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Meerut News: बिलों के भुगतान में देरी पर कॉलेज नाराज, कोर्ट जाने की चेतावनी
Wed, 12 Nov 2025 09:34 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 12 Nov 2025 09:34 PM IST
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स्ववित्तपोषित संस्थानों ने सीसीएसयू के वित्त अधिकारी को पत्र लिखा, खातों में भुगतान भेजने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के स्ववित्तपोषित संस्थानों ने प्रयोगात्मक परीक्षाओं के पारिश्रमिक और टीए-डीए बिलों के भुगतान में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। फेडरेशन ने परीक्षा नियंत्रक और वित्त अधिकारी को पत्र लिखकर मांग की है कि परीक्षकों का भुगतान उनके खातों में किया जाए या संस्थानों को अग्रिम धनराशि उपलब्ध कराई जाए। ऐसा न करने पर न्यायालय में ले जाने की चेतावनी दी गई है।
पत्र में कहा गया है कि विगत कई वर्षों से विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित संस्थानों को प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए अग्रिम राशि नहीं दे रहा। संस्थानों द्वारा परीक्षा कराकर जमा की गई पत्रावलियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे भुगतान वर्षों से लंबित हैं। इससे संस्थानों में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। वर्तमान शैक्षिक सत्र में आगामी प्रयोगात्मक परीक्षाओं को देखते हुए फेडरेशन ने आग्रह किया कि नामित परीक्षकों के बिल पूरे होने पर सीधे उनके खाते में भुगतान की व्यवस्था की जाए।
संस्थानों से परीक्षकों के बिल चुकाना आर्थिक रूप से असंभव है।फेडरेशन अध्यक्ष नितिन यादव और प्रो. निधि शुक्ला ने पत्र में अविलंब निर्णय लेने और आदेश जारी करने की मांग की। एक प्रतिलिपि कुलपति को भी भेजी गई है। फेडरेशन का कहना है कि विश्वविद्यालय से सकारात्मक सहयोग नहीं मिला तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाना मजबूरी होगी। यह मामला स्ववित्तपोषित कॉलेजों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों को उजागर करता है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि समस्या नहीं सुलझी, तो परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के स्ववित्तपोषित संस्थानों ने प्रयोगात्मक परीक्षाओं के पारिश्रमिक और टीए-डीए बिलों के भुगतान में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। फेडरेशन ने परीक्षा नियंत्रक और वित्त अधिकारी को पत्र लिखकर मांग की है कि परीक्षकों का भुगतान उनके खातों में किया जाए या संस्थानों को अग्रिम धनराशि उपलब्ध कराई जाए। ऐसा न करने पर न्यायालय में ले जाने की चेतावनी दी गई है।
पत्र में कहा गया है कि विगत कई वर्षों से विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित संस्थानों को प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए अग्रिम राशि नहीं दे रहा। संस्थानों द्वारा परीक्षा कराकर जमा की गई पत्रावलियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे भुगतान वर्षों से लंबित हैं। इससे संस्थानों में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। वर्तमान शैक्षिक सत्र में आगामी प्रयोगात्मक परीक्षाओं को देखते हुए फेडरेशन ने आग्रह किया कि नामित परीक्षकों के बिल पूरे होने पर सीधे उनके खाते में भुगतान की व्यवस्था की जाए।
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संस्थानों से परीक्षकों के बिल चुकाना आर्थिक रूप से असंभव है।फेडरेशन अध्यक्ष नितिन यादव और प्रो. निधि शुक्ला ने पत्र में अविलंब निर्णय लेने और आदेश जारी करने की मांग की। एक प्रतिलिपि कुलपति को भी भेजी गई है। फेडरेशन का कहना है कि विश्वविद्यालय से सकारात्मक सहयोग नहीं मिला तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाना मजबूरी होगी। यह मामला स्ववित्तपोषित कॉलेजों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों को उजागर करता है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि समस्या नहीं सुलझी, तो परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
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