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Meerut News: सड़कों पर दौड़ रहे हैं कंडम वाहन, आरटीओ विभाग मौन
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मेरठ। जिले की सड़कों पर कंडम वाहनों की भरमार है। ऐसे वाहन प्रदूषण को ही बढ़ावा नहीं दे रहे हैं, बल्कि एनअीटी के आदेशों को भी पलीता लगा रहे हैं। उधर संभागीय परिवहन विभाग पूरी तरह मौन है। सरकारी विभागों में लगी गाड़ियों के बेड़ों में भी कंडम वाहन शामिल हैं। सभी पर विभाग के अधिकारियों का आशीर्वाद है। एफसीआई के गोदामों से सरकारी गेहूं व चावल की ढुलाई में लगे कंडम वाहनों का मामला कई बार उठा, लेकिन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। उधर, अभी तक जिले में स्क्रेप सेंटर भी संचालित नहीं हो पाया है। वह अलग बात है कि आरटीओ प्रशासन ने ऐसे वाहनों की एनओसी निरस्त करनी शुरू कर दी है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी ने एनसीआर में डीजल चलित वाहनों की उम्र दस साल और पेट्रोल चलित वाहनों की उम्र 15 साल निर्धारित की है। एनसीआर में निर्धारित उम्र पूरा करने वाले वाहन किसी भी कीमत पर दिल्ली एनसीआर की सड़कों पर नहीं चल पाएंगे। ऐसे वाहन पकड़े जाने पर जब्त करने और भारी जुर्माने की कार्रवाई का प्रावधान है। जिले में प्रतिवर्ष लगभग 18-20 हजार वाहनों का रजिस्टे्रशन हो रहा है। अपनी उम्र पूरी करने वाले वाहनों को एनसीआर से बाहर दूसरे जनपदों में स्थानांतरण कराने के लिए एनओसी की सुविधा दी हुई है। इसका फायदा भी काफ कम लोग ले पा रहे हैं। कंडम वाहन, ओवरलोड़ जैसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संभागीय परिवहन विभाग में अलग से प्रवर्तन दल गठित है। इसकी पूरी जिम्मेदारी ऐसे वाहनों पर प्रतिबंध लगाना और कार्रवाई करना है। इस संबंध में आरटीओ प्रवर्तन राजकुमार सिंह का कहना है कि ऐसे वाहनों के खिलाफ एनओसी निरस्त करने की कार्रवाई चल रही है। हाल ही में एक स्कूल की बस भी पकड़ी गई। कंडम वाहन कितने हैं यह तो स्पष्ट जानकारी नहीं, लेकिन इतना जरूर है कि जिले में एनजीटी के नियमों का अनुपालन कराया जा रहा है।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी ने एनसीआर में डीजल चलित वाहनों की उम्र दस साल और पेट्रोल चलित वाहनों की उम्र 15 साल निर्धारित की है। एनसीआर में निर्धारित उम्र पूरा करने वाले वाहन किसी भी कीमत पर दिल्ली एनसीआर की सड़कों पर नहीं चल पाएंगे। ऐसे वाहन पकड़े जाने पर जब्त करने और भारी जुर्माने की कार्रवाई का प्रावधान है। जिले में प्रतिवर्ष लगभग 18-20 हजार वाहनों का रजिस्टे्रशन हो रहा है। अपनी उम्र पूरी करने वाले वाहनों को एनसीआर से बाहर दूसरे जनपदों में स्थानांतरण कराने के लिए एनओसी की सुविधा दी हुई है। इसका फायदा भी काफ कम लोग ले पा रहे हैं। कंडम वाहन, ओवरलोड़ जैसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संभागीय परिवहन विभाग में अलग से प्रवर्तन दल गठित है। इसकी पूरी जिम्मेदारी ऐसे वाहनों पर प्रतिबंध लगाना और कार्रवाई करना है। इस संबंध में आरटीओ प्रवर्तन राजकुमार सिंह का कहना है कि ऐसे वाहनों के खिलाफ एनओसी निरस्त करने की कार्रवाई चल रही है। हाल ही में एक स्कूल की बस भी पकड़ी गई। कंडम वाहन कितने हैं यह तो स्पष्ट जानकारी नहीं, लेकिन इतना जरूर है कि जिले में एनजीटी के नियमों का अनुपालन कराया जा रहा है।
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