फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Corona epidemic orphaned children, along with education, now employment problem arose

अमर उजाला अपनत्व : महामारी ने छीनीं बच्चों की खुशियां, हुए बेसहारा, पढ़ाई के साथ अब रोजगार की भी समस्या

Sun, 30 May 2021 07:04 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 30 May 2021 07:04 PM IST
सार

‘अमर उजाला अपनत्व’ अभियान की खबर प्रकाशित होने के बाद कुछ लोगों ने एक साल तक के बच्चों को गोद लेने की इच्छा जताई है।

विज्ञापन
Corona epidemic orphaned children, along with education, now employment problem arose
कोरोन से पति की मौत के बाद गमगीन पत्नी रूबी और बच्चे दिपांश व हिमांशु - फोटो : amar ujala

विस्तार

जिन घरों में भाई-बहन के बीच नोकझोंक होती थी, पिता की डांट और मां का दुलार देखने को मिलता था। कोरोना की दूसरी लहर ने ऐसे हंसते-खेलते परिवारों को ऐसी चोट पहुंचाई है कि दिल में अपनों को खोने का गम बैठ गया है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों की मदद के बावजूद जिले में सैकड़ों बच्चों के सिर से माता-पिता दोनों या इनमें से किसी एक का साया असमय उठ गया है। परिजनों के लिए अब उनकी यादें ही बची हैं।  

विज्ञापन

 
चार बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
जागृति विहार निवासी राजेंद्र सिंह चौहान मूल रूप से हरदोई के हैं। किराए में मकान में रहकर प्राइवेट नौकरी से राजेंद्र अपने चार बच्चों का भरण पोषण कर रहा था। वह प्रतिदिन नौकरी पर जाता रहा। एक मई को राजेंद्र कोविड ग्रस्त हो गया।
विज्ञापन


पड़ोसी रघुवीर सिंह ने बताया कि राजेंद्र को आईआईएमटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पड़ोसी और रिश्तेदारों ने चंदा इकट्ठा कर पत्नी गीता का सहयोग किया लेकिन राजेंद्र की जान नहीं बचा पाए। राजेंद्र के चार बच्चों में सबसे छोटा सात साल का है। बच्चों का ताऊ तेरहवीं कराने के लिए हरदोई ले गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

हर वक्त पिता को याद करता है अक्षित
प्राइवेट मार्केटिंग कंपनी में कर्मचारी प्रमोद शर्मा का यादगारपुर किला रोड पर निवास है। बड़ी बेटी अनन्या (13) बीएनजी इंटरनेशनल स्कूल में आठवीं और छोटा बेटा अक्षित (10 ) कक्षा चार में पढ़ता है। 11 मई को प्रमोद को गंभीर हालात में सुभारती अस्पताल में भर्ती किया गया था।

17 मई को उनका स्वर्गवास हो गया। प्रमोद की पत्नी दिव्या शर्मा ने बताया कि घर में सिर्फ वही कमाने वाले थे। अक्षित बार बार पिता को याद करता है। वह अपने आंसुओं को रोककर बेटे-बेटी को संभालती है तो कभी बेटी मां को सांत्वना देती है। मां चाहती है कि बच्चों की आगे की पढ़ाई चलती रहे।
 
पिता के बाद दादा-दादी भी चले गए

पुरानी प्रेमपुरी निवासी सेंट मेरीज में चौथी कक्षा के छात्र अनंत जैन के सिर से 10 दिन में पिता के बाद दादा और दादी का साया उठ गया। दादी और पिता का एक साथ अंतिम संस्कार हुआ। पिता अजय जैन रेलवे रोड पर फोटोस्टेट की किराए की दुकान चलाता था।

अप्रैल में महामारी की चपेट में आए अजय की अस्पताल में मृत्यु हो गई। बेटे की मृत्यु का समाचार सुनकर मां पुष्पा जैन भी चल बसीं। ससुर नगीन चंद्र जैन की तबीयत भी इसी दौरान खराब हो गई। 10 मई को उनकी भी मृत्यु हो गई। अब इस परिवार मां नेहा जैन और आठ वर्षीय बेटा अनंत जैन ही रह गए हैं। नेहा बेटे की पढ़ाई और परिवार के भरण पोषण को लेकर चिंतित हैं।

मां को बच्चों की पढ़ाई की आस
कोरोना से चार दिन पहले छज्जुपुर में ब्रह्मपाल पुत्र दयाचंद की मौत हो गई थी। वह अपने पीछे पत्नी रूबी व दो बच्चों दिपांश (13) और हिमांशु (12) छोड़ गए। ब्रह्मपाल चार भाई थे। सभी के बीच कुछ समय पहले ही बंटवारा हुआ था। ब्रह्मपाल चाउमीन का ठेला लगाकर गुजारा कर रहा था। उसका मकान भी नहीं बना था।

पिता की मौत के बाद बच्चे सूनी आंखों से मां को सिर्फ निहार कर रह जाते हैं उनके सामने रोजी-रोटी का संकट है। ब्रह्मपाल की पत्नी को आस है कि शासन- प्रशासन से मदद मिले तो उनके बच्चों की पढ़ाई और उनकी रोजी-रोटी का सहारा हो जाएगा।
 

बच्चों को गोद लेने की इच्छा जताई 
एक तरफ बच्चे बेसहारा हुए हैं तो उन्हें अपनाने वाले भी कम नहीं हैं। ‘अमर उजाला अपनत्व’ अभियान की खबर प्रकाशित होने के बाद कुछ लोगों ने एक साल तक के बच्चों को गोद लेने की इच्छा जताई है। गोद लेने वालों में एक व्यापारी की दो बेटियां हैं, जबकि एक व्यक्ति के कोई बच्चा नहीं है। इच्छुक लोग इसके लिए सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के लिए तैयार हैं। 
  
प्रशासन ने चिह्नित किए 65 बच्चे
मेरठ प्रशासन की खोजबीन में अभी तक 65 बच्चे ऐसे पाए गए हैं, जिन्होंने कोरोना के कारण अपने माता या पिता को खो दिया है। वहीं, चार बच्चे ऐसे हैं जो अनाथ होने के बाद अपनी बुआ, मौसी या अन्य नजदीकी रिश्तेदारों के पास चले गए हैं। जिला प्रोबेशन कार्यालय ने फिलहाल दो बच्चों के परिवारों को राशन देने की व्यवस्था की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed