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डबल ड्राइवर योजना के आड़े आई कमाई, जनरथ हादसे के बाद यूपी रोडवेज ने लिया था फैसला

Wed, 31 Jul 2019 11:28 AM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 31 Jul 2019 11:28 AM IST
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Contractual drivers do not stand with two driver plan of Roadways buses on long routes
आगरा बस हादसा - फोटो : अमर उजाला
रोडवेज की जनरथ बस सेवा दुर्घटना में मारे गए 29 यात्रियों के बाद चेते रोडवेज ने लंबे रूटों पर डबल ड्राइवर (दो चालक) भेजने की योजना तैयार की है। लेकिन इस योजना के आड़े संविदा परिचालकों को प्रति किलोमीटर के हिसाब से मिलने वाले मानदेय की कमाई आ गई है। संविदा चालकों ने डबल चालक बस सेवा पर जाने से हाथ खड़े कर दिए है।
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पिछले दिनों लखनऊ से दिल्ली जा रही रोडवेज की जनरथ बस सेवा आगरा के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें चालक समेत 29 यात्रियों की मौत हो गई थी और 27 यात्री बुरी तरह घायल हुए थे। दुर्घटनाग्रस्त जनरथ बस सेवा पर एक ही चालक था। 
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अत्यधिक थकान होने के कारण चालक को झपकी आने से बस अनियंत्रित होकर नाले में गिर गई थी। भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों का सफर सुरक्षित बनाने के लिए विभाग ने 300 किलोमीटर से ज्यादा लंबे रूटों पर चलने वाली बसों में अब दो चालकों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन शुरू होने से पहले ही योजना का विरोध होना शुरू हो गया है। 
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विभाग के संविदा चालकों ने लंबे रूटों पर दो चालकों की ड्यूटी का विरोध किया है। चालकों का कहना है कि वर्तमान में मेरठ से जयपुर, बालाजी, अलवर, अजमेर, मेरठ-दिल्ली-मेरठ-देहरादून और ऋषिकेश जैसे लंबे रूटों पर चलने वाले चालकों के महीने में 6 से 7 हजार किलोमीटर हो जाते हैं। 

प्रति किलोमीटर मानदेय और इंसेंटिव मिलाकर चालक को 16 से 17 हजार रुपये मिलते हैं। लेकिन जब बसों पर दो चालक चलेंगे तो किलोमीटर घटकर आधे रह जाएंगे और कमाई भी आधी रह जाएगी। इससे उनके घर का खर्च नहीं चलेगा।

ऐसे रूटों पर लगाने होंगे नियमित चालक
संविदा चालकों के हाथ खड़े करने पर विभाग के सामने लंबे रूटों पर नियमित चालकों को लगाने का विकल्प बचा है, लेकिन विभाग के पास नियमित चालकों का पहले से ही टोटा है। चालकों की कुल संख्या के सापेक्ष केवल 25 से 30 फीसदी नियमित चालक है। इसमें से 10 फीसदी चालक रूट पर न चलकर विभिन्न अनुभागों में सेवा दे रहे हैं। 70 से ज्यादा चालक अक्षम हो गए हैं। ऐसे में रोडवेज के सामने लंबे रूटों पर डबल ड्राइवर लगाना बड़ी चुनौती बन गया है।

रीजन में चालकों-परिचालकों की संख्या
डिपो               चालक-परिचालक
मेरठ                     625
भैसाली                 400
बड़ौत                   400
सोहराबगेट             750
गढ़मुक्तेश्वर            390
कुल                   2565

ड्यूटी लगेगी तो जाना होगा
लंबे रूटों की बसों में दो चालक ड्यूटी पर भेजे जाने का निर्णय हुआ है। जिन चालकों की ड्यूटी लगेगी उन्हें रूट पर जाना होगा। मना करने वाले चालकों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। जहां तक कम किलोमीटर पर कम मानदेय का सवाल है तो इसके लिए उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी। -नीरज सक्सेना, आरएम मेरठ रीजन 
 
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