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Noida News: 250 रुपये की राखी लेकर भाई का इंतजार करती रह गईं अनुराधा और अदिति
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आदित्य प्रताप सिंह
नोएडा। भाई की कलाई पर राखी बांधने का इंतजार कर रही बड़ी बहन अनुराधा और छोटी बहन अदिति की आंखों में अब आंसू हैं। जिस भाई के लिए दोनों बहनों ने रक्षाबंधन की तैयारियां की थीं, वह अब कभी लौटकर नहीं आएगा। अनुराधा ने इस बार अपने भाई आयुष के लिए करीब 250 रुपये की सबसे महंगी राखी खरीदी थी। भाई के नाम की स्पेशल मेहंदी लगवाने की भी तैयारी थी। छोटी बहन अदिति भी भाई का इंतजार कर रही थी। घर में रक्षाबंधन की खुशियां सजने वाली थीं, लेकिन उससे पहले ही 21 अगस्त को सेक्टर-54 स्थित पार्क में आयुष का क्षत-विक्षत शव मिलने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया।
परिजनों के मुताबिक, घर से निकलने से पहले आयुष ने अपनी बड़ी बहन अनुराधा से कहा था- दीदी, बहुत तेज भूख लगी है। मेरा फेवरेट खाना बनाकर रखना, मैं लौटकर खाऊंगा। भाई की यह बात अब बहन के लिए जिंदगी भर की टीस बन गई है। पड़ोसियों ने बताया कि आयुष आसपास के बच्चों के साथ मिलकर पतंग उड़ा रहा था। यहां से उसको जन्मदिन की पार्टी के लिए बुलाकर ले जाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चे के पिता प्रापर्टी डीलर हैं जबकि मां संविदा पर नर्सिंग का काम करती हैं। सेक्टर-20 स्थित आयुष के घर पर एक कुत्ता है जो दिन भर भौंकता रहता है और पूरा घर खाली पड़ा है। जब से आयुष का शव मिला है पूरा परिवार पोस्टमार्टम हाउस के बाहर धरने पर बैठा है। मां योगमाया की तबियत भी लगातार बिगड़ रही है और पोस्टमार्टम हाउस के बाहर ही उनको ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है।
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नोएडा। भाई की कलाई पर राखी बांधने का इंतजार कर रही बड़ी बहन अनुराधा और छोटी बहन अदिति की आंखों में अब आंसू हैं। जिस भाई के लिए दोनों बहनों ने रक्षाबंधन की तैयारियां की थीं, वह अब कभी लौटकर नहीं आएगा। अनुराधा ने इस बार अपने भाई आयुष के लिए करीब 250 रुपये की सबसे महंगी राखी खरीदी थी। भाई के नाम की स्पेशल मेहंदी लगवाने की भी तैयारी थी। छोटी बहन अदिति भी भाई का इंतजार कर रही थी। घर में रक्षाबंधन की खुशियां सजने वाली थीं, लेकिन उससे पहले ही 21 अगस्त को सेक्टर-54 स्थित पार्क में आयुष का क्षत-विक्षत शव मिलने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया।
परिजनों के मुताबिक, घर से निकलने से पहले आयुष ने अपनी बड़ी बहन अनुराधा से कहा था- दीदी, बहुत तेज भूख लगी है। मेरा फेवरेट खाना बनाकर रखना, मैं लौटकर खाऊंगा। भाई की यह बात अब बहन के लिए जिंदगी भर की टीस बन गई है। पड़ोसियों ने बताया कि आयुष आसपास के बच्चों के साथ मिलकर पतंग उड़ा रहा था। यहां से उसको जन्मदिन की पार्टी के लिए बुलाकर ले जाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चे के पिता प्रापर्टी डीलर हैं जबकि मां संविदा पर नर्सिंग का काम करती हैं। सेक्टर-20 स्थित आयुष के घर पर एक कुत्ता है जो दिन भर भौंकता रहता है और पूरा घर खाली पड़ा है। जब से आयुष का शव मिला है पूरा परिवार पोस्टमार्टम हाउस के बाहर धरने पर बैठा है। मां योगमाया की तबियत भी लगातार बिगड़ रही है और पोस्टमार्टम हाउस के बाहर ही उनको ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है।
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