मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के छात्र की हत्या में तीन डॉक्टरों को उम्रकैद, तत्कालीन प्रधानाचार्य तलब
मेरठ मेडिकल के छात्र सिद्धार्थ चौधरी के परिजनों को आखिरकार इंसाफ मिल गया। अदालत ने शुक्रवार को तीन डॉक्टरों को सिद्धार्थ की हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामले में अदालत ने तत्कालीन प्राचार्य डॉ. ऊषा शर्मा को भी तलब किया है।
अभियोजन के अनुसार छह जुलाई 2004 को लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में मुजफ्फरनगर निवासी एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र सिद्धार्थ चौधरी की लाश कैंपस स्थित हॉस्टल मिली थी। हॉस्टल का वह कमरा छात्र सचिन मलिक को आवंटित था। सिद्धार्थ के माता-पिता दोनों ही डॉक्टर हैं। उन्हें अंदेशा था कि सिद्धार्थ की हत्या हुई है। उन्होंने पोस्टमार्टम अपने सामने कराया। उन्होंने पाया कि यह मौत स्वाभाविक नहीं है।
पुलिस ने जांच कर 2006 में अंतिम आख्या भेज दी थी। जिसके बाद सिद्धार्थ के पिता की तरफ से अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की गई। अदालत ने सुनवाई के बाद सचिन मलिक, अमरदीप और यशपाल राणा को तलब कर लिया था। प्राचार्य ऊषा शर्मा के विरुद्ध पुलिस की ओर से भेजी गई अंतिम आख्या स्वीकार कर ली थी।
तीनों आरोपियों के विरुद्ध विचारण अपर जिला जज कोर्ट संख्या एक गुरप्रीत सिंह बावा के न्यायालय में किया गया। सरकारी वकील नरेश दत्त शर्मा व वादी के अधिवक्ता योगेंद्र पाल सिंह चौहान व गौरव प्रताप ने वादी सहित कुल 20 गवाह पेश किए।
उनके बयानों व साक्ष्य के आधार पर डा. सचिन मलिक निवासी छपरौली बागपत, डा. अमरदीप सिंह निवासी गुरदासपुर व डा. यशपाल राणा निवासी मुजफ्फरनगर को आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
सरकारी वकील नरेश दत्त शर्मा ने बताया कि तत्कालीन प्राचार्य ऊषा शर्मा को भी हत्या के आरोप में तलब कर लिया है। जिनका विचारण अलग से किया जाएगा। वादी के अधिवक्ता योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि एमबीबीएस कर तीनों आरोपी डॉक्टर बन चुके हैं।