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कृषि विवि के हास्टल से गायब होकर छात्रा ने प्रेमी संग रचा ली शादी
Updated Fri, 08 Jun 2018 02:12 AM IST
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मोदीपुरम (मेरठ)। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में कठुआ कांड के आरोपी का मामला अभी निपटा नहीं कि कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि में भी ऐसा ही प्रकरण सामने आ गया है। यहां भी लापरवाही की हद इतनी रही कि यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहने वाली छात्रा के रजिस्टर में हस्ताक्षर होेते रहे और वह लव मैरिज करने के बाद कानपुर में प्रेमी के साथ रहती रही। विवि प्रशासन सोता रहा। बृहस्पतिवार को पिता हॉस्टल पहुंचा तो छात्रा भी पहुंच गई। जहां दोनों के बीच तीखी तकरार हो गई। पिता ने विवि प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, कुलपति ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
कानपुर निवासी एक छात्रा कृषि विवि में बीएससी एग्रीकल्चर की प्रथम वर्ष की छात्रा है। जो विवि के सरोजनी भवन में रह रही थी। बताया गया कि छात्रा का कानपुर निवासी एक युवक से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। यह युवक छात्रा को ट्यूशन पढ़ाता था। आठ फरवरी 2018 को छात्रा हॉस्टल से गायब हो गई और 9 फरवरी को आर्य समाज मंदिर में प्रेमी के साथ शादी कर ली। वहीं, 12 फरवरी को प्रेमी युगल कोर्ट मैरिज कर कानपुर में रहने लगा। जबकि हॉस्टल में 16 फरवरी तक छात्रा की उपस्थिति रजिस्टर में लगातार लगती रही। उधर, छात्रा के परिजनों को इसका पता चला तो उन्होंने विरोध किया। लेकिन छात्रा के बालिग होने के कारण उनका विरोध काम न आ सका
बृहस्पतिवार को छात्रा का पिता विवि में उसका सामान लेने पहुंचा। लेकिन छात्रा पहले ही अपने वकील के साथ हॉस्टल पहुंच गई। पिता और बेटी के बीच सामान को लेकर तीखी तकरार हो गई। छात्रा के पिता ने विवि प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विवि के हॉस्टल से छात्रा गायब हो गई और उसकी उपस्थिति रजिस्टर में अंकित हो रही है। यह विवि प्रशासन की मिलीभगत है। विवि के अधिकारियों ने जवाबदेही से बचते हुए पिता-पुत्री को उनके प्रयोग का सामान देकर शांत कर दिया।
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कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न
यह पूरा प्रकरण विवि प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है। वार्डन का कहना है कि छात्रा का गेट पास उनके पास है। लेकिन छात्रा के पिता ने जिस तरह आरोप लगाए हैं, उससे साफ है कि विवि प्रशासन की कहानी में झोल है। सवाल यह है कि यदि छात्रा की उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज है तो साइन कौन करता रहा।
ऐसे तो बदनाम हो जाएंगी यहां की यूनिवर्सिटी
कठुआ कांड में जम्मू एसआईटी ने सीसीएसयू के कॉलेज में बीएससी एजी करने वाले विशाल जंगोत्रा को आरोपी बनाया था। विशाल ने दावा किया था कि वो घटना के वक्त खतौली में पेपर दे रहा था। उसके उपस्थिति पत्र में हस्ताक्षर मिले थे। पेपर भी दिए गए थे। एकतरफ जहां यूनिवर्सिटी ये दावा कर रही थी कि विशाल ने ही पेपर दिए हैं वहीं, उसके द्वारा दिए गए पेपरों की कॉपियों में मिले हस्ताक्षर को फोरेंसिक लैब फर्जी बता चुकी है। यानी कि विशाल की जगह यहां कोई ओर पेपर में बैठता रहा और यूनिवर्सिटी को भनक नहीं लगी। ऐसा ही मामला अब कृषि विवि में सामने आया है। छात्रा हॉस्टल से गायब रही और रजिस्टर में उसके हस्ताक्षर होते रहे। अगर इसी तरह से फर्जीवाड़ा होता रहा तो यहां की यूनिवर्सिटी बदनाम हो जाएंगी। हैरानी की बात ये है कि जहां इतने बड़े गड़बड़झाले हो रहे हैं, वहीं यूनिवर्सिटी के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
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कानपुर निवासी एक छात्रा कृषि विवि में बीएससी एग्रीकल्चर की प्रथम वर्ष की छात्रा है। जो विवि के सरोजनी भवन में रह रही थी। बताया गया कि छात्रा का कानपुर निवासी एक युवक से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। यह युवक छात्रा को ट्यूशन पढ़ाता था। आठ फरवरी 2018 को छात्रा हॉस्टल से गायब हो गई और 9 फरवरी को आर्य समाज मंदिर में प्रेमी के साथ शादी कर ली। वहीं, 12 फरवरी को प्रेमी युगल कोर्ट मैरिज कर कानपुर में रहने लगा। जबकि हॉस्टल में 16 फरवरी तक छात्रा की उपस्थिति रजिस्टर में लगातार लगती रही। उधर, छात्रा के परिजनों को इसका पता चला तो उन्होंने विरोध किया। लेकिन छात्रा के बालिग होने के कारण उनका विरोध काम न आ सका
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बृहस्पतिवार को छात्रा का पिता विवि में उसका सामान लेने पहुंचा। लेकिन छात्रा पहले ही अपने वकील के साथ हॉस्टल पहुंच गई। पिता और बेटी के बीच सामान को लेकर तीखी तकरार हो गई। छात्रा के पिता ने विवि प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विवि के हॉस्टल से छात्रा गायब हो गई और उसकी उपस्थिति रजिस्टर में अंकित हो रही है। यह विवि प्रशासन की मिलीभगत है। विवि के अधिकारियों ने जवाबदेही से बचते हुए पिता-पुत्री को उनके प्रयोग का सामान देकर शांत कर दिया।
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कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न
यह पूरा प्रकरण विवि प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है। वार्डन का कहना है कि छात्रा का गेट पास उनके पास है। लेकिन छात्रा के पिता ने जिस तरह आरोप लगाए हैं, उससे साफ है कि विवि प्रशासन की कहानी में झोल है। सवाल यह है कि यदि छात्रा की उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज है तो साइन कौन करता रहा।
ऐसे तो बदनाम हो जाएंगी यहां की यूनिवर्सिटी
कठुआ कांड में जम्मू एसआईटी ने सीसीएसयू के कॉलेज में बीएससी एजी करने वाले विशाल जंगोत्रा को आरोपी बनाया था। विशाल ने दावा किया था कि वो घटना के वक्त खतौली में पेपर दे रहा था। उसके उपस्थिति पत्र में हस्ताक्षर मिले थे। पेपर भी दिए गए थे। एकतरफ जहां यूनिवर्सिटी ये दावा कर रही थी कि विशाल ने ही पेपर दिए हैं वहीं, उसके द्वारा दिए गए पेपरों की कॉपियों में मिले हस्ताक्षर को फोरेंसिक लैब फर्जी बता चुकी है। यानी कि विशाल की जगह यहां कोई ओर पेपर में बैठता रहा और यूनिवर्सिटी को भनक नहीं लगी। ऐसा ही मामला अब कृषि विवि में सामने आया है। छात्रा हॉस्टल से गायब रही और रजिस्टर में उसके हस्ताक्षर होते रहे। अगर इसी तरह से फर्जीवाड़ा होता रहा तो यहां की यूनिवर्सिटी बदनाम हो जाएंगी। हैरानी की बात ये है कि जहां इतने बड़े गड़बड़झाले हो रहे हैं, वहीं यूनिवर्सिटी के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।