव दादरी में 2013 में जमीन बेची थी। दोनों बेटों को एक-एक कार दिला दी। सुशील बहुत शातिर था। उसका एक दोस्त ओला कंपनी में पहले से था। उसने सुशील की कार कंपनी में लगवा दी। एक दिन में 25-30 बुकिंग आने पर कंपनी ड्राइवर को 10 हजार रुपये रोजाना बोनस देती थी। सुशील ने इसका फायदा उठाया। रिश्तेदार, परिचितों से अलग-अलग नंबरों से बुकिंग के लिए फोन कराकर सुशील कंपनी से बोनस लेने लगा। उसने अनुज की गाड़ी भी लगवाई। दोनों भाई इसी तरह पैसा कमाते रहे। पोल खुली तो उन्होंने कंपनी के वेबसाइट का सॉफ्टवेयर हैक कर लिया। इंटरनेट पर ओला कंपनी की गाड़ी मैप पर एक साल तक चलाई। जहां से कंपनी अनुज के अकाउंट में पैसा भेजती रही। उसकी भी पोल खुली तो अपहरण का प्लान बनाया।
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
ओला कंपनी में सेंधमारी करने में दोनों भाई माहिर थे। तीन साल में तीन करोड़ से अधिक रुपये का कंपनी को चूना लगा चुके हैं। कंपनी को दोनों भाइयों के कारनामे पता चल गए थे। उसके बाद दोनों भाइयों ने कंपनी से ही पांच करोड़ रुपये लेने के लिए डॉक्टर का अपहरण किया। इस प्लानिंग में कंपनी के दो और कर्मचारी साथ थे।
सीओ एसटीएफ बृजेश सिंह का कहना है कि दोनों आरोपी अनुज और सुशील के पिता सत्यवीर उर्फ सत्ते ने अपने गांव दादरी में 2013 में जमीन बेची थी। दोनों बेटों को एक-एक कार दिला दी। सुशील बहुत शातिर था। उसका एक दोस्त ओला कंपनी में पहले से था। उसने सुशील की कार कंपनी में लगवा दी। एक दिन में 25-30 बुकिंग आने पर कंपनी ड्राइवर को 10 हजार रुपये रोजाना बोनस देती थी। सुशील ने इसका फायदा उठाया। रिश्तेदार, परिचितों से अलग-अलग नंबरों से बुकिंग के लिए फोन कराकर सुशील कंपनी से बोनस लेने लगा। उसने अनुज की गाड़ी भी लगवाई। दोनों भाई इसी तरह पैसा कमाते रहे। पोल खुली तो उन्होंने कंपनी के वेबसाइट का सॉफ्टवेयर हैक कर लिया। इंटरनेट पर ओला कंपनी की गाड़ी मैप पर एक साल तक चलाई। जहां से कंपनी अनुज के अकाउंट में पैसा भेजती रही। उसकी भी पोल खुली तो अपहरण का प्लान बनाया।
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