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यूपी: तीन बच्चों के शव पहुंचते ही गांव में मचा कोहराम, गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक

Sat, 18 May 2019 08:13 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 18 May 2019 08:13 PM IST
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Cremated after the death of three children in Umpur village of Muzaffarnagar
विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला

मुजफ्फरनगर में पोस्टमार्टम के बाद बच्चों के शव गांव में पहुंचते ही कोहराम मच गया। ग्रामीणों और महिला के मायके वालों ने गमगीन माहौल में तीनों बच्चों के शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया।

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उधर, गंभीर हालत में महिला को मेरठ से दिल्ली रेफर किया गया है। इस घटना के बाद अहमदाबाद से आया महिला का पति गहरे सदमे में है। 

कोतवाली क्षेत्र के गांव उमरपुर निवासी नसीमा पत्नी जब्बार ने शुक्रवार को दोपहर के समय अपने तीन बच्चों बडे़ बेटे अनस (9) बेटी आयशा (6) ईरा (2) को गली में खेलते हुए घर के अंदर बुलाया। नसीमा ने तीनों बच्चों सहित खुद को कमरे में बंद कर लिया। नसीमा ने खुद व तीनों बच्चों पर केरोसिन छिड़ककर आग लगा दी थी। 
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वहीं चीख-पुकार व मकान से उठते हुए धुएं को देखकर पड़ोसियों ने मकान का दरवाजा तोड़कर तीनों बच्चों व महिला को मकान से बाहर निकाला था। ग्राम प्रधान अतहर हसन सहित कई ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस को दी थी। जलने के कारण तीनों बच्चों की जिला चिकित्सालय ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई थी। महिला को गंभीर हालत में मेरठ रेफर किया गया था।

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उधर, पोस्टमार्टम के बाद तीनों बच्चों के शव शनिवार को सुबह करीब 11 बजे गांव में पहुंचते की उमरपुर गांव का माहौल गमगीन हो गया। ग्रामीणों व महिला के मायके वालों और जब्बार के रिश्तेदारों ने बच्चों के शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया। ग्राम प्रधान अतहर हसन ने बताया कि गंभीर हालत में महिला को मेरठ से दिल्ली रेफर किया गया है।  

बच्चों को मिट्टी देना भी नहीं हुआ नसीब
उमरपुर गांव में पोस्टमार्टम के बाद तीनों बच्चों के शव गांव में पहुंचे तो पूरा गांव घटना के कारण गम में डूबा हुआ था। बच्चों का पिता जब्बार गुजरात के अहमदाबाद में कपड़े की फेरी लगाता है। वह भी गांव में नहीं पहुंच पाया था। बच्चों के साथ आत्मदाह करने वाली नसीमा दिल्ली चिकित्सालय में जिंदगी व मौत के बीच जूझ रही है। बच्चों के शव दफनाने के बाद अहमदाबाद से पहुंचा जब्बार को इस बात का गम है कि उसे बच्चों को मिट्टी देना भी नसीब नहीं हुआ।

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