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प्रदूषण से बढ़ा सीओपीडी का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Wed, 16 Nov 2016 02:18 AM IST
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प्रेस वार्ता में जानकारी देते चिकित्सक।
- फोटो : अमर उजाला
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अभी तक सांस से जुड़ी तमाम बीमारियां के पीछे धूम्रपान को मुख्य वजह माना जाता है, लेकिन अब बड़ा बदलाव होता दिखाई दे रहा है। धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी सांस से जुड़ी बीमारियां देखी जा रही हैं। खासकर सांस से जुड़ी सीओपीडी (क्रॉनिक ऑबस्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज) जैसी बीमारी देखी जा रही है। चिकित्सक मानते हैं कि बढ़ता प्रदूषण इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है।
वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर का कहना है कि सीओपीडी दुनिया की पांचवीं सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है। स्टडी बताती है कि 30 से 50 वर्ग की आयु वर्ग के लोग सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आते हैं। इस उम्र में आम आदमी की सबसे ज्यादा भाग दौड़ रहती है और प्रदूषण की चपेट में आने के कारण सीओपीडी की चपेट में आ जाते हैं। एक आदमी दिनभर की भाग दौड़ में वायु प्रदूषण के जरिये 40 सिगरेट जितना स्मोक नाक व सांस के जरिये अपने अंदर ले जाते हैं। हालांकि यदि सीओपीडी की समय पर पहचान कर ली जाए तो काफी हद तक बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है। मौजूदा समय में काफी इनहेलर उपलब्ध है जिनके इस्तेमाल से शरीर को कोई नुकसान भी नहीं होता। वहीं वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. विश्वजीत बैंबी का कहना है कि शहरी क्षेत्र के मरीजों में अब सबसे ज्यादा सीओपीडी के मरीज देखे गए हैं। क्योंकि बढ़ता प्रदूषण की सबसे ज्यादा शहरी लोग ही चपेट में हैं। इसलिए अब सबसे ज्यादा खतरे की घंटी शहरी लोगों को है, जिसके बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल करें और योग व प्राणायाम करें।
आईएमए चला रही अभियान
सीओपीडी लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बुधवार से एक अभियान चला रही है। मंगलवार को बच्चा पार्क स्थित आईएमए भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में डॉ. वीरोत्तम तोमर ने जानकारी दी कि हम शहर में 10 प्रमुख जगहों पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन करने जा रहे हैं। इसमें कमिश्नरी स्थित चौधरी चरण सिंह पार्क, बेगमपुल, बच्चा पार्क व घंटाघर जैसे जगहों पर आयोजन किया जाएगा। इस दौरान डॉ. रेनु भगत, डॉ. विश्वजीत बैंबी व अन्य चिकित्सक भी मौजूद रहे।
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वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर का कहना है कि सीओपीडी दुनिया की पांचवीं सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है। स्टडी बताती है कि 30 से 50 वर्ग की आयु वर्ग के लोग सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आते हैं। इस उम्र में आम आदमी की सबसे ज्यादा भाग दौड़ रहती है और प्रदूषण की चपेट में आने के कारण सीओपीडी की चपेट में आ जाते हैं। एक आदमी दिनभर की भाग दौड़ में वायु प्रदूषण के जरिये 40 सिगरेट जितना स्मोक नाक व सांस के जरिये अपने अंदर ले जाते हैं। हालांकि यदि सीओपीडी की समय पर पहचान कर ली जाए तो काफी हद तक बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है। मौजूदा समय में काफी इनहेलर उपलब्ध है जिनके इस्तेमाल से शरीर को कोई नुकसान भी नहीं होता। वहीं वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. विश्वजीत बैंबी का कहना है कि शहरी क्षेत्र के मरीजों में अब सबसे ज्यादा सीओपीडी के मरीज देखे गए हैं। क्योंकि बढ़ता प्रदूषण की सबसे ज्यादा शहरी लोग ही चपेट में हैं। इसलिए अब सबसे ज्यादा खतरे की घंटी शहरी लोगों को है, जिसके बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल करें और योग व प्राणायाम करें।
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आईएमए चला रही अभियान
सीओपीडी लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन बुधवार से एक अभियान चला रही है। मंगलवार को बच्चा पार्क स्थित आईएमए भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में डॉ. वीरोत्तम तोमर ने जानकारी दी कि हम शहर में 10 प्रमुख जगहों पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन करने जा रहे हैं। इसमें कमिश्नरी स्थित चौधरी चरण सिंह पार्क, बेगमपुल, बच्चा पार्क व घंटाघर जैसे जगहों पर आयोजन किया जाएगा। इस दौरान डॉ. रेनु भगत, डॉ. विश्वजीत बैंबी व अन्य चिकित्सक भी मौजूद रहे।
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