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Meerut News: रिश्वतखोर लेखपाल राघवेंद्र सिंह को 6 वर्ष का कारावास
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नोट- मुजफ्फरनर के ध्यानार्थ
- 11 साल पहले राजस्व अभिलेखों में आदेश दर्ज करने के नाम पर मांगी थी 10 हजार की रिश्वत
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चकबंदी राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने के लिए रिश्वत लेने के दोषी लेखपाल राघवेंद्र सिंह को 6 वर्ष का कारावास हुआ है। अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट/भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मेरठ अजय कुमार ने उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह घटना 11 साल पहले मुजफ्फरनगर के थाना सिविल लाइन क्षेत्र में घटी थी।
मुजफ्फरनगर की शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव बान नगर निवासी परवेज कुमार ने 25 जून 2015 को एसपी भ्रष्टाचार निवारण संगठन मेरठ को शिकायत दी थी। परवेज ने बताया कि उनके पिता से फर्जी बैनामा कराया गया था। चकबंदी अधिकारी ने 15 जून 2015 को उनके पक्ष में निर्णय दिया था। इस आदेश को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने की जिम्मेदारी लेखपाल राघवेंद्र सिंह की थी। राघवेंद्र ने इसके लिए 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने एक टीम गठित की। टीम ने 27 जून 2015 को लेखपाल राघवेंद्र सिंह को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया। वह उस समय मुजफ्फरनगर के चकबंदी अधिकारी कार्यालय में तैनात था।
न्यायालय में सुनवाई
विशेष लोक अभियोजक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने न्यायालय के समक्ष 8 गवाह पेश किए। उन्होंने लेखपाल राघवेंद्र को भ्रष्ट लोक सेवक के रूप में आरोपित किया। न्यायालय से उसे दंडित करने की प्रार्थना की गई। शुक्रवार को दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने राघवेंद्र को दोषी पाया। उसे भ्रष्टाचार का दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई।
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- 11 साल पहले राजस्व अभिलेखों में आदेश दर्ज करने के नाम पर मांगी थी 10 हजार की रिश्वत
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चकबंदी राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने के लिए रिश्वत लेने के दोषी लेखपाल राघवेंद्र सिंह को 6 वर्ष का कारावास हुआ है। अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट/भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मेरठ अजय कुमार ने उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह घटना 11 साल पहले मुजफ्फरनगर के थाना सिविल लाइन क्षेत्र में घटी थी।
मुजफ्फरनगर की शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव बान नगर निवासी परवेज कुमार ने 25 जून 2015 को एसपी भ्रष्टाचार निवारण संगठन मेरठ को शिकायत दी थी। परवेज ने बताया कि उनके पिता से फर्जी बैनामा कराया गया था। चकबंदी अधिकारी ने 15 जून 2015 को उनके पक्ष में निर्णय दिया था। इस आदेश को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने की जिम्मेदारी लेखपाल राघवेंद्र सिंह की थी। राघवेंद्र ने इसके लिए 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने एक टीम गठित की। टीम ने 27 जून 2015 को लेखपाल राघवेंद्र सिंह को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया। वह उस समय मुजफ्फरनगर के चकबंदी अधिकारी कार्यालय में तैनात था।
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न्यायालय में सुनवाई
विशेष लोक अभियोजक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने न्यायालय के समक्ष 8 गवाह पेश किए। उन्होंने लेखपाल राघवेंद्र को भ्रष्ट लोक सेवक के रूप में आरोपित किया। न्यायालय से उसे दंडित करने की प्रार्थना की गई। शुक्रवार को दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने राघवेंद्र को दोषी पाया। उसे भ्रष्टाचार का दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई।
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