{"_id":"69f60e614cd88da237000cdd","slug":"consumers-are-upset-over-rising-bills-due-to-smart-meters-bhakiyu-raises-voice-meerut-news-c-44-1-smrt1055-112209-2026-05-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: स्मार्ट मीटरों के बढ़ते बिलों से उपभोक्ता परेशान, भाकियू ने उठाई आवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: स्मार्ट मीटरों के बढ़ते बिलों से उपभोक्ता परेशान, भाकियू ने उठाई आवाज
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। स्मार्ट एवं प्रीपेड बिजली मीटरों को लेकर क्षेत्र में उपभोक्ताओं की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। भाकियू किसान क्रांति की बैठक में किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में अचानक कई गुना वृद्धि हो रही हैश्र मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन (किसान क्रांति) की सरधना कार्यकारिणी ने भी चिंता जताई है। संगठन के जिलाध्यक्ष निखिल राव ने कहा कि बिना पर्याप्त जानकारी और जागरूकता के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का आरोप है कि कई उपभोक्ताओं के बिल पहले जहां 800 से 1000 रुपये आते थे,।स्मार्ट मीटर लगने के बाद यही बिल बढ़कर 3000 से 5000 रुपये तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा प्रीपेड व्यवस्था के तहत बैलेंस समाप्त होते ही बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, कृषि कार्य और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। भारतीय किसान यूनियन ने इन समस्याओं के विरोध में सोमवार को तहसील सरधना में एसडीएम को ज्ञापन सौंपने की घोषणा की है। ज्ञापन में स्मार्ट मीटरों की जांच, गलत बिलों के संशोधन, प्रीपेड व्यवस्था पर रोक और उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की जाएगी।
विज्ञापन
सरधना। स्मार्ट एवं प्रीपेड बिजली मीटरों को लेकर क्षेत्र में उपभोक्ताओं की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। भाकियू किसान क्रांति की बैठक में किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में अचानक कई गुना वृद्धि हो रही हैश्र मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन (किसान क्रांति) की सरधना कार्यकारिणी ने भी चिंता जताई है। संगठन के जिलाध्यक्ष निखिल राव ने कहा कि बिना पर्याप्त जानकारी और जागरूकता के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का आरोप है कि कई उपभोक्ताओं के बिल पहले जहां 800 से 1000 रुपये आते थे,।स्मार्ट मीटर लगने के बाद यही बिल बढ़कर 3000 से 5000 रुपये तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा प्रीपेड व्यवस्था के तहत बैलेंस समाप्त होते ही बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, कृषि कार्य और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। भारतीय किसान यूनियन ने इन समस्याओं के विरोध में सोमवार को तहसील सरधना में एसडीएम को ज्ञापन सौंपने की घोषणा की है। ज्ञापन में स्मार्ट मीटरों की जांच, गलत बिलों के संशोधन, प्रीपेड व्यवस्था पर रोक और उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की जाएगी।
विज्ञापन