दीक्षांत समारोह: चिकित्सा के फलक पर चमकीं बेटियां, मेडल पाकर खिले चेहरे
मेरठ के लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज का 58 वां स्थापना दिवस एवं दीक्षांत समारोह रविवार को आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री व चिकित्सा शिक्षा व चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक रहे।
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मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में रविवार को छात्र-छात्राओं पर सोना बरसा। बेटियां आगे रहीं। भावी चिकित्सकों को कुल 40 गोल्ड मेडल, 212 प्रमाण पत्र और तीन चल वैजयंती प्रदान की गईं। 154 विद्यार्थियों को एमबीबीएस और 53 को स्नातकोत्तर डिग्रियां दी गईं। मौका था लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के 58वें स्थापना दिवस पर आयोजित दीक्षांत पुरस्कार वितरण समारोह का। इसमें मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री व चिकित्सा शिक्षा व चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक रहे।
फाइनल एमबीबीएस प्रोफेशनल पार्ट-2 में डॉ. आशिमा सचदेवा को 3 गोल्ड मेडल सहित 10 प्रमाणपत्र मिले। वह अपने बैच में परीक्षा में प्रथम स्थान पर रहीं। उन्हें त्रिलोक जैन मेमोरियल गोल्ड मेडल (एमबीबीएस के सभी विषयों में सबसे अधिक अंक लाने के लिए) भी मिला। डॉ. कानन त्यागी 6 प्रमाणपत्र के साथ द्वितीय स्थान पर रहीं। कानन को मोस्ट पॉपुलर स्टूडेंट अवार्ड चल वैजयंती 2018 बैच भी मिला।
फाइनल एमबीबीएस प्रोफेशनल पार्ट-1 में राशि गर्ग को 5 गोल्ड मेडल सहित 14 प्रमाणपत्र मिले। राशि गर्ग को एसके गोयल मेमोरियल गोल्ड मेडल व केपी निगम चल वैजयंती भी प्रदान की गई। मधुर तोमर एक गोल्ड मेडल सहित 5 प्रमाणपत्र पाकर द्वितीय स्थान पर रहे।
एमबीबीएस द्वितीय प्रोफेशनल में रुशाने जहरा 3 गोल्ड मेडल और 9 प्रमाणपत्र सहित प्रथम स्थान पर रहीं। शिवांगी शर्मा 4 प्रमाण-पत्र लेकर द्वितीय स्थान पर रहीं। एमबीबीएस प्रथम प्रोफेशनल में द्विजा बाली और संजना पिलानिया प्रथम स्थान पर रहीं।
स्नातकोत्तर में इनका रहा जलवा
स्नातकोत्तर परीक्षाओं में सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिए नेत्र विभाग में डॉ. कीर्ति सिंह, मेडिसिन विभाग के डॉ. आदित्य प्रताप सिंह, पीडियाट्रिक विभाग के डॉ. भानवी चितकारा, सर्जरी विभाग की डॉ. अजहरुद्दीन, स्किन एवं वीडी विभाग के डॉ. पवन कुमार सिंह को गोल्ड मेडल मिला। फार्माकोलोजी विभाग की डॉ. ज्योति गुप्ता, कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. सिद्धार्थ सक्सेना एवं पैथालॉजी विभाग की डॉ. आकांक्षा गौतम को गोल्ड मेडल मिला। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में पद्मश्री डॉ. उषा शर्मा गोल्ड मेडल डॉ. नियति सिंघल को दिया गया। डॉ. रजनी और डॉ. जीएस गुप्ता चल वैजयंती फाॅर ओवर ऑल बेस्ट इंटर्न बैच 2018 की राजश्री ग्रोवर और अभिनव भल्ला को दिया गया। प्रधानाचार्य गोल्ड मेडल फाॅर स्टूडेंट्स ऑफ द ईयर 2021 बैच की मेघा चट्टोपाध्याय को दिया गया।
इससे पहले समारोह की शुरुआत शोभायात्रा से की गई। सरस्वती वंदना मेडिकल छात्राओं ने प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक, राज्यमंत्री डॉ सोमेंद्र तोमर, अटल बिहारी वाजपेई चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ संजीव मिश्रा, बाल चिकित्सा अस्पताल एवं स्नातकोत्तर शिक्षण संस्थान नोएडा के प्रो. डॉ एके सिंह, मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे और प्रधानाचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने दीप प्रज्वलित किया। प्रोफेसर डॉ. एके सिंह ने छात्र-छात्राओं को हिप्पोक्रेटिक ओथ दिलाई। कॉलेज के दानकर्ताओं को विशेष सम्मान दिया गया, जिनमें 1998 बैच के छात्र डॉ राजकुमार बजाज और डॉ. अजय मालिक आदि शामिल रहे। प्रशासनिक भवन के पुनरोधार के शिलापट्ट का अनावरण उप मुख्यमंत्री ने किया।
प्राचार्य बोले, 40 डॉक्टर कम हैं, रद्द हो सकती है
प्राचार्य डॉक्टर आरसी गुप्ता ने मंच से उप मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि मेडिकल कॉलेज में 40 डॉक्टर कम हैं। लगातार चिकित्सकों के स्थानांतरण हो रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों की काफी कमी हो गई है। अगर यह स्थिति रही तो कॉलेज की मान्यता रद्द हो सकती है। इनकी भरपाई कराई जाए।
इस पर उप मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि मेडिकल कॉलेज में जो भी जरूरतें हैं, उन्हें पूरा कराया जाएगा। दरअसल, मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों की कमी काफी समय से है। यही वजह है कि मेडिकल में एमबीबीएस की 50 सीटें भी पिछले चार साल से कम चल रही हैं। पहले यहां 150 सीटें थीं, मगर अब 100 हैं। इनकी भरपाई करने के बजाय यहां से चिकित्सकों के स्थानांतरण किए जा रहे हैं। नतीजतन, चिकित्सकों की काफी कमी हो गई है। इससे मरीजों को भी परेशानी होती है।
कॉलेज की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। यही वजह रही कि प्राचार्य ने उप मुख्यमंत्री और चिकित्सा स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री ब्रजेश पाठक के सामने चिकित्सकों की कमी का मुद्दा उठाया।
डॉक्टर और मरीज के बीच हो भावनात्मक रिश्ता
फाइनल एमबीबीएस प्रोफेशनल पार्ट-2 में डाॅ. आशिमा सचदेवा ने तीन गोल्ड मेडल और दस प्रमाणपत्र प्राप्त किए। वह अपने बैच में परीक्षा में प्रथम स्थान पर रही। दिल्ली की रहने वाली डा. आशिमा के पिता विजय सचदेवा एक व्यवसायी हैं। डाॅ. आशिमा का मानना है कि एक डाॅक्टर और मरीज के बीच भावनात्मक रिश्ता और भरोसा होता है। एक डाॅक्टर को मरीज की भावना समझकर ही उसका इलाज करना चाहिए। वह मरीजों से ऐसा ही रिश्ता कायम कर उनका इलाज करना चाहती हैं।
देश व समाज की सेवा करना लक्ष्य : डाॅ. कानन
डाॅ. कानन त्यागी को साल 2023 का मोस्ट पापुलर स्टूडेंट अवार्ड मिला। वह फाइनल एमबीबीएस प्रोफेशनल पार्ट-2 में द्वितीय स्थान पर रहीं। बुलंदशहर की रहने वाली कानन के पिता एक समाचार पत्र में काम करते हैं। कानन को नृत्य, गीत संगीत खेलकूद और अन्य गतिविधि में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रमाणपत्र और स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया। डाॅ. कानन बताती हैं कि पिता का सपना साकार करने के लिए भी वह मेडिकल क्षेत्र में आई। उनके पिता चाहते हैं कि वह गरीब मरीजों का इलाज करें, लेकिन वह डॉक्टर बनकर समाज और देश की सेवा करना चाहती है।
माता-पिता का सपना करना था साकार
बेस्ट गर्ल स्टूडेंट का अवार्ड जीतने डाॅ. राशि गर्ग मेरठ की रहने वाली हैं। फाइनल एमबीबीएस प्रोफेशनल पार्ट-एक में डाॅ. राशि को पांच गोल्ड मेडल सहित 14 प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। वह प्रथम स्थान पर रहीं। डाॅ. राशि के पिता डाॅ. दीपक गर्ग बाल रोग विशेषज्ञ और माता निरुपमा गर्ग भी डाॅक्टर हैं। वह कहती हैं कि डाॅक्टर बनने की प्रेरणा उन्हें पिता और माता दोनों से मिली। उन्होंने माता पिता के सपने को साकार कर दिया है।
आईएएस बनाना चाहते थे माता-पिता
स्टूडेंट आफ द ईयर और प्रधानाचार्य गोल्ड मेडल अवार्ड जीतने वाली डा. मेघा चटोपाध्याय गाजियाबाद की रहने वाली हैं। डाॅ. मेघा के पिता डाॅ. नीलांजल चटोपाध्याय और माता डा. श्रेया चटोपाध्याय शिक्षक हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि डाॅ. मेघा कोलकाता के एडवांस हेल्थ केयर फाउंडेशन से भी जुड़ी हुई है और इस एनजीओ के माध्यम से सामाजिक सेवा कार्य करती हैं। डाॅ. मेघा का कहना है कि मानव सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं है। वहीं उन्होंने बताया कि मेरे माता-पिता मुझे आईएएस बनता देखना चाहते थे, लेकिन मुझे डॉॅक्टर बनना था।
चिकित्सा सेवा से बेहतर कुछ नहीं
अभिनव भल्ला को डॉ. रजनी और डॉ. जीएस गुप्ता चल वैजयंती फार ओवर आल बेस्ट इंटर्न अवार्ड से सम्मानित किया गया। कानपुर के रहने वाले अभिनव के पिता डॉ. कपिल भल्ला और माता डॉ. वर्तिका भल्ला दोनों लेक्चरर है। अभिनव का कहना है कि समाज सेवा के लिए एक डॉक्टर से बेहतर प्रोफेशन और कुछ नहीं हो सकता है। मैं माता पिता की प्रेरणा से यहां पहुंचा हूं।