कोरोना को मात देकर अपने गांव पहुंची मंजू, कहा- ईश्वर में आस्था और बुलंद इरादे से पाई विजय
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ मुजफ्फरनगर की मंजू हौसले के बल पर जिंदगी की जंग जीत कर निराश लोगों का मनोबल बढ़ाने में कामयाब साबित हुई। जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद बृहस्पतिवार को महिला को नोएडा के अस्पताल से छुट्टी मिल गई। घर लौटने पर महिला को एहतियातन 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन किया गया है। मंजू ने डॉक्टरों और नर्सों को देवदूत बताया है। साथ ही कहा कि ईश्वर में आस्था रख कर अपने बुलंद इरादों के बल पर उसने यह जंग जीती है।
जनपद के कस्बा सिसौली के मोहल्ला पट्टी लेपरान निवासी मंजू (40) पत्नी प्रणपाल सिंह का छह अप्रैल को नोएडा के जेपी अस्पताल में पेट का ऑपरेशन हुआ था। इस दौरान लिए गए सैंपल में आठ अप्रैल को महिला को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। हालांकि महिला में संक्रमण के कोई लक्षण नहीं थे। मंजू के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद प्रशासन ने सिसौली कस्बे को हॉटस्पॉट घोषित करते हुए पूरी तरह सील कर दिया था। महिला व उसके परिवार के लोग ऑपरेशन से पूर्व सिसौली में एक रस्म तेरहवीं में शामिल हुए थे। इस बात का पता चलते ही भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत सहित सैकड़ों लोगों को होम क्वारंटीन होना पड़ा था। परिजनों ने बताया कि बुधवार को नोएडा में मंजू की जांच रिपोर्ट आई है, जिसमें वह कोरोना नेगेटिव आई। इस पर बृहस्पतिवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जिसके बाद परिजन महिला को लेकर सिसौली पहुंच गए। सूचना पर प्रशासन ने महिला को एहतियातन 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन कर दिया है।
लिए गए थे पति-पुत्र व परिजनों के सैंपल
कस्बा सिसौली निवासी मंजू के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद प्रशासन ने महिला के पति, पुत्र व अन्य परिजनों के भी सैंपल लिए थे। जांच में सभी नेगेटिव पाए गए थे। इनमें महिला व उसके बेटे को नोएडा के अस्पताल में भर्ती कर लिया गया था। जांच रिपोर्ट में महिला की एक रिपोर्ट पॉजिटिव व अन्य दो रिपोर्ट निगेटिव आईं। वहीं, उसके बेटे की तीनों रिपोर्ट नेगेटिव रहीं।
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कालकोठरी नहीं है होम क्वारंटीन
वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ जंग जीतकर लौटी मंजू देवी का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि होने के बाद एकबारगी तो वह घबरा गई। हौसला भी खोया कि उनके बाद परिवार का क्या होगा? महिला को घबराते देख अस्पताल के डॉ. राजेश कपूर ने उन्हें दिलासा दिया कि कोरोना साधारण खांसी-बुखार की तरह है, लेकिन उपचार लंबा चलेगा, जिसके बाद मन का भय दूर हो गया। मंजू ने बताया कि डॉक्टर और नर्स देवदूत हैं, उनका सम्मान करना चाहिए। उनके कक्ष में एक दिन में तीन नर्सों की ड्यूटी लगती थी। सभी ने उसे अपनापन दिया। अस्पताल में ही मौजूद बेटे से भी लगातार बात होती रहीं, जिससे जीवित रहने का हौसला बना रहा। उसने कहा कि होम क्वारंटीन कालकोठरी नहीं है। संक्रमण परिवार में न फैले, इसलिए संदिग्ध को अलग रखने का एक तरीका है, जो सबसे अच्छा बचाव है।
कैसे लगा संक्रमण, महिला को भी नहीं पता
सिसौली निवासी मंजू पत्नी प्रणपाल सिंह के परिवार में किसी की कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं है। महिला खुद भी छह अप्रैल से पहले किसी संदिग्ध व्यक्ति के संपर्क में नहीं आई। इसके बावजूद महिला कब और कैसे पॉजिटिव हो गई, इसकी खुद उसे भी भनक तक नहीं लगी। यही नहीं, महिला में कोरोना संक्रमण के किसी तरह के लक्षण भी नहीं थे। महिला के परिजनों का कहना है कि पेट संबंधी बीमारी के चलते वे कई बार बड़ौत में डॉक्टर के पास गए। वहां आराम नहीं लगने पर महिला को नोएडा के अस्पताल में दिखाया, जहां छह अप्रैल को उसका ऑपरेशन हुआ। अब महिला कैसे और कब पॉजिटिव हुई, इसकी जानकारी किसी को भी नहीं है।
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