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रिश्वत मांगने के आरोप में फंसी इंदिरापुरम थाना पुलिस
Updated Sun, 27 Aug 2017 01:28 AM IST
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मेरठ। रिश्वत मांगने के एक मामले में न्यायालय ने थाना इंदिरापुरम गाजियाबाद में तैनात दो दरोगाओं समेत छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। आरोप है कि पुलिस ने इस प्रकरण में दस लाख रुपये की रिश्वत मांगी और न मिलने पर कार्रवाई कर दी।
हरियाणा के संघौली गांव के रहने वाले जगतार पुत्र श्यामलाल ने थाना इंदिरापुरम पुलिस के खिलाफ न्यायालय स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मेरठ के न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। उसने बताया कि उसका अपना ट्रक है, जिसे वह खुद ही चलाता है। 29 जून 2016 को वह चंडीगढ़ की एक डिस्टलरी से ट्रक में शराब लोड कर अरुणाचल प्रदेश ले जा रहा था। एक जुलाई 2016 को वह गाजियाबाद के थाना इंदिरापुरम क्षेत्र में पहुंचा ही था कि यहां एसआई राजीव कुमार आदि ने उसे रोक लिया। उससे कहा कि वह अवैध शराब लेकर जा रहा है। उसने इंकार किया और दस्तावेज दिखाए। लेकिन पुलिसकर्मी नहीं माने।
जगतार का आरोप है कि उससे पांच लाख रुपये की मांग की गई। उसने डिस्टलरी अधिकारियों को फोन किया तो वहां से भी अधिकारी अन्य दस्तावेज लेकर आ गए। लेकिन पुलिसकर्मियाें ने एक नहीं सुनी और डिमांड पांच से बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दी। जब रिश्वत देने से इंकार कर दिया गया तो पुलिस ने उसके खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कर चालान कर दिया। जगतार ने थाना इंदिरापुरम के एसआई राजीव कुमार, एसआई अंजनी सिंह, सिपाही बच्चू सिंह, दीपक कुमार, शिशुपाल सिंह व सुशील के खिलाफ यह शिकायत की। कहा कि उसने पुलिस अधिकारियों को भी अवगत कराया, मगर किसी ने नहीं सुनी। ऐसे में उसे अदालत की शरण में आना पड़ा।
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उसकी तरफ से यह याचिका न्यायालय स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मौ. शरीफ के न्यायालय में जगतार के अधिवक्ता राजीव शर्मा द्वारा दाखिल की गयी। सुनवाई के बाद अदालत ने थाना इंदिरापुरम को आदेशित किया है कि वह इस मामले में इन सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करें।
खास बात
- शराब से भरा ट्रक छोड़ने की एवज में छह पुलिसकर्मियों ने मांगी 10 लाख रुपये रिश्वत
- न्यायालय स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मेरठ ने दिए मुकदमा दर्ज करने के आदेश
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हरियाणा के संघौली गांव के रहने वाले जगतार पुत्र श्यामलाल ने थाना इंदिरापुरम पुलिस के खिलाफ न्यायालय स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मेरठ के न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया था। उसने बताया कि उसका अपना ट्रक है, जिसे वह खुद ही चलाता है। 29 जून 2016 को वह चंडीगढ़ की एक डिस्टलरी से ट्रक में शराब लोड कर अरुणाचल प्रदेश ले जा रहा था। एक जुलाई 2016 को वह गाजियाबाद के थाना इंदिरापुरम क्षेत्र में पहुंचा ही था कि यहां एसआई राजीव कुमार आदि ने उसे रोक लिया। उससे कहा कि वह अवैध शराब लेकर जा रहा है। उसने इंकार किया और दस्तावेज दिखाए। लेकिन पुलिसकर्मी नहीं माने।
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जगतार का आरोप है कि उससे पांच लाख रुपये की मांग की गई। उसने डिस्टलरी अधिकारियों को फोन किया तो वहां से भी अधिकारी अन्य दस्तावेज लेकर आ गए। लेकिन पुलिसकर्मियाें ने एक नहीं सुनी और डिमांड पांच से बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दी। जब रिश्वत देने से इंकार कर दिया गया तो पुलिस ने उसके खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कर चालान कर दिया। जगतार ने थाना इंदिरापुरम के एसआई राजीव कुमार, एसआई अंजनी सिंह, सिपाही बच्चू सिंह, दीपक कुमार, शिशुपाल सिंह व सुशील के खिलाफ यह शिकायत की। कहा कि उसने पुलिस अधिकारियों को भी अवगत कराया, मगर किसी ने नहीं सुनी। ऐसे में उसे अदालत की शरण में आना पड़ा।
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उसकी तरफ से यह याचिका न्यायालय स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मौ. शरीफ के न्यायालय में जगतार के अधिवक्ता राजीव शर्मा द्वारा दाखिल की गयी। सुनवाई के बाद अदालत ने थाना इंदिरापुरम को आदेशित किया है कि वह इस मामले में इन सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करें।
खास बात
- शराब से भरा ट्रक छोड़ने की एवज में छह पुलिसकर्मियों ने मांगी 10 लाख रुपये रिश्वत
- न्यायालय स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मेरठ ने दिए मुकदमा दर्ज करने के आदेश