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कोरोना टेस्टिंग संदेह के घेरे में, लोगों को पता ही नहीं कब हुआ टेस्ट, स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

Tue, 06 Oct 2020 12:51 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 06 Oct 2020 12:51 AM IST
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Corona testing Questioned in Meerut, health team role suspectable
coronavirus - फोटो : पीटीआई

मेरठ में कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए की जा रही टेस्टिंग को लेकर स्वास्थ्य विभाग संदेह के घेरे में है। हर रोज दावा किया जा रहा है कि तीन हजार से चार हजार लोगों का कोरोना का टेस्ट किया जा रहा है। हालांकि यह टेस्टिंग कहां की जा रही है।

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इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं दी जा रही है और न ही इसका प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। हालांकि सच्चाई यह है कि 200 मीटर दूर रहने वाले व्यक्ति को ही नहीं पता कि गांव में कोरोना का टेस्ट कब हुआ।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा बीती चार अक्तूबर की रात प्रेस नोट जारी किया गया। इसके अनुसार जिले में कोरोना के 2 लाख 68 हजार 214 लोगों के टेस्ट कराए जा चुके हैं। इनमें 2 लाख 57 हजार 757 लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई। कोरोना के मार्च व अप्रैल में औसतन 200 से 300 लोगों का टेस्ट प्रतिदिन किया जा रहा था।

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पिछले तीन माह से यह संख्या तीन हजार पार कर गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि एक दिन औसतन 3000 लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा रहा है। इनमें जिला अस्पताल के अतिरिक्त शहर में अन्य स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम जाती है। वहीं, देहात में अलग-अलग गांवों में भी प्राथमिक विद्यालय अन्य स्थानों पर कैंप लगाकर टेस्टिंग किए गए। हालांकि लोगों को इसका पता ही नहीं है कि उनके गांव में टेस्ट कब किया जाएगा। 

आखिर क्यों नहीं दी जाती जानकारी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना की टेस्टिंग लेकर कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। किस इलाके में किस दिन कहां पर टेस्ट किया जाएगा। कहां-कहां कैंप लगाए जाने हैं। इसकी अधिकारिक जानकारी नहीं दी जाती है।

ऐसे में शहर में कॉलोनियों, मोहल्लों, देहात में अलग-अलग गांव में भी यह लोगों को पता नहीं है। टेस्टिंग के लिए कितने केंद्र हैं और कितनी टीम हैं। उसकी भी अब तक जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने नहीं दी है।

नहीं लगा कैंप
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में पांच दिन पहले कोरोना की टेस्टिंग लिए कैंप लगाया जाना था। हालांकि यहां कैंप नहीं लगाया गया। यहां के व्यापारी और स्थानीय लोग कई बार कैंप के आयोजन की मांग कर चुके हैं।

सीएचसी, हेल्थ सेंटर एवं अस्पतालों आदि में एकत्र किए जाने वाले नमूनों की जांच कराई जाती है। तीन कलेक्शन सेंटर काम कर रहे हैं। निजी अस्पताल भी जांच कराते हैं। इतना ही नहीं मरीजों के साथ उनके संपर्क में आने वालों की भी जांच की जाती है। इस प्रकार औसतन तीन से चार हजार नमूनों की प्रतिदिन की जाती है। सर्वे के दौरान कैंप लगाकर जांच की गई थी। आजकल शिविर नहीं लगाए जा रहे हैं। -डॉ. राजकुमार सीएमओ 

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