{"_id":"5b58ea074f1c1bc6508b6eda","slug":"153255373013-city-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"न विवेचक न गवाह आठ साल से लटका मुकदमा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
न विवेचक न गवाह आठ साल से लटका मुकदमा
Updated Thu, 26 Jul 2018 02:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ। नौ साल पहले दर्ज हुए गैर इरादतन हत्या के मुकदमे की सुनवाई सरकारी गवाही पूरी नहीं होने से आठ साल से विचाराधीन है। न्यायालय द्वारा बार-बार आदेश दिए जाने के बावजूद भी खुद इस मुकदमे का विवेचक ही अपनी गवाही कराने तक न्यायालय में नही आ रहा है। पुलिस की लापरवाही के चलते पीड़ित पक्ष इंसाफ मिलने का इंतजार कर रहा है।
लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र अंतर्गत लक्खीपुरा गली नंबर 18 के रहने वाले हारून पुत्र सईद ने एक जनवरी 2009 को थाना लिसाड़ी गेट में रिपोर्ट दर्ज करायी थी। जिसमें आरोप लगाते हुए बताया था कि जाहिद उर्फ जद्दो ने अपने दोस्त मोहम्मद जावेद के साथ घटना के दिन शराब पी, जिसके चलते उसकी मौत हो गयी। पुलिस ने इस मुकदमे की विवेचना करते हुए 27 जनवरी 2009 को मोहम्मद जावेद के खिलाफ गैर इरादतन हत्या कीर धारा 304 आईपीसी के तहत न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में विवेचक ने मुकदमे के वादी हारून, मृतक जाहिद की पत्नी सितारा सहित कुल 13 गवाहों के नाम शामिल किए।
सही समय पर शुरू हुई कोर्ट की कार्यवाही
न्यायालय में 31 जुलाई 2009 को गवाही शुरू हुई। उसके बाद मुकदमे के एक गवाह के बयान 25 मार्च 2010 को न्यायालय में दर्ज हुए। न्यायालय में मुकदमे की कार्यवाही सही समय पर शुरू हुई। लेकिन पुलिस की लापरवाही की वजह से पत्रावली सरकारी गवाहों के बयानों में अटक गई। यहां तक कि इस मुकदमे का खुद विवेचक ही अपने बयान दर्ज कराने के लिए न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
कोर्ट ने बार-बार दिए आदेश
न्यायालय द्वारा बार-बार गवाहों को पेश किए जाने के आदेश दिए जा रहे हैं। लेकिन पुलिस बेहद लापरवाही बरते हुए गवाहों को न्यायालय में उपस्थित नहीं करा रही है। जिसके चलते मामला पिछले आठ साल से सरकारी गवाहों की गवाही में ही लटका हुआ है। मृतक के घरवाले न्याय का इंतजार कर रहे हैं।
खास बातें:
ट्रायल पर
01 जनवरी 2009 को लिसाड़ी गेट थाने में दर्ज हुआ था गैर इरादतन हत्या का मुकदमा
31 जुलाई 2009 को न्यायालय में शुरू हुई गवाही
25 मार्च 2010 के बाद से पत्रावली सरकारी गवाहों के बयान में अटकी
- दोस्त के साथ शराब पीने के दौरान हुई थी एक युवक की मौत, चार्जशीट हुई थी दाखिल
विज्ञापन
लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र अंतर्गत लक्खीपुरा गली नंबर 18 के रहने वाले हारून पुत्र सईद ने एक जनवरी 2009 को थाना लिसाड़ी गेट में रिपोर्ट दर्ज करायी थी। जिसमें आरोप लगाते हुए बताया था कि जाहिद उर्फ जद्दो ने अपने दोस्त मोहम्मद जावेद के साथ घटना के दिन शराब पी, जिसके चलते उसकी मौत हो गयी। पुलिस ने इस मुकदमे की विवेचना करते हुए 27 जनवरी 2009 को मोहम्मद जावेद के खिलाफ गैर इरादतन हत्या कीर धारा 304 आईपीसी के तहत न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में विवेचक ने मुकदमे के वादी हारून, मृतक जाहिद की पत्नी सितारा सहित कुल 13 गवाहों के नाम शामिल किए।
विज्ञापन
सही समय पर शुरू हुई कोर्ट की कार्यवाही
न्यायालय में 31 जुलाई 2009 को गवाही शुरू हुई। उसके बाद मुकदमे के एक गवाह के बयान 25 मार्च 2010 को न्यायालय में दर्ज हुए। न्यायालय में मुकदमे की कार्यवाही सही समय पर शुरू हुई। लेकिन पुलिस की लापरवाही की वजह से पत्रावली सरकारी गवाहों के बयानों में अटक गई। यहां तक कि इस मुकदमे का खुद विवेचक ही अपने बयान दर्ज कराने के लिए न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
कोर्ट ने बार-बार दिए आदेश
न्यायालय द्वारा बार-बार गवाहों को पेश किए जाने के आदेश दिए जा रहे हैं। लेकिन पुलिस बेहद लापरवाही बरते हुए गवाहों को न्यायालय में उपस्थित नहीं करा रही है। जिसके चलते मामला पिछले आठ साल से सरकारी गवाहों की गवाही में ही लटका हुआ है। मृतक के घरवाले न्याय का इंतजार कर रहे हैं।
खास बातें:
ट्रायल पर
01 जनवरी 2009 को लिसाड़ी गेट थाने में दर्ज हुआ था गैर इरादतन हत्या का मुकदमा
31 जुलाई 2009 को न्यायालय में शुरू हुई गवाही
25 मार्च 2010 के बाद से पत्रावली सरकारी गवाहों के बयान में अटकी
- दोस्त के साथ शराब पीने के दौरान हुई थी एक युवक की मौत, चार्जशीट हुई थी दाखिल