नहीं सुधर रहे हालात : लखनऊ से भी ज्यादा मेरठ में बढ़े कोरोना के मरीज, 24 घंटे में मिले मिले 1070 संक्रमित
शहर में तो जांच हो रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी बहुत कम जांच करा रहे हैं। ये भी तब है जबकि गांवों में मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
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मेरठ में जांच कम होने के बाद भी केस अधिक सामने आ रहे हैं। मई महीने में ही अब तक 16 हजार नए मरीज आ चुके हैं। ये हाल भी तब है जबकि कोरोना कर्फ्यू लगा हुआ है। होम आइसोलेशन के मामले बढ़ने के साथ ये संख्या बढ़ी है।
बहुत से लोग खांसी-बुखार के कई-कई दिन तक भी जांच नहीं करा रहे हैं, जिसके कारण संक्रमण फैलता जा रहा है। अगर ये चेन नहीं टूटी तो कर्फ्यू खुलने के बाद हालात और भी भयावह हो जाएंगे। पिछले 12 दिनों की बात करें तो जिले में 81326 लोगों के टेस्ट किए गए। इनमें से 15578 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। जांच वाले मरीजों में 20 फीसदी पॉजिटिव पाए जा रहे हैं जोकि अच्छे हालात नहीं हैं।
होम आइसोलेशन में खास रखें ध्यान
डॉक्टर बताते हैं कि होम आइसोलेशन में लोगों को खास ध्यान रखने की जरूरत है। मरीज के पास खाना आदि लेकर जाएं तो डबल मास्क लगाकर जाएं। मरीज को भी कहें कि वो भी मास्क लगाकर रखे। जहां मरीज हो वहां पर अधिक देर तक न रुकें। कोरोना जांच के मामलों में अधिकतर अब होम आइसोलेट मरीजों के चेन के मरीज आ रहे हैं। ऐसे में लोगों को ध्यान रखने की जरूरत है। अगर इसमें सावधानी नहीं बरती जाती है तो केस और बढ़ेंगे।
ग्रामीण क्षेत्र में बहुत कम जांच करा रहे लोग
शहर में तो जांच हो रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी बहुत कम जांच करा रहे हैं। ये भी तब है जबकि गांवों में मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में अगर गांवों में लोग अगर अब भी सतर्क नहीं हुए तो चेन बढ़ती जाएगी, जोकि आने वाले समय के लिए बेहद खतरनाक होगी।
मरीजों के इलाज में लगातार हो रही देरी
मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इलाज में लगातार देरी हो रही है। गुरुवार को मोदीनगर से आईं विमला देवी को लेकर परिजन घंटों तक इमरजेंसी के बाहर इंतजार करते रहे। काफी देर मिन्नतें करने के बाद उनको भर्ती कराया गया। यही हाल तीन अन्य मरीजों का रहा।
परिजन एंबुलेंस में मरीजों को लेकर कई घंटे तक खड़े रहे। एक मरीज को तो परिजन वापस ले गए। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में लगातार मरीजों को भर्ती किए जाने में लापरवाही सामने आई है।
मेडिकल में बुधवार को हुस्नआरा नाम की महिला ने ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ दिया तो वहीं, मंगलवार को जिला अस्पताल में बुजुर्ग भोपाल सिंह की भी भर्ती नहीं किए जाने के कारण मौत हो गई। इससे पहले भी मेडिकल में कई मरीजों की इलाज नहीं मिलने के कारण मौत हो चुकी है।