{"_id":"69837b590cff676c98056165","slug":"constable-accused-of-demanding-money-memorandum-given-to-sdm-meerut-news-c-40-1-smrt1041-111539-2026-02-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: सिपाही पर रुपये मांगने का आरोप, एसडीएम को ज्ञापन दिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: सिपाही पर रुपये मांगने का आरोप, एसडीएम को ज्ञापन दिया
विज्ञापन
व्यापारी नेता सिपाही के खिलाफ सीएम के नाम एस डी एम को ज्ञापन देते हुए। (मवाना)
संवाद न्यूज एजेंसी
मवाना। व्यापारी नेताओं ने बुधवार को जांच के नाम पर सिपाही पर रुपये मांगने और जांच के लिए कागजात आगे न भेजने का का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम संतोष कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में व्यापारी मांगेराम मित्तल ने बताया कि उसका बड़ा बेटा नौकरी की तैयारी कर रहा है और छोटा बेटा मेरठ में बीटेक कर रहा है। प्रशासन ने उनके साथ बार-बार अमानवीय व्यवहार किया है। बेटे तुषार मित्तल ने तहसील में ईडब्ल्यूएस नवीनीकरण के लिए आवेदन में रिश्वत मांगी गई। परिवार ने रिश्वत देने से इन्कार किया तो उनका प्रमाणपत्र जानबूझकर रोक दिया गया। तहसील दिवस में शिकायत करने पर रिश्वत मांगने वाले कर्मचारी ने उन्हें धमकाया। बाद में जनदबाव के कारण मजबूरी में प्रमाणपत्र घर पर आकर दिया।
अब बेटे तुषार का पासपोर्ट आवेदन में उत्पीड़न किया गया। 30 जनवरी को मवाना थाने के पुलिसकर्मी ने तुषार को कॉल कर थाने के सामने स्थित लाइब्रेरी में बुलाया। उसके सभी दस्तावेज ले लिए और रुपयों की मांग की। रुपये देने से इन्कार किया तो जानबूझकर उसके कन्जज़ आगे नहीं भेजे गए। परिणामस्वरूप 3 फरवरी को उसे पुनः गाजियाबाद बुलाया गया। ज्ञापन देने वालों में शैवाल दुबलिश, राजबीर चौधरी, बोनू सूर्या, मांगेराम मित्तल गौरव रस्तोगी, अंकित जैन आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
सीओ पंकज लवानिया का कहना है कि इस प्रकरण में अपने स्तर से जांच कराई थी। शिकायतकर्ता व सिपाही को बुलाकर जानकारी की। शिकायतकर्ता ने कहा कि सिपाही ने रुपये नहीं मांगे थे, स्वयं ही शिकायतकर्ता ने रुपये देने की पेशकश की थी। सिपाही ने पैसा नहीं लिया है। कागजात सिपाही द्वारा भेज दिए गए थे।
विज्ञापन
मवाना। व्यापारी नेताओं ने बुधवार को जांच के नाम पर सिपाही पर रुपये मांगने और जांच के लिए कागजात आगे न भेजने का का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम संतोष कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में व्यापारी मांगेराम मित्तल ने बताया कि उसका बड़ा बेटा नौकरी की तैयारी कर रहा है और छोटा बेटा मेरठ में बीटेक कर रहा है। प्रशासन ने उनके साथ बार-बार अमानवीय व्यवहार किया है। बेटे तुषार मित्तल ने तहसील में ईडब्ल्यूएस नवीनीकरण के लिए आवेदन में रिश्वत मांगी गई। परिवार ने रिश्वत देने से इन्कार किया तो उनका प्रमाणपत्र जानबूझकर रोक दिया गया। तहसील दिवस में शिकायत करने पर रिश्वत मांगने वाले कर्मचारी ने उन्हें धमकाया। बाद में जनदबाव के कारण मजबूरी में प्रमाणपत्र घर पर आकर दिया।
विज्ञापन
अब बेटे तुषार का पासपोर्ट आवेदन में उत्पीड़न किया गया। 30 जनवरी को मवाना थाने के पुलिसकर्मी ने तुषार को कॉल कर थाने के सामने स्थित लाइब्रेरी में बुलाया। उसके सभी दस्तावेज ले लिए और रुपयों की मांग की। रुपये देने से इन्कार किया तो जानबूझकर उसके कन्जज़ आगे नहीं भेजे गए। परिणामस्वरूप 3 फरवरी को उसे पुनः गाजियाबाद बुलाया गया। ज्ञापन देने वालों में शैवाल दुबलिश, राजबीर चौधरी, बोनू सूर्या, मांगेराम मित्तल गौरव रस्तोगी, अंकित जैन आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
सीओ पंकज लवानिया का कहना है कि इस प्रकरण में अपने स्तर से जांच कराई थी। शिकायतकर्ता व सिपाही को बुलाकर जानकारी की। शिकायतकर्ता ने कहा कि सिपाही ने रुपये नहीं मांगे थे, स्वयं ही शिकायतकर्ता ने रुपये देने की पेशकश की थी। सिपाही ने पैसा नहीं लिया है। कागजात सिपाही द्वारा भेज दिए गए थे।