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कमिश्नर बोले, पुलिस कम पड़े तो मेरा स्टाफ ले जाना
Updated Sat, 12 Aug 2017 03:04 AM IST
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- पुलिस कस्टडी में लेकर जाओ, तहरीर भिजवाता हूं थाने
- यह सुनते ही एमडीए अधिकारियों के उड़ गए होश
- मीटिंग के लिए आए थो, सोचा न था कि जाना होगा थाने
मेरठ। सुबह 9:55 बजे कमिश्नर ऑफिस के लैंडलाइन नंबर से इंस्पेक्टर सिविल लाइन धीरज शुक्ला के सीयूजी नंबर पर कॉल आई कि पुलिस लेकर कमिश्नरी में आओ। कोई हंगामा करने पहुंचा होगा कि यह सोचकर इंस्पेक्टर चार सिपाही लेकर कमिश्नरी पहुंच गए। कमिश्नर बोले कि यह एमडीए के कर्मचारी हैं इनको कस्टडी में ले लो। थाने पहुंचो तहरीर भिजवा रहा हूं। चार सिपाही देखे तो कमिश्नर ने इंस्पेक्टर से कहा कि अगर पुलिस कम हो तो मेरा स्टाफ भी ले जाओ। यह सुनते ही एमडीए अधिकारियों केे होश उड़ गए। उन्होंने यह सोचा भी न था कि ऐसा होगा। बुलाए तो मीटिंग के लिए थे पर भेज दिया थाने।
कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने शुक्रवार सुबह सुबह भ्रष्टाचार में लिप्त एमडीए के एक्सईएन, एई तथा जेई को अपने ऑफिस में बुलाने से पहले पुलिस को फोन किया। इन तीनों को भी फाइल पर बात करने के लिए बुलाया गया था। पत्रावली पर बात करने के बाद कमिश्नर ने पुलिस बुला ली। तीनों को कस्टडी में लेते ही इंस्पेक्टर ने सीओ सिविल लाइन, एसपी सिटी और फिर एसएसपी को फोन कर जानकारी दी। इसके बाद कमिश्नरी से सिविल लाइन थाने तक पुलिस फोर्स लगाने के अफसरों ने निर्देश दे दिए। थाने में एमडीए के तीनों कर्मचारियों के परिजन पहुंच गए।
सर गलती हो गई
कमिश्नर ने तीनों कर्मचारियों को कस्टडी में लेने की बात इंस्पेक्टर से कही तो कर्मचारी घबराने लगे। क्योंकि उनको मीटिंग की बात कहकर बुलाया गया था। उन्होंने बार बार कहा कि सॉरी सर। लेकिन कमिश्नर ने कहा कि गलती की है तो सजा भुगतो।
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दिनभर थाने में जमावड़ा, हंगामा नहीं
पकड़े गए तीनों कर्मचारी के पक्ष में सैकड़ों लोग सिविल लाइन थाने पहुंचे। कर्मचारियों की गिरफ्तारी होने पर थाने में लोगों का तांता लगा रहा। दिनभर थाने पर पुलिस फोर्स लगी रही। थाना पुलिस को निर्देश था कि कोई हंगामा करे तो उसको भी गिरफ्तार करें। इसकी जानकारी एमडीए के कर्मचारियों को भी थी। जिसके चलते कोई हंगामा नहीं हुआ।
थानाध्यक्ष के ऑफिस में बैठाए कर्मचारी
तीनों कर्मचारियों को पुलिस ने थानाध्यक्ष के ऑफिस में बैठाए रखा। इनकी निगरानी में दरोगा श्रीनिवास थे। कर्मचारियों से मिलते व उनको आश्वासन देकर लौट जाते कि उच्चाधिकारी से बातचीत चल रही है। घबराने की जरूरत नहीं हैं। सब छूट जायेेंगे, कोई जेल नहीं जाएगा।
रात थाने में कटेगी, सुबह होंगे कोर्ट में पेश
भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों की रात मुल्जिमों की तरह थाने में कटेगी। सुबह उनको कोर्ट में पेश किया जाएगा। मुकदमा चार बजेे तक हो चुका था। उनको पेश किया जा सकता था, लेकिन अधिकारी भी मेसेज देना चाहते हैं कि सरकारी कर्मचारियों के साथ ऐसा बर्ताव होगा जैसा कि अपराधियों के साथ होता है। कमिश्नर ने साफ कहा कि तसल्ली से कोर्ट में पेश करो। लिखा-पढ़ी में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
एक कर्मचारी हार्ट का मरीज
इंस्पेक्टर सिविल लाइन ने बताया कि एक कर्मचारी एके सिंह हार्ट के मरीज हैं। जिनकी तबियत खराब होने का अंदेशा है। इसको देखते उनको ऑफिस में बैैठाया था। तीनों कर्मचारी आरोपी है, उनको शनिवार कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पदाधिकारी भी पहुंचे
डिप्लोमा संघ के प्रांतीय पदाधिकारी कुमदेश शर्मा आदि भी इस प्रकरण को लेकर कमिश्नर के पास पहुंचे और सहानुभूति पूर्वक विचार करने को कहा। कमिश्नर ने कहा कि क्या हो सकता है? अब तो पुलिस ही विवेचना करेगी।
जेई से से लेकर वीसी तक हैं शामिल
कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस मामले में जेई से लेकर वीसी तक शामिल हैं। सभी पर मुकदमा हो। ऐसे में इस फाइल से जुड़े मुख्य दो अधिकारी रह गए। इस काम के बिल पर साइन करने वाले कार्यवाहक एसई दिनेश चंद तोमर तथा एफसी वसी मोहम्मद पर भी कमिश्नर ने मुकदमा दर्ज करने की बात कही थी। उन्होंने बताया कि जिनके नाम छूट गए हैं उनके नाम विवेचना में सामने आ जाएंगे।
वीसी ने की स्क्रीनिंग
वीसी सीताराम यादव ने पहले इस संबंध में बैठक ली और फिर 50 साल से ज्यादा उम्र के अक्षम कर्मचारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट देने की स्क्रीनिंग की। कहा कि काम न करने वाले कर्मचारियों को रिटायर किया जाएगा।
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- यह सुनते ही एमडीए अधिकारियों के उड़ गए होश
- मीटिंग के लिए आए थो, सोचा न था कि जाना होगा थाने
मेरठ। सुबह 9:55 बजे कमिश्नर ऑफिस के लैंडलाइन नंबर से इंस्पेक्टर सिविल लाइन धीरज शुक्ला के सीयूजी नंबर पर कॉल आई कि पुलिस लेकर कमिश्नरी में आओ। कोई हंगामा करने पहुंचा होगा कि यह सोचकर इंस्पेक्टर चार सिपाही लेकर कमिश्नरी पहुंच गए। कमिश्नर बोले कि यह एमडीए के कर्मचारी हैं इनको कस्टडी में ले लो। थाने पहुंचो तहरीर भिजवा रहा हूं। चार सिपाही देखे तो कमिश्नर ने इंस्पेक्टर से कहा कि अगर पुलिस कम हो तो मेरा स्टाफ भी ले जाओ। यह सुनते ही एमडीए अधिकारियों केे होश उड़ गए। उन्होंने यह सोचा भी न था कि ऐसा होगा। बुलाए तो मीटिंग के लिए थे पर भेज दिया थाने।
कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने शुक्रवार सुबह सुबह भ्रष्टाचार में लिप्त एमडीए के एक्सईएन, एई तथा जेई को अपने ऑफिस में बुलाने से पहले पुलिस को फोन किया। इन तीनों को भी फाइल पर बात करने के लिए बुलाया गया था। पत्रावली पर बात करने के बाद कमिश्नर ने पुलिस बुला ली। तीनों को कस्टडी में लेते ही इंस्पेक्टर ने सीओ सिविल लाइन, एसपी सिटी और फिर एसएसपी को फोन कर जानकारी दी। इसके बाद कमिश्नरी से सिविल लाइन थाने तक पुलिस फोर्स लगाने के अफसरों ने निर्देश दे दिए। थाने में एमडीए के तीनों कर्मचारियों के परिजन पहुंच गए।
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सर गलती हो गई
कमिश्नर ने तीनों कर्मचारियों को कस्टडी में लेने की बात इंस्पेक्टर से कही तो कर्मचारी घबराने लगे। क्योंकि उनको मीटिंग की बात कहकर बुलाया गया था। उन्होंने बार बार कहा कि सॉरी सर। लेकिन कमिश्नर ने कहा कि गलती की है तो सजा भुगतो।
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दिनभर थाने में जमावड़ा, हंगामा नहीं
पकड़े गए तीनों कर्मचारी के पक्ष में सैकड़ों लोग सिविल लाइन थाने पहुंचे। कर्मचारियों की गिरफ्तारी होने पर थाने में लोगों का तांता लगा रहा। दिनभर थाने पर पुलिस फोर्स लगी रही। थाना पुलिस को निर्देश था कि कोई हंगामा करे तो उसको भी गिरफ्तार करें। इसकी जानकारी एमडीए के कर्मचारियों को भी थी। जिसके चलते कोई हंगामा नहीं हुआ।
थानाध्यक्ष के ऑफिस में बैठाए कर्मचारी
तीनों कर्मचारियों को पुलिस ने थानाध्यक्ष के ऑफिस में बैठाए रखा। इनकी निगरानी में दरोगा श्रीनिवास थे। कर्मचारियों से मिलते व उनको आश्वासन देकर लौट जाते कि उच्चाधिकारी से बातचीत चल रही है। घबराने की जरूरत नहीं हैं। सब छूट जायेेंगे, कोई जेल नहीं जाएगा।
रात थाने में कटेगी, सुबह होंगे कोर्ट में पेश
भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों की रात मुल्जिमों की तरह थाने में कटेगी। सुबह उनको कोर्ट में पेश किया जाएगा। मुकदमा चार बजेे तक हो चुका था। उनको पेश किया जा सकता था, लेकिन अधिकारी भी मेसेज देना चाहते हैं कि सरकारी कर्मचारियों के साथ ऐसा बर्ताव होगा जैसा कि अपराधियों के साथ होता है। कमिश्नर ने साफ कहा कि तसल्ली से कोर्ट में पेश करो। लिखा-पढ़ी में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
एक कर्मचारी हार्ट का मरीज
इंस्पेक्टर सिविल लाइन ने बताया कि एक कर्मचारी एके सिंह हार्ट के मरीज हैं। जिनकी तबियत खराब होने का अंदेशा है। इसको देखते उनको ऑफिस में बैैठाया था। तीनों कर्मचारी आरोपी है, उनको शनिवार कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पदाधिकारी भी पहुंचे
डिप्लोमा संघ के प्रांतीय पदाधिकारी कुमदेश शर्मा आदि भी इस प्रकरण को लेकर कमिश्नर के पास पहुंचे और सहानुभूति पूर्वक विचार करने को कहा। कमिश्नर ने कहा कि क्या हो सकता है? अब तो पुलिस ही विवेचना करेगी।
जेई से से लेकर वीसी तक हैं शामिल
कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस मामले में जेई से लेकर वीसी तक शामिल हैं। सभी पर मुकदमा हो। ऐसे में इस फाइल से जुड़े मुख्य दो अधिकारी रह गए। इस काम के बिल पर साइन करने वाले कार्यवाहक एसई दिनेश चंद तोमर तथा एफसी वसी मोहम्मद पर भी कमिश्नर ने मुकदमा दर्ज करने की बात कही थी। उन्होंने बताया कि जिनके नाम छूट गए हैं उनके नाम विवेचना में सामने आ जाएंगे।
वीसी ने की स्क्रीनिंग
वीसी सीताराम यादव ने पहले इस संबंध में बैठक ली और फिर 50 साल से ज्यादा उम्र के अक्षम कर्मचारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट देने की स्क्रीनिंग की। कहा कि काम न करने वाले कर्मचारियों को रिटायर किया जाएगा।