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पुलिस के लिए चुनौती होगा बाजार में व्यवस्था बनाना
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पुलिस के लिए चुनौती होगा बाजार में व्यवस्था बनाना
मेरठ। शहर में बाजार खुलने के बाद पुलिस प्रशासन के लिए व्यवस्था बनाना आसान नहीं होगा। अभी लॉकडाउन के दौरान ही लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं तो बाजार खुलने के बाद हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसको लेकर भले ही पुलिस प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी हो, लेकिन भीड़ को संभालना बहुत कठिन होगा। देहात क्षेत्र में पहले ही बाजार खुल चुके हैं। वहां भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं होने का इनपुट है। ऐसे में व्यापारिक राजनीति के चक्कर में शहर की व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है।
जिला प्रशासन की ओर से 8 जून से वन ट्रेड वन डे के आधार पर बाजार खोलने की बात कही जा रही है। देहात क्षेत्र के बाजारों की बात करें तो मवाना, सरधना, परीक्षितगढ़, किठौर, खरखौदा, दौराला, लावड़ आदि कस्बों में सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं हो रहा है। यहां व्यापारी वन ट्रेड वन डे का भी पालन नहीं कर रहे हैं। सभी दुकानें एक साथ खोल रहे हैं। वहीं मेरठ शहर तो व्यापारिक राजनीति का केंद्र है। यहां नियमों का पालन कराना मुश्किल होगा। करीब ढाई माह से बंद बाजारों में व्यापारी अपने प्रतिष्ठान खोलने के लिए उतावने नजर आ रहे हैं। उनके समर्थन में राजनीतिक संगठन भी हैं। एक ओर शहर में लगातार कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। जो इलाके अब तक अछूते थे, वहां भी केस मिल रहे हैं। ऐसे में बाजार खुले तो शहर के हालात और बिगड़ सकते हैं।
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मेरठ। शहर में बाजार खुलने के बाद पुलिस प्रशासन के लिए व्यवस्था बनाना आसान नहीं होगा। अभी लॉकडाउन के दौरान ही लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं तो बाजार खुलने के बाद हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसको लेकर भले ही पुलिस प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी हो, लेकिन भीड़ को संभालना बहुत कठिन होगा। देहात क्षेत्र में पहले ही बाजार खुल चुके हैं। वहां भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं होने का इनपुट है। ऐसे में व्यापारिक राजनीति के चक्कर में शहर की व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है।
जिला प्रशासन की ओर से 8 जून से वन ट्रेड वन डे के आधार पर बाजार खोलने की बात कही जा रही है। देहात क्षेत्र के बाजारों की बात करें तो मवाना, सरधना, परीक्षितगढ़, किठौर, खरखौदा, दौराला, लावड़ आदि कस्बों में सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं हो रहा है। यहां व्यापारी वन ट्रेड वन डे का भी पालन नहीं कर रहे हैं। सभी दुकानें एक साथ खोल रहे हैं। वहीं मेरठ शहर तो व्यापारिक राजनीति का केंद्र है। यहां नियमों का पालन कराना मुश्किल होगा। करीब ढाई माह से बंद बाजारों में व्यापारी अपने प्रतिष्ठान खोलने के लिए उतावने नजर आ रहे हैं। उनके समर्थन में राजनीतिक संगठन भी हैं। एक ओर शहर में लगातार कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। जो इलाके अब तक अछूते थे, वहां भी केस मिल रहे हैं। ऐसे में बाजार खुले तो शहर के हालात और बिगड़ सकते हैं।
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