दौरा: मुख्यमंत्री जी क्रांति के शहर को वीरगाथाएं सहेजने के लिए तीन करोड़ भी नहीं मिले,आपके प्रोजेक्ट में शामिल शूटिंग रेंज भी अटकी
दस मई 1857 की क्रांति के शहर के साथ ऐसा सलूक। 165 वर्ष बीत गए पर शहर में बिखरीं क्रांति की गाथाओं को सहेजने के लिए आज तक ठोस प्रयास नहीं हुए। मेरठ-दिल्ली हाईवे पर बना क्रांति गेट तक उखड़ गया। खुद सीएम योगी ने क्रांति पथ का एलान किया पर 3.61 करोड़ के बजट में सिर्फ 50 लाख ही मिले।
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1857 की 165वीं वर्षगांठ पर पूरा शहर क्रांतिवीरों की याद में नमन करने के लिए जुटेगा। एक दिन पहले से ही शहर में कई स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। वहीं, प्रशासन की ओर से क्रांति दिवस को भव्य बनाने के लिए विक्टोरिया पार्क और शहीद स्मारक में कार्यक्रम कराए जा रहे हैं। अफसोस की शहर में एमडीए, नगर निगम और प्रशासन क्रांति द्वार तक नहीं बना पाए। क्रांति पथ भी बजट के अभाव में समय अंतराल में पूरा नहीं बन सका है। ये हाल तब है जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा चुनाव से पहले लखनऊ से इसका शिलान्यास किया था।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के निर्माण से पहले परतापुर इंटरचेंज के पास क्रांति द्वार लगा हुआ था। इसे उखाड़कर फेंक दिया गया, लेकिन इंटरचेंज का निर्माण होने के बाद इसे लगाने के लिए कोई भी विचार नहीं किया गया। कई बार एमडीए ने शहर के चारों कोनों में क्रांति और खेल से जुड़े स्तंभ बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की, लेकिन ये सिर्फ फाइलों में ही चलती रही।
1857 की क्रांति से जुड़े स्थलों को जोड़ने के लिए तीन करोड़ 61 लाख रुपये से शहीद स्मारक से क्रांति पथ का निर्माण किया जाना था। इसे मार्च-2022 तक पूरा करना था, जिसमें 21 स्थलों को जोड़कर बनाया जाना था लेकिन मात्र 50 लाख रुपये की किस्त मिलने से कार्य पूरा नहीं हो सका है। वहीं, कुछ स्थानों पर कैटोनमेंट बोर्ड ने आपत्ति लगा दी थी।
ये हैं क्रांति से जुड़े अहम स्थान
195 दिल्ली रोड, शहीद स्मारक, सदर बाजार, सदर थाना, पुलिस स्ट्रीट, वेस्ट एंड रोड, ऑफिसर्स मैस, काली पलटन मंदिर, 20वीं नेटिव रेजिमेंट, एमएच रोड बंगला, सेंट्रल रेस्ट, 11वीं नेटिव रेजिमेंट, परेड ग्राउंड रेजिमेंट, थर्ड नेटिव लाइट रेजिमेंट, चार्ल्स डॉसन का घर, चार्लोट चैंबर, बंगला नंबर-241, कैप्टन एससी क्रेज का घर, बर्न डाउन बंगला, करामिकल स्मिथ का घर व मिलिट्री अस्पताल है।
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यहां चाहिए इनर रिंग रोड फ्लाईओवर और हवाई उड़ान
योगी आदित्यनाथ दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार मेरठ आ रहे हैं। शहर को सीएम से उम्मीद है कि मेरठ से हवाई उड़ान और इनर रिंग रोड के प्रोजेक्ट जमीन पर आएं। शहर सच में स्मार्ट और जाम से मुक्त हो। हापुड़ रोड से एनएच-58 को जोड़ने के लिए इनर रिंग रोड का प्रस्ताव 20 सालों से चल रहा है। हालांकि, पिछले एक महीने से शासन ने प्राथमिकता पर इनर रिंग रोड को शामिल किया है, लेकिन अभी भी बजट का अभाव होने के कारण लोक निर्माण विभाग प्रस्ताव तैयार नहीं कर सका है। सिर्फ हापुड़ रोड को दिल्ली रोड से जोड़ने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर 400 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है।
हवाई उड़ान : मेरठ से प्रयागराज, लखनऊ के लिए कई बार एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने दौरा किया। एक बार तो जूम एयरवेज ने मेरठ से हवाई उड़ान पर सहमति जताई लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हो सका। प्रदेश और केंद्र सरकार के मंत्री मेरठ से हवाई उड़ान का वादा कर चुके हैं, लेकिन यहां हवाई पट्टी विस्तारीकरण सहित अन्य कार्य करने पर 500 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
फ्लाईओवर : शहर में बढ़ते यातायात को देखते हुए एक भी फ्लाईओवर नहीं है। हापुड़ अड्डा, बच्चा पार्क, रेलवे रोड चौराहा पर फ्लाईओवर की मांग है। फ्लाईओवर के लिए 100 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
आपके प्रोजेक्ट में शामिल शूटिंग रेंज भी अटकी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रोजेक्ट में शामिल अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज का निर्माण कार्य अटक गया है। कैलाश प्रकाश स्टेडियम में 8 करोड़ 65 लाख की लागत से तैयार हो रही शूटिंग रेंज को अभी तक एक करोड़ की पहली क़िस्त ही मिली है। दूसरी क़िस्त न आने के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। कंप्यूटराइज्ड 54 टारगेट वाली शूटिंग रेंज की नींव व सरियों के बीम ही खड़े हो पाए हैं। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी गदाधर बारीकी ने बताया उम्मीद है जल्द दूसरी किस्त भी आएगी।
हॉकी एस्ट्रोटर्फ मैदान उद्घाटन का कर रहा इंतजार
कैलाश प्रकाश स्टेडियम में केंद्र सरकार की खेलो इंडिया योजना के तहत साढ़े 5 करोड़ की लागत से हॉकी एस्ट्रोटर्फ मैदान तैयार है, लेकिन अभी तक उसका उद्घाटन का फीता नहीं कट पाया है। तैयार एस्ट्रोटर्फ के उद्घाटन का खिलाड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
सिंथेटिक ट्रैक भी नहीं मिला
स्मार्ट सिटी योजना से कैलाश प्रकाश स्टेडियम में चार सौ मीटर का सिंथेटिक ट्रैक बनना है, लेकिन बजट न मिलने से सिंथेटिक ट्रैक नहीं मिला है। खिलाड़ियों को अभ्यास करने के लिए दिल्ली जाना पड़ रहा है या उबड़-खाबड़ जमीन पर अभ्यास को मजबूर हैं।
सीवरलाइन न पानी, शहर कैसे हो स्मार्ट
महानगर के बाहरी इलाकों में 594 किमी पाइप लाइन की जरूरत है। वहीं 23 ओवर हेड टैंक, 31 नलकूप और 250 एमएलडी की क्षमता वाले गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट की जरूरत है। इसके लिए सरकार से 627.55 करोड़ के बजट की मांग है। हर घर पर पानी का मीटर लगाने के लिए 430 करोड़ के बजट की आवश्यकता है।
शहर के 90 वार्ड में से 32 वार्डों में सीवर लाइन आंशिक रूप में है। 44 वार्ड तो ऐसे हैं जहां पर सीवर की पाइप ही नहीं है। इसके लिए शहर को 2735 करोड़ की जरूरत है।