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आठ साल रहा मेरठ-मुजफ्फरनगर में हसीन का खौफ

Mon, 01 Jan 2018 02:45 AM IST
Updated Mon, 01 Jan 2018 02:45 AM IST
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आठ साल रहा मेरठ-मुजफ्फरनगर में हसीन का खौफ
मेरठ। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए 50 हजारी हसीन मोटा का मेरठ और मुजफ्फरनगर में करीब आठ साल खौफ रहा। धमकाना, वसूली करना, लूट और डकैती उसका पेशा बन गया था।
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पुलिस के अनुसार हसीन मोटा ने सन 2009 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। पुलिस रिकार्ड के अनुसार उसके खिलाफ लूट का पहला मामला मेडिकल थाने में दर्ज हुआ। लोगों को धमकाने, वसूली करने के भी आरोप लगे। सदर बाजार, नौचंदी, रोहटा और मवाना थाना क्षेत्रों में उसने साल 2010-11 में एक के बाद लूट की कई वारदात कीं। इसी साल मुजफ्फरनगर के शाहपुर और पुरकाजी में उसके खिलाफ डकैती के मामले दर्ज हुए थे। साल 2013-14 वो कुछ शांत रहा।
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उस पर दर्ज कुल 25 मुकदमों में 19 मेरठ और 6 मुकदमे मुजफ्फरनगर में दर्ज हैं। वो मुकीम गैंग का सक्रिय सदस्य था। उसने गैंग के साथ मिलकर कई वारदातें की। 2016 में जब पुलिस मुकीम गैंग के पीछे पड़ी तो उसने अपना ठिकाना मेरठ की बजाय मुजफ्फरनगर में बना लिया था। पुलिस के मुताबिक मुकीम गैंग से जुड़ने के बाद दूसरे जिलों में वारदात के बाद वो गैंग के गुर्गों को मेरठ में ठहराने में भी सहयोग करता था।
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नया गैंग खड़ा करने की कोशिश में था
मुकीम गैंग के कमजोर पड़ने के बाद हसीन मेरठ और मुजफ्फरनगर के बदमाशों से संपर्क बढ़ाकर अपना गैंग खड़ा करना चाहता था। लेकिन योगी सरकार आते ही बदमाशों का सफाया शुरू हो गया। इनाम घोषित होते ही एसटीएफ और क्राइम ब्रांच उसके पीछे लग गई थी।
कुछ और हैं रडार पर
इस मुठभेड़ के बाद कुछ और ईनामी क्राइम ब्रांच के रडार पर हैं। लिसाड़ी गेट, सरुरपुर, रोहटा क्षेत्र के कुछ बदमाशों को ट्रेस किया जा रहा है। क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई से एसटीएफ पर भी दबाव बढ़ा है।

सुपुर्द-ए-खाक हुआ शव
रविवार दोपहर बाद पोस्टमार्टम के बाद हसीन मोटा के शव को पुलिस ने परिजनों के सुपुर्द किया। शव के साथ पुलिस बल भी उसके घर तक पहुंचा। देहली गेट और लिसाड़ी गेट थानों की पुलिस भी तैनात रही। शाम करीब छह बजे उसके शव को हापुड़ रोड स्थित चूने वाला कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
खास बातें:
2009 में जरायम की दुनिया में उतरा था हसीन मोटा
मेरठ और मुजफ्फरनगर में डकैती, लूट और वसूली बना था पेशा
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