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सवा सौ वन्य जीव तस्करों पर व्हाइट कॉलर का हाथ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Mon, 01 May 2017 10:21 AM IST
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रिटायर कर्नल की कोठी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूराो
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मेरठ में वन्य जीवों के अंग मिलने के बाद सिर्फ एक मामला ही उजागर हुआ है। उत्तराखंड के जंगलों में सवा सौ वन्य जीव तस्करों के गिरोह सक्रिय हैं जिन पर अभी हाथ नहीं डाला जा सका है। इन गिरोहों को व्हाइट कॉलर अपराधियों का संरक्षण प्राप्त है। इन व्हाइट कॉलर का नाम आते ही विभाग सुस्त पड़ जा रहे हैं। इसी वजह से नेशनल क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (एनसीसीबी) ने प्रवर्तन निदेशालय को संयुक्त टीम में शामिल किया जिससे इन व्हाइट कॉलर को मनी लॉंड्रिंग के तहत घेरा जा सके।
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नेशनल क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने उत्तराखंड के वन विभाग को 125 वन्य जीव तस्करों की सूची भेजी है। इसे सभी वन प्रभागों को भेजा गया है। इसके बाद ऋषिकेश, डोईवाला में भालुओं की पित्त की थैली, कुमाऊं मंडल में बाघों के खाल बरामद की गई। वन विभाग को दो दर्जन वन्य जीव तस्करों के मोबाइल नंबर भी हाथ लगे हैं। इस आधार पर जब गोपनीय तरीके से छानबीन की गई तो कई व्हाइट कॉलर लोग वन्य जीव तस्करों के आका निकले। इस पर महकमे सुस्त पड़ गए।
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एनसीसीबी ने वन्य जीव तस्करों को पकड़ने के लिए नई टीम बनाई है। इसमें वन विभाग, पुलिस, आईटीबीपी के साथ अब ईडी को भी शामिल किया गया है। ईडी व्हाइट कॉलर लोगों की संपत्ति का ब्यौरा पता कर रहा है जिससे मनी लॉड्रिंग के जरिये उनके वन्य जीव तस्करी के धंधे तक पहुंचा जा सके। प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक डीबीएस खाती के मुताबिक अभी तक जो लोग पकड़े गए वे सभी कैरियर रहे हैं। सरगना तक पहुंचने के लिए कोशिश की जा रही है।
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पुलिस ने अभी तक तस्करों के जिन गुर्गों को पकड़ा है, वे भी सरगना का नाम नहीं बता पाए। इन्हें सिर्फ वन्य जीवों के अंग एक-दूसरे तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा। इस संबंध में गठित संयुक्त टीम के सूत्रों का कहना है कि दूसरे प्रांतों में वन्य जीव तस्करों के सरगना है। वे दूर बैठकर आपरेट करते हैं। उनके गुर्गे वन्य जीवों का शिकार करते हैं। व्हाइट कॉलर के चलते उत्तराखंड के जंगलों में इनके जाल को अभी भेदा नहीं जा सका।