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दहशत फैलाकर लूटा था सोना, आसानी से कराई गिरफ्तारी
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- नाम उजागर होते ही नेता के संरक्षण में पहुंचा भगत सिंह
- 24 घंटे में तीन लोगों की गिरफ्तारी और माल बरामद
मेरठ। शहर के बीचोबीच बेगमपुल पर दहशत फैलाकर बदमाशों ने मणप्पुरम गोल्ड लोन कंपनी से दस किलो सोना लूटा। 24 घंटे में तीन बदमाशों की आसानी से गिरफ्तारी और महज चार किलो सोना बरामद होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। इसको लेकर अलग-अलग चर्चाएं भी है। छुटभैया बदमाशों से मुठभेड़ करने वाली पुलिस को कुख्यात पर रहमोकरम करना ‘कठघरे’ में खड़ा कर रहा है।
जेवरात में ट्रैकर निकला तो बदमाशों को समझने में ज्यादा देरी नहीं लगी कि पुलिस उनके बारे मेें जान चुकी है। भगत के घर पर पहुंचकर पुलिस ने उसके भाई, मां समेत पांच लोगों को उठा लिया। हल्ला भी मचा था कि भगत का एनकाउंटर होगा। इतना सुनते ही एक नेता ने भगत को अपने पास बुला लिया। उसको भी नेताजी के पास जाने के अलावा दूसरी जगह जाना खतरा से खाली लगा। प्रदेश की सबसे बड़ी लूट होने को देखते पुलिस, एसटीएफ और क्राइम ब्रांच आरोपियों को ढूंढने में लगी थी। पुलिस बदमाशों के करीबियों से भगत की जानकारी जुटा रही थी। तभी नेताजी का फोन पुलिस के पास पहुंचा कि भगत हमारे पास है, ले जाओ। सोना भी बरामद हो जाएगा। पुलिस भगत को पकड़कर ले आई। तभी सुशील को सुपुर्दगी में देने के लिए पुलिस के पास दूसरा फोन आ गया। पुलिस ने सुशील की गिरफ्तारी भी 24 घंटे से पहले कर ली। सोना बिकवाने वाले दीपक को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
कैसे बैठेगा बदमाशों में खौफ
घटना उजागर होते ही लुटा हुआ आधा अधूरा सामान लेकर बदमाश आसानी से पुलिस के पास पहुंच जाएंगे तो पुलिस का खौफ बदमाशों में कैसे होगा। नाम नहीं खुलता तो शायद पुलिस को वह नहीं मिल पाते। मुठभेड़ करके बदमाशों की गिरफ्तारी करने वाली मेरठ पुलिस की कार्यशैली को लेकर लोगों में अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं।
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- नाम उजागर होते ही नेता के संरक्षण में पहुंचा भगत सिंह
- 24 घंटे में तीन लोगों की गिरफ्तारी और माल बरामद
मेरठ। शहर के बीचोबीच बेगमपुल पर दहशत फैलाकर बदमाशों ने मणप्पुरम गोल्ड लोन कंपनी से दस किलो सोना लूटा। 24 घंटे में तीन बदमाशों की आसानी से गिरफ्तारी और महज चार किलो सोना बरामद होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। इसको लेकर अलग-अलग चर्चाएं भी है। छुटभैया बदमाशों से मुठभेड़ करने वाली पुलिस को कुख्यात पर रहमोकरम करना ‘कठघरे’ में खड़ा कर रहा है।
जेवरात में ट्रैकर निकला तो बदमाशों को समझने में ज्यादा देरी नहीं लगी कि पुलिस उनके बारे मेें जान चुकी है। भगत के घर पर पहुंचकर पुलिस ने उसके भाई, मां समेत पांच लोगों को उठा लिया। हल्ला भी मचा था कि भगत का एनकाउंटर होगा। इतना सुनते ही एक नेता ने भगत को अपने पास बुला लिया। उसको भी नेताजी के पास जाने के अलावा दूसरी जगह जाना खतरा से खाली लगा। प्रदेश की सबसे बड़ी लूट होने को देखते पुलिस, एसटीएफ और क्राइम ब्रांच आरोपियों को ढूंढने में लगी थी। पुलिस बदमाशों के करीबियों से भगत की जानकारी जुटा रही थी। तभी नेताजी का फोन पुलिस के पास पहुंचा कि भगत हमारे पास है, ले जाओ। सोना भी बरामद हो जाएगा। पुलिस भगत को पकड़कर ले आई। तभी सुशील को सुपुर्दगी में देने के लिए पुलिस के पास दूसरा फोन आ गया। पुलिस ने सुशील की गिरफ्तारी भी 24 घंटे से पहले कर ली। सोना बिकवाने वाले दीपक को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
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कैसे बैठेगा बदमाशों में खौफ
घटना उजागर होते ही लुटा हुआ आधा अधूरा सामान लेकर बदमाश आसानी से पुलिस के पास पहुंच जाएंगे तो पुलिस का खौफ बदमाशों में कैसे होगा। नाम नहीं खुलता तो शायद पुलिस को वह नहीं मिल पाते। मुठभेड़ करके बदमाशों की गिरफ्तारी करने वाली मेरठ पुलिस की कार्यशैली को लेकर लोगों में अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं।
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